अल-मआरिज · 33/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
وَالَّذِينَ هُم بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ ۝٣٣
Wallazeena hum bishahaadaatihim qaaa`imoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِشَهَادَاتِهِمْ – अपनी गवाहियों (शहादतों) के बारे में
  • قَائِمُونَ – क़ायम रहने वाले, अर्थात पूरी तरह निभाने वाले

तफ़सीर:

यह आयत उन मोमिनिन की विशेषताओं का वर्णन कर रही है जो अल्लाह के यहाँ सम्मानित हैं। ऐसे लोग जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहते हैं, अर्थात जब भी उन्हें गवाही देनी होती है, तो वे उसे पूरी सच्चाई और ईमानदारी के साथ अदा करते हैं। वे न तो किसी के पक्ष में झूठ बोलते हैं, न ही किसी के विरुद्ध सच को छिपाते हैं। निकटता, रिश्तेदारी, दोस्ती या दुश्मनी — कोई भी चीज़ उन्हें सच बोलने से नहीं रोकती। वे अल्लाह के डर के कारण गवाही में किसी प्रकार का परिवर्तन या हेर-फेर नहीं करते, और न ही सच्ची गवाही को छिपाते हैं।

यह एक बहुत बड़ी नैतिक ज़िम्मेदारी है। इस्लाम ने गवाही को इतना महत्व दिया है कि उसे अल्लाह का अमानत समझा गया है। जब कोई व्यक्ति गवाही देता है, तो वह अल्लाह की ओर से दी गई ज़िम्मेदारी को निभा रहा होता है। जो लोग इस ज़िम्मेदारी को निभाते हैं, वे समाज में न्याय और सच्चाई की नींव मज़बूत करते हैं। उनकी वजह से किसी मज़लूम (अत्याचारित) का हक़ नहीं दबता, और कोई ज़ालिम अपने ज़ुल्म से बच नहीं पाता।

प्यारे भाइयो और बहनो! याद रखें कि गवाही में सच बोलना अल्लाह की इबादत है। अगर हम किसी मामले में गवाह बनें, तो हमें पूरी सच्चाई बोलनी चाहिए, चाहे वह हमारे अपने ख़िलाफ़ ही क्यों न हो। अल्लाह ने क़ुरआन में इसी बात का आदेश दिया है कि गवाही अल्लाह के लिए हो, न कि किसी इंसान के लिए। जो लोग इस आदेश पर अमल करते हैं, उनके लिए अल्लाह ने जन्नत की शानदार नेमतें तैयार की हैं, जहाँ उन्हें हर प्रकार का सम्मान और आदर मिलेगा।

आइए! हम अपने जीवन में इस गुण को अपनाएँ। सच बोलने की आदत डालें, गवाही में सच्चाई पर क़ायम रहें, और याद रखें कि यह दुनिया फ़ानी है, असली कामयाबी आख़िरत में है। जो लोग इस दुनिया में सच्चाई पर क़ायम रहेंगे, अल्लाह उन्हें क़यामत के दिन सच्चाई का इनाम देगा — जन्नत के बाग़, जहाँ कोई दुख नहीं, कोई चिंता नहीं, केवल सुख और शांति है।



📜 आयत 31-35 — अल-मआरिज

31فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
32وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ
और जो लोग अपनी अमानतों और अहदों का लेहाज़ रखते हैं
33وَالَّذِينَ هُم بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ
और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं
34وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
और जो लोग अपनी नमाज़ो का ख्याल रखते हैं
35أُولَٰئِكَ فِي جَنَّاتٍ مُّكْرَمُونَ
यही लोग बेहिश्त के बाग़ों में इज्ज़त से रहेंगे
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अनुवाद — अल-मआरिज 33

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सूरा आयत 33/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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