अल-क़ियामा · 14/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
بَلِ الْإِنسَانُ عَلَىٰ نَفْسِهِ بَصِيرَةٌ ۝١٤
Balil insaanu `alaa nafsihee baseerah
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَصِيرَةٌ: गवाह, देखने वाली, साक्षी। यहाँ इसका अर्थ है कि इंसान के अंग और उसके जिस्म के हिस्से उसके खिलाफ गवाही देने वाले हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इंसान ख़ुद अपने ऊपर गवाह है। यानी क़यामत के दिन इंसान चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, अपने गुनाहों को छुपाने या बहाने बनाने की, लेकिन उसके अपने ही अंग — उसकी आँखें, कान, हाथ, पैर और ज़बान — उसके खिलाफ गवाही देंगे। वह खुद अपने लिए सबसे बड़ा सबूत है।

यह आयत इंसान को यह सिखाती है कि अल्लाह को तो सब कुछ मालूम है ही, लेकिन इंसान का अपना जिस्म भी उसके आमाल का गवाह बनेगा। जो लोग दुनिया में यह सोचते हैं कि उनके कर्म छुपे रहेंगे, वे भूल जाते हैं कि अल्लाह ने उनके अंगों को गवाह बना रखा है।

यह आयत हमें बताती है कि इंसान के पास कोई बहाना नहीं चलेगा। वह चाहे कितनी भी माफ़ी माँगे या कोई भी सफ़ाई पेश करे, लेकिन उसके अपने अंग उसके खिलाफ सच बोलेंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने आमाल की जाँच खुद करें, अपने नफ्स को मुहासिब बनाएँ, और इससे पहले कि क़यामत के दिन हमारे अंग हमारे खिलाफ गवाही दें, हम खुद अपने गुनाहों से तौबा कर लें।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में सच्चाई और नेकी को अपनाएँ, क्योंकि हमारा अपना जिस्म हमारे खिलाफ गवाह बन सकता है। अल्लाह तआला ने हमें यह आज़ादी दी है कि हम अपने आमाल खुद चुनें, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि हर चीज़ का हिसाब होगा।

यही वह प्यारा पैग़ाम है जो हमें अपने रब की तरफ लौटाता है — कि हम अपने दिल को साफ रखें, अपनी ज़ुबान को सच्ची रखें, और अपने आमाल को नेक बनाएँ, ताकि क़यामत के दिन हमारे अंग हमारे लिए गवाही दें, हमारे खिलाफ नहीं।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अल-क़ियामा

12إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمُسْتَقَرُّ
उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है
13يُنَبَّأُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ
उस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा
14بَلِ الْإِنسَانُ عَلَىٰ نَفْسِهِ بَصِيرَةٌ
बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है
15وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ
अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे
16لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ
(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो
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अनुवाद — अल-क़ियामा 14

सूरा अल-क़ियामा आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है

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Tuesday, August 18, 2026

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