अल-क़ियामा · 15/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ ۝١٥
Wa law alqaa ma`aazeerah
📖 हिंदी अर्थ
अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَعَاذِيرَهُ: अपने बहाने, अपनी सफ़ाई में पेश किए जाने वाले तर्क और दलीलें।

तफ़सीर:

इंसान अपने आप पर ख़ुद गवाह है। उसके हाथ-पैर, आँखें, कान और ज़मीन के टुकड़े भी उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे। अल्लाह तआला ने इंसान को इतनी समझ और अक्ल दी है कि वह जानता है कि उसने क्या अच्छा किया और क्या बुरा। यहाँ तक कि अगर वह क़ियामत के दिन अपने गुनाहों को छुपाने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाए, अपनी सफ़ाई में दलीलें पेश करे, और कहे कि "मैंने कोई गुनाह नहीं किया" या "मुझे मालूम ही नहीं था", तो भी ये बहाने उसे किसी काम न आएँगे।

अल्लाह तआला ने इंसान की अपनी ज़बान, उसके अंगों और उसके ज़मीर को उसके ख़िलाफ़ गवाह बना दिया है। उसकी आँखें बताएँगी कि उसने क्या देखा, उसके कान बताएँगे कि उसने क्या सुना, और उसके हाथ-पैर बताएँगे कि उनसे क्या काम लिए गए। इसलिए बहाने बनाना और झूठी दलीलें देना बिल्कुल बेकार है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने आप से ईमानदार होना चाहिए। हम अपने गुनाहों को छुपा सकते हैं दुनिया में, लेकिन अल्लाह से कुछ छुपा नहीं है। हमें चाहिए कि दुनिया में ही अपने आपको सुधार लें, तौबा कर लें, और अल्लाह से माफ़ी माँग लें। क़ियामत के दिन कोई बहाना काम नहीं आएगा, लेकिन आज दरवाज़ा खुला है — तौबा का दरवाज़ा। अल्लाह रहीम और ग़फ़ूर है, वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है कि हम इस दुनिया में ही अपने रब की तरफ़ लौट आएँ और उसकी रहमत के तले पनाह लें।



📜 आयत 13-17 — सूरा अल-क़ियामा

13يُنَبَّأُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ
उस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा
14بَلِ الْإِنسَانُ عَلَىٰ نَفْسِهِ بَصِيرَةٌ
बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है
15وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ
अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे
16لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ
(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो
17إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ
उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है
अल-क़ियामाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 15

सूरा अल-क़ियामा आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा…

सूरा आयत 15/40 — सूरा अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़ियामा सुनें, सूरा अल-क़ियामा अनुवाद, सूरा अल-क़ियामा mp3, सूरा अल-क़ियामा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए