अल-मुद्दस्सिर · 16/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا ۝١٦
Kallaaa innahoo kaana li Aayaatinaa `aneedaa
📖 हिंदी अर्थ
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَلَّا: हरगिज़ नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता (रोकने और झिड़कने के लिए)।
  • عَنِيدًا: हठी, जिद्दी, सरकश, जो सच्चाई के आगे झुकता नहीं और जानबूझकर विरोध करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति के बारे में है जिसे अल्लाह ने खूब धन-दौलत और औलाद दी थी, लेकिन उसने अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने के बजाय उसके दीन और उसकी आयतों का विरोध किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" यानी जैसा वह सोचता है, ऐसा कभी नहीं होगा। उसे यह ख़्याल है कि उसकी दौलत और औलाद की बदौलत उसे कोई नुक़सान नहीं पहुँच सकता, और वह अल्लाह के रसूल (ﷺ) और उनके लाए हुए दीन का मुक़ाबला करने की जुर्रत कर रहा है।

अल्लाह फ़रमाता है कि यह शख़्स हमारी आयतों (क़ुरआन और नबी के मो'जिज़ात) के सामने हठधर्मी और जिद्द पर उतर आया है। वह सच्चाई को जानते हुए भी उसे नकारता है और उसका मज़ाक उड़ाता है। उसकी यह सरकशी और अकड़ उसे किसी काम न आएगी। अल्लाह ने उसे जो माल और औलाद दी है, वह उसके लिए रहमत नहीं, बल्कि आज़माइश है। और जब वह इन नेमतों का गलत इस्तेमाल करता है, तो यही चीज़ें उसके लिए अज़ाब का ज़रिया बन जाएँगी।

यह आयत हर उस इंसान के लिए बड़ी नसीहत है जो अल्लाह की नेमतों को देखकर घमंड में आ जाता है और सच्चाई को कुचलने की कोशिश करता है। अल्लाह तआला किसी की दौलत, ताक़त या औलाद से नहीं डरता। वह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़लील कर देता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें क़ुरआन और अल्लाह के दीन के सामने अपनी जिद और हठधर्मी नहीं छोड़नी चाहिए। जो इंसान सच्चाई को पहचान ले और फिर भी उसका विरोध करे, वह अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकता। अल्लाह तआला ने उस शख्स के लिए सख्त अज़ाब का वादा किया है जो उसकी आयतों से मुँह मोड़ता है और उन्हें झुठलाता है।

हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें, उसकी आयतों पर ईमान लाएँ और उनके आगे सर झुकाएँ। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह तआला हमें हठधर्मी और सरकशी से बचाए और सच्चाई को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

14وَمَهَّدتُّ لَهُ تَمْهِيدًا
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी
15ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ
फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ
16كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
17سَأُرْهِقُهُ صَعُودًا
तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा
18إِنَّهُ فَكَّرَ وَقَدَّرَ
उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 16

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन…

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Friday, October 2, 2026

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