अल-आराफ · 175/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ ۝١٧٥
Watlu `alaihim naba allazeee aatainaahu Aayaatinaa fansalakha minhaa fa atba`a hush Shaytaano fakaana minal ghaaween
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَانْسَلَخَ مِنْهَا: उन आयतों से निकल गया, जैसे साँप अपनी केंचुली से निकल जाता है। अर्थात उन्होंने उन आयतों को पूरी तरह त्याग दिया और उनसे कोई लाभ नहीं उठाया।
  • فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ: शैतान उसके पीछे लग गया और उस पर पूरी तरह हावी हो गया।
  • الْغَاوِينَ: पथभ्रष्ट, गुमराह और विनष्ट होने वाले लोग।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन लोगों को उस व्यक्ति का हाल सुनाएँ जिसे हमने अपनी आयतें और स्पष्ट प्रमाण दिए थे। उसने उन्हें सीखा और समझा भी, उसे हक़ का ज्ञान हुआ, लेकिन उसने उन पर अमल नहीं किया। उसने उन आयतों को पूरी तरह त्याग दिया और उनसे इस प्रकार निकल गया जैसे साँप अपनी केंचुली से निकल जाता है। उसके इस त्याग के कारण शैतान उस पर हावी हो गया और उसका साथी बन गया। फिर वह उन लोगों में शामिल हो गया जो पथभ्रष्ट और विनष्ट हो गए, जबकि पहले वह हिदायत पाए हुए लोगों में से था। यह उसकी अवज्ञा और शैतान की आज्ञा मानने का परिणाम था कि वह ज्ञान पाकर भी गुमराही में जा पड़ा और उसका ज्ञान उसके लिए बर्बादी का कारण बन गया।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत उन विद्वानों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है जो ज्ञान प्राप्त करते हैं लेकिन उस पर अमल नहीं करते। ज्ञान केवल सीखने का नाम नहीं, बल्कि उस पर अमल करना ही उसकी असली पहचान है।
  2. ज्ञान और हिदायत मिलने के बाद भी अगर इंसान उसे त्याग देता है, तो शैतान उस पर काबू पा लेता है और उसे गुमराही की ओर ले जाता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि ज्ञान का उद्देश्य अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन है। अगर ज्ञान इंसान को अल्लाह के करीब नहीं लाता, तो वह उसके लिए आज़ाब का कारण बन सकता है।
  4. इस्लाम में अमल के बिना ज्ञान अधूरा है। एक सच्चा मुसलमान वही है जो जो कुछ सीखता है, उस पर अमल करता है और अपने ज्ञान से दूसरों को भी नेकी की ओर बुलाता है।
  5. यह कहानी हमें शैतान के धोखे से बचने की ताकीद करती है कि जो व्यक्ति अल्लाह की आयतों से दूर होता है, वह शैतान का शिकार बन जाता है। इसलिए हमें हमेशा क़ुरआन और सुन्नत से जुड़े रहना चाहिए।


📜 आयत 173-177 — अल-आराफ

173أَوْ تَقُولُوا إِنَّمَا أَشْرَكَ آبَاؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّن بَعْدِهِمْ ۖ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ الْمُبْطِلُونَ
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लोगों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके
174وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आएं
175وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया
176وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَث ۚ ذَّٰلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ فَاقْصُصِ الْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें
177سَاءَ مَثَلًا الْقَوْمُ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَأَنفُسَهُمْ كَانُوا يَظْلِمُونَ
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
175आयत

अनुवाद — अल-आराफ 175

सूरा अल-आराफ आयत 175 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का…

सूरा आयत 175/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 173–177. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए