अल-मआरिज · 31/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ ۝٣١
Famanib taghaa waraaa`a zaalika fa ulaaa`ika humul `aadoon
📖 हिंदी अर्थ
तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ابْتَغَىٰ: चाहा, तलब किया
  • وَرَاءَ ذَٰلِكَ: उसके अलावा, उसके सिवा
  • الْعَادُونَ: हद से बढ़ने वाले, सीमा का उल्लंघन करने वाले

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में स्पष्ट कर दिया है कि जो व्यक्ति अपनी वैध यौन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पत्नी और दासी (जो उसके स्वामित्व में हों) के अलावा किसी और रास्ते की तलाश करेगा, तो ऐसे लोग ही वास्तव में हद से बढ़ने वाले और अल्लाह की निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं। यह आयत पिछली आयतों में वर्णित उन लोगों के विपरीत है जो अपनी शारीरिक इच्छाओं को केवल वैध तरीकों से पूरा करते हैं—अर्थात् पत्नी या अपने अधिकार में मौजूद दासी के साथ—और इसी में वे संतुष्ट रहते हैं।

यहाँ अल्लाह तआला ने स्पष्ट कर दिया कि इस्लाम ने मानवीय स्वभाव और उसकी फ़ितरत को नकारा नहीं है, बल्कि उसे पाक और वैध रास्ते दिखाए हैं। जो कोई इन वैध रास्तों को छोड़कर अवैध संबंधों, व्यभिचार, समलैंगिकता या अन्य निषिद्ध कार्यों की ओर जाता है, वह अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करता है और अपने आप को अल्लाह की यात्रा और क्रोध का पात्र बनाता है।

इस आयत में एक बड़ी शिक्षा यह भी है कि इस्लामी समाज में पवित्रता, शालीनता और पारिवारिक बंधनों की अत्यधिक अहमियत है। अल्लाह ने विवाह को एक पवित्र बंधन बनाया है और उसी के भीतर इंसान की इच्छाओं की पूर्ति को हलाल किया है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया में सुकून और आख़िरत में सफलता दिलाता है।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह की हर सीमा इंसान की भलाई के लिए है। जब हम इन सीमाओं का पालन करते हैं, तो हम न केवल अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत के हक़दार बनते हैं, बल्कि दुनिया में भी हमारा जीवन सुखी, शांतिपूर्ण और सम्मानजनक होता है। अल्लाह तआला ने जो हलाल किया है वह पाक और अच्छा है, और जो हराम किया है वह गंदा और नुकसानदेह है।

आइए हम सब अल्लाह की इन सीमाओं का सम्मान करें, अपनी इच्छाओं को वैध तरीकों से पूरा करें, और उस दिव्य मार्गदर्शन पर चलें जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी की ओर ले जाता है। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी सीमाओं के भीतर रहते हैं।



📜 आयत 29-33 — अल-मआरिज

29وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
30إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी
31فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
32وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ
और जो लोग अपनी अमानतों और अहदों का लेहाज़ रखते हैं
33وَالَّذِينَ هُم بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ
और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीRevelation
31आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 31

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Tuesday, August 18, 2026

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