अल-आराफ · 82/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا أَخْرِجُوهُم مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ ۝٨٢
Wa maa kaana jawaaba qawmihee illaa an qaalooo akhrijoohum min qaryatikum innahum unaasuny yatatah haroon
📖 हिंदी अर्थ
सिर्फ करनें वालों (को नुत्फे को ज़ाए करते हो उस पर उसकी क़ौम का उसके सिवा और कुछ जवाब नहीं था कि वह आपस में कहने लगे कि उन लोगों को अपनी बस्ती से निकाल बाहर करो क्योंकि ये तो वह लोग हैं जो पाक साफ बनना चाहते हैं)

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • جَوَابَ: उत्तर, जवाब
  • أَخْرِجُوهُم: उन्हें निकाल दो
  • قَرْيَتِكُمْ: तुम्हारी बस्ती से
  • يَتَطَهَّرُونَ: पवित्रता चाहते हैं, स्वयं को पाक रखते हैं

तफ़सीर:

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को उनके घिनौने कर्म (समलैंगिकता) से रोका और उन्हें अल्लाह का अज़ाब से डराया, तो उस क़ौम का जवाब किसी तर्क, सुधार या विचार-विमर्श पर आधारित नहीं था। उनका एकमात्र उत्तर यह था कि उन्होंने आपस में कहा: "इन्हें अपनी बस्ती से निकाल दो।" उनका इशारा हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके अनुयायियों की ओर था। उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग पवित्रता चाहते हैं, यानी ये हमारे कर्मों से बचते हैं और स्वयं को पाक रखते हैं। यह बात उन्होंने उपहास और मज़ाक़ के रूप में कही, क्योंकि उनकी नज़र में पवित्रता और नेकी एक बुराई थी। उन्होंने सोचा कि इन पवित्र लोगों को अपने बीच रखना ठीक नहीं, इसलिए उन्हें निकाल बाहर करो।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के उपदेशक को हमेशा विरोध और तकलीफ़ का सामना करना पड़ता है, लेकिन उसे अपने मिशन पर डटे रहना चाहिए।
  2. बुराई पर अड़े लोग अक्सर अच्छाई का मज़ाक़ उड़ाते हैं और नेक लोगों को समाज से अलग करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है।
  3. पवित्रता और नेकी कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि यही इंसान की असली पहचान है। मुसलमान को चाहिए कि वह बुराई के माहौल में भी अपनी पवित्रता पर कायम रहे।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि समाज में बुराई फैलाने वालों का अंजाम अल्लाह के अज़ाब के अलावा कुछ नहीं, और नेक लोगों को हमेशा अल्लाह की रहमत मिलती है।


📜 आयत 80-84 — अल-आराफ

80وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنْ أَحَدٍ مِّنَ الْعَالَمِينَ
और (लूत को हमने रसूल बनाकर भेजा था) जब उन्होनें अपनी क़ौम से कहा कि (अफसोस) तुम ऐसी बदकारी (अग़लाम) करते हो कि तुमसे पहले सारी ख़ुदाई में किसी ने ऐसी बदकारी नहीं की थी
81إِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِّن دُونِ النِّسَاءِ ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ
हाँ तुम औरतों को छोड़कर शहवत परस्ती के वास्ते मर्दों की तरफ माएल होते हो (हालाकि उसकी ज़रूरत नहीं) मगर तुम लोग कुछ हो ही बेहूदा
82وَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا أَخْرِجُوهُم مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ
सिर्फ करनें वालों (को नुत्फे को ज़ाए करते हो उस पर उसकी क़ौम का उसके सिवा और कुछ जवाब नहीं था कि वह आपस में कहने लगे कि उन लोगों को अपनी बस्ती से निकाल बाहर करो क्योंकि ये तो वह लोग हैं जो पाक साफ बनना चाहते हैं)
83فَأَنجَيْنَاهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
तब हमने उनको और उनके घर वालों को नजात दी मगर सिर्फ (एक) उनकी बीबी को कि वह (अपनी बदआमाली से) पीछे रह जाने वालों में थी
84وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ
और हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेह बरसाया-पस ज़रा ग़ौर तो करो कि गुनाहगारों का अन्जाम आखिर क्या हुआ
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
82आयत

अनुवाद — अल-आराफ 82

सूरा अल-आराफ आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सिर्फ करनें वालों (को नुत्फे को ज़ाए करते हो उस…

सूरा आयत 82/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए