Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَلَنَقُصَّنَّ — हम अवश्य सुनाएँगे / बयान करेंगे
- بِعِلْمٍ — पूर्ण ज्ञान के साथ
- غَائِبِينَ — अनुपस्थित / छिपे हुए
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि क़ियामत के दिन वह सभी लोगों से उनके कर्मों का पूरा हिसाब लेंगे। यह हिसाब किसी अनुमान या अधूरी जानकारी पर आधारित नहीं होगा, बल्कि अल्लाह के पूर्ण और सटीक ज्ञान के आधार पर होगा। अल्लाह को उन सभी कर्मों की पूरी जानकारी है जो लोगों ने दुनिया में किए — चाहे वे अच्छे हों या बुरे, छोटे हों या बड़े, खुले में किए गए हों या छिपकर।
अल्लाह कहता है कि वह कभी भी अपने बंदों से अनुपस्थित या बेखबर नहीं रहा। वह हर समय, हर पल, हर स्थान पर मौजूद है और उसकी नज़र से कुछ भी छिपा नहीं है। न कोई बात उससे छिपी है, न कोई कर्म उसकी जानकारी से बाहर है। यहाँ तक कि इंसान के दिल के राज़ और उसके अंदर की नीयतें भी अल्लाह से छिपी नहीं हैं।
यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो दुनिया में यह सोचकर गुनाह करते हैं कि कोई उन्हें देख नहीं रहा। वे भूल जाते हैं कि अल्लाह हर वक़्त उनके साथ है और उनके हर अमल को रिकॉर्ड कर रहा है। क़ियामत के दिन जब सारे पर्दे उठ जाएँगे, तो हर इंसान अपने किए हुए कर्मों का सामना करेगा और अल्लाह उसे उसके कर्मों की पूरी कहानी सुनाएगा — ऐसी कहानी जिसमें कोई कमी नहीं होगी और जो पूर्ण सत्य पर आधारित होगी।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: इस आयत से मुसलमान को यह सीख मिलती है कि वह हर वक़्त अल्लाह की नज़र में है। यह एहसास इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक कामों की तरफ प्रेरित करता है। जब इंसान को यकीन हो जाए कि अल्लाह उसे देख रहा है, तो वह अकेले में भी वह काम नहीं करता जो अल्लाह को नापसंद है।
- इंसाफ़ का वादा: यह आयत हमें यकीन दिलाती है कि क़ियामत का दिन पूर्ण न्याय का दिन होगा। जिसने भी कोई अच्छा या बुरा काम किया होगा, उसे उसका पूरा बदला मिलेगा। यह विश्वास इंसान को सब्र और अच्छे आचरण पर क़ायम रहने की ताक़त देता है।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: यह आयत इंसान को यह सिखाती है कि उसके हर कर्म की रिकॉर्डिंग हो रही है। यह एहसास उसे अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत करता है और उसे बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: जब इंसान यह जानता है कि अल्लाह उसके हर कर्म से वाक़िफ़ है, तो वह यह भी समझता है कि अल्लाह उसकी मेहनत और नेकियों को कभी बेकार नहीं जाने देगा। यह उम्मीद उसे नेक रास्ते पर चलते रहने की हिम्मत देती है।
📜 आयत 5-9 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 7
सूरा अल-आराफ आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हम उनसे हक़ीक़त हाल ख़ूब समझ बूझ के (ज़रा…सूरा आयत 7/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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