नूह · 21/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
قَالَ نُوحٌ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِي وَاتَّبَعُوا مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُ وَوَلَدُهُ إِلَّا خَسَارًا ۝٢١
Qaala Noohur Robbi innahum `asawnee wattaba`oo mal lam yazid hu maaluhoo wa waladuhooo illaa khasaara
📖 हिंदी अर्थ
(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَصَوْنِي (असौनी): उन्होंने मेरी अवज्ञा की, मेरी बात नहीं मानी।
  • اتَّبَعُوا (इत्तबउ): उन्होंने अनुसरण किया, पीछे चल पड़े।
  • خَسَارًا (ख़सारन): घाटे में पड़ना, पथभ्रष्टता और विनाश।

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने जब अपनी क़ौम के हठ और इनकार से मायूस होकर देखा कि वे किसी भी तरह ईमान लाने को तैयार नहीं हैं, तो उन्होंने अपने रब की दरगाह में यह दर्द भरी फ़रियाद की। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे पालनहार! मेरी क़ौम ने मेरी बात नहीं मानी, उन्होंने मेरे आह्वान को ठुकरा दिया और मेरी नसीहत को कानों पर नहीं रखा।"

फिर उन्होंने यह भी बताया कि इस इनकार की असली वजह क्या थी — उनके कमज़ोर और ग़रीब लोगों ने अपने उन रईसों और सरदारों का अनुसरण किया, जिन्हें अल्लाह ने धन-दौलत और औलाद की बड़ी नेमतें दी थीं। लेकिन अफ़सोस! इन नेमतों ने उन्हें अल्लाह के करीब नहीं किया, बल्कि उनकी सरकशी और गुमराही में ही इज़ाफ़ा किया। उनका माल और उनकी औलाद उनके लिए रहमत का ज़रिया नहीं बनी, बल्कि उनके घमंड, अकड़ और अल्लाह से दूरी का सबब बन गई। उन्होंने सोचा कि हमारे पास ये सब कुछ है, तो हमें किसी की ज़रूरत नहीं — और यही उनकी ख़सारा (घाटे) का सबब बना।

यह एक बहुत बड़ा सबक़ है हमारे लिए! अल्लाह की दी हुई नेमतें अगर शुक्र के साथ न मिलें, तो वही नेमतें इंसान के लिए बर्बादी का ज़रिया बन जाती हैं। माल और औलाद अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान हैं — अगर इन्होंने इंसान को अल्लाह से ग़ाफ़िल कर दिया, तो ये उसके लिए नुक़्सान ही हैं।

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की यह फ़रियाद हमें सिखाती है कि जब इंसान अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर ले और फिर भी लोग हिदायत न पाएँ, तो उसे अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए और अपनी मजबूरी उसी के सामने बयान करनी चाहिए। यही एक नबी का तरीक़ा है — वह अल्लाह पर भरोसा करता है और उसी से मदद माँगता है।

और हमारे लिए इसमें एक और नसीहत है: हमें कभी भी दुनिया की चमक-दमक और माल-औलाद पर घमंड नहीं करना चाहिए। ये सब चीज़ें फ़ानी हैं, और अल्लाह की राह में इन्हें ख़र्च करना ही इनकी असली क़द्र है। जो इन नेमतों को अल्लाह की नाफ़रमानी में इस्तेमाल करता है, वह असल में अपना ही नुक़्सान करता है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

आइए हम इस आयत से सीख लें कि हम अपने माल और औलाद को अपने लिए रहमत बनाएँ, न कि जहन्नुम का ज़रिया। अल्लाह हमें समझ दे, आमीन।



📜 आयत 19-23 — नूह

19وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ بِسَاطًا
और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया
20لِّتَسْلُكُوا مِنْهَا سُبُلًا فِجَاجًا
ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो
21قَالَ نُوحٌ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِي وَاتَّبَعُوا مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُ وَوَلَدُهُ إِلَّا خَسَارًا
(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया
22وَمَكَرُوا مَكْرًا كُبَّارًا
और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की
23وَقَالُوا لَا تَذَرُنَّ آلِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلَا سُوَاعًا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًا
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
नूहकुरान सूची
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अनुवाद — नूह 21

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Tuesday, August 18, 2026

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