अल-आराफ · 7/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِم بِعِلْمٍ ۖ وَمَا كُنَّا غَائِبِينَ ۝٧
Falanaqussanna `alaihim bi`ilminw wa maa kunnaa ghaaa`ibeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हम उनसे हक़ीक़त हाल ख़ूब समझ बूझ के (ज़रा ज़रा) दोहराएगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَلَنَقُصَّنَّ — हम अवश्य सुनाएँगे / बयान करेंगे
  • بِعِلْمٍ — पूर्ण ज्ञान के साथ
  • غَائِبِينَ — अनुपस्थित / छिपे हुए

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि क़ियामत के दिन वह सभी लोगों से उनके कर्मों का पूरा हिसाब लेंगे। यह हिसाब किसी अनुमान या अधूरी जानकारी पर आधारित नहीं होगा, बल्कि अल्लाह के पूर्ण और सटीक ज्ञान के आधार पर होगा। अल्लाह को उन सभी कर्मों की पूरी जानकारी है जो लोगों ने दुनिया में किए — चाहे वे अच्छे हों या बुरे, छोटे हों या बड़े, खुले में किए गए हों या छिपकर।

अल्लाह कहता है कि वह कभी भी अपने बंदों से अनुपस्थित या बेखबर नहीं रहा। वह हर समय, हर पल, हर स्थान पर मौजूद है और उसकी नज़र से कुछ भी छिपा नहीं है। न कोई बात उससे छिपी है, न कोई कर्म उसकी जानकारी से बाहर है। यहाँ तक कि इंसान के दिल के राज़ और उसके अंदर की नीयतें भी अल्लाह से छिपी नहीं हैं।

यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो दुनिया में यह सोचकर गुनाह करते हैं कि कोई उन्हें देख नहीं रहा। वे भूल जाते हैं कि अल्लाह हर वक़्त उनके साथ है और उनके हर अमल को रिकॉर्ड कर रहा है। क़ियामत के दिन जब सारे पर्दे उठ जाएँगे, तो हर इंसान अपने किए हुए कर्मों का सामना करेगा और अल्लाह उसे उसके कर्मों की पूरी कहानी सुनाएगा — ऐसी कहानी जिसमें कोई कमी नहीं होगी और जो पूर्ण सत्य पर आधारित होगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की निगरानी का एहसास: इस आयत से मुसलमान को यह सीख मिलती है कि वह हर वक़्त अल्लाह की नज़र में है। यह एहसास इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक कामों की तरफ प्रेरित करता है। जब इंसान को यकीन हो जाए कि अल्लाह उसे देख रहा है, तो वह अकेले में भी वह काम नहीं करता जो अल्लाह को नापसंद है।
  2. इंसाफ़ का वादा: यह आयत हमें यकीन दिलाती है कि क़ियामत का दिन पूर्ण न्याय का दिन होगा। जिसने भी कोई अच्छा या बुरा काम किया होगा, उसे उसका पूरा बदला मिलेगा। यह विश्वास इंसान को सब्र और अच्छे आचरण पर क़ायम रहने की ताक़त देता है।
  3. ज़िम्मेदारी का एहसास: यह आयत इंसान को यह सिखाती है कि उसके हर कर्म की रिकॉर्डिंग हो रही है। यह एहसास उसे अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत करता है और उसे बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
  4. अल्लाह की रहमत की उम्मीद: जब इंसान यह जानता है कि अल्लाह उसके हर कर्म से वाक़िफ़ है, तो वह यह भी समझता है कि अल्लाह उसकी मेहनत और नेकियों को कभी बेकार नहीं जाने देगा। यह उम्मीद उसे नेक रास्ते पर चलते रहने की हिम्मत देती है।


📜 आयत 5-9 — सूरा अल-आराफ

5فَمَا كَانَ دَعْوَاهُمْ إِذْ جَاءَهُم بَأْسُنَا إِلَّا أَن قَالُوا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ
कि वह लोग या तो रात की नींद सो रहे थे या दिन को क़लीला (खाने के बाद का लेटना) कर रहे थे तब हमारा अज़ाब उन पर आ पड़ा तो उनसे सिवाए इसके और कुछ न कहते बन पड़ा कि हम बेशक ज़ालिम थे
6فَلَنَسْأَلَنَّ الَّذِينَ أُرْسِلَ إِلَيْهِمْ وَلَنَسْأَلَنَّ الْمُرْسَلِينَ
फिर हमने तो ज़रूर उन लोगों से जिनकी तरफ पैग़म्बर भेजे गये थे (हर चीज़ का) सवाल करेगें और ख़ुद पैग़म्बरों से भी ज़रूर पूछेगें
7فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِم بِعِلْمٍ ۖ وَمَا كُنَّا غَائِبِينَ
फिर हम उनसे हक़ीक़त हाल ख़ूब समझ बूझ के (ज़रा ज़रा) दोहराएगें
8وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ ۚ فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
और हम कुछ ग़ायब तो थे नहीं और उस दिन (आमाल का) तौला जाना बिल्कुल ठीक है फिर तो जिनके (नेक अमाल के) पल्ले भारी होगें तो वही लोग फायज़ुलहराम (नजात पाये हुए) होगें
9وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُم بِمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَظْلِمُونَ
(और जिनके नेक अमाल के) पल्ले हलके होगें तो उन्हीं लोगों ने हमारी आयत से नाफरमानी करने की वजह से यक़ीनन अपना आप नुक़सान किया
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-आराफ 7

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Monday, September 28, 2026

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