Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ: तुम पुरुषों के पास जाते हो (यहाँ अर्थ है: उनसे अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते हो)।
- شَهْوَةً: इच्छा और वासना की पूर्ति के लिए।
- مِن دُونِ النِّسَاءِ: औरतों को छोड़कर।
- مُسْرِفُونَ: हद से गुज़रने वाले, सीमा का उल्लंघन करने वाले।
विस्तृत व्याख्या:
हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को समझा रहे हैं और उन्हें उनके उस घिनौने काम पर टोक रहे हैं जो उन्होंने अपनी बुरी आदत बना लिया था। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि तुम लोग पुरुषों के पास जाते हो—यानी उनसे अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते हो—और यह काम सिर्फ अपनी शहवत (वासना) की पूर्ति के लिए करते हो, जबकि अल्लाह ने तुम्हारे लिए औरतों को हलाल किया है। तुमने उन्हें छोड़ दिया और उस रास्ते को अपनाया जो फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) के खिलाफ है, अक्ल और समझ के खिलाफ है, और जिसे अल्लाह ने सख्त मना किया है।
यह काम न तो किसी शरई हुक्म पर आधारित था, न किसी अक्लमंदी पर, और न ही किसी फ़ितरत पर। यह सिर्फ उनकी अपनी मनमानी और हद से गुज़रने की वजह से था। अल्लाह फ़रमाता है: "बल्कि तुम लोग हद से गुज़रने वाले लोग हो"—यानी तुमने अल्लाह की तय की हुई हदों को पार कर दिया, हलाल को छोड़कर हराम की तरफ चले गए, और उस काम में लग गए जो इंसानियत के लिए शर्मनाक है। यह काम क़ौमे-लूत की बिदअत (नई ईजाद) थी, जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया था। इसीलिए यह सबसे बड़ी फ़ाहिश (अश्लीलता) और सबसे बड़ा गुनाह है।
शिक्षाएँ और फ़ायदे:
- फ़ितरत की पहचान: अल्लाह ने इंसान को एक साफ़ और सही फ़ितरत पर पैदा किया है। उस फ़ितरत के खिलाफ जाना, जैसे पुरुषों का पुरुषों की तरफ रुख करना, इंसानियत के खिलाफ है और अल्लाह की नाराज़गी का कारण है।
- हलाल और हराम की सीमा: अल्लाह ने इंसान के लिए जो हलाल किया है, उसी में भलाई और बरकत है। हराम की तरफ जाना इंसान को बर्बादी की तरफ ले जाता है।
- इस्लाम की पाकीज़गी: इस्लाम पाकीज़गी और सफ़ाई का दीन है। यह हर उस काम से रोकता है जो इंसान की गरिमा को ठेस पहुँचाए और समाज में बुराई फैलाए।
- अल्लाह की रहमत: अल्लाह ने हज़रत लूत के ज़रिए अपनी क़ौम को समझाया, ताकि वे बाज़ आ जाएँ। यह अल्लाह की रहमत है कि वह गुनाहगारों को मौका देता है तौबा करने का। हमें भी चाहिए कि अपनी गलतियों से तौबा करें और अल्लाह की तरफ लौटें।
- समाज की सुरक्षा: इस्लाम समाज को बुराइयों से बचाना चाहता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हर वह काम जो समाज में फ़ाहिशा (अश्लीलता) फैलाए, उससे दूर रहना चाहिए और दूसरों को भी रोकना चाहिए।
📜 आयत 79-83 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 81
सूरा अल-आराफ आयत 81 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हाँ तुम औरतों को छोड़कर शहवत परस्ती के वास्ते मर्दों…सूरा आयत 81/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 79–83. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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