अल-क़ियामा · 21/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
وَتَذَرُونَ الْآخِرَةَ ۝٢١
Wa tazaroonal Aakhirah
📖 हिंदी अर्थ
और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَتَذَرُونَ: तुम छोड़ देते हो, पीछे डाल देते हो।
  • الْآخِرَةَ: आख़िरत, परलोक, यानी मृत्यु के बाद का जीवन, जिसमें हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम शामिल हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की मज़म्मत (निंदा) कर रहे हैं जो दुनिया को आख़िरत पर तरजीह देते हैं। यानी जब उनके सामने दुनिया और आख़िरत का चुनाव आता है, तो वे दुनिया को चुनते हैं और आख़िरत को छोड़ देते हैं। वे दुनिया की चमक-दमक, माल-दौलत, शोहरत और ऐश-ओ-आराम में इस कदर डूब जाते हैं कि आख़िरत के लिए कोई अमल नहीं करते। वे नमाज़ नहीं पढ़ते, रोज़ा नहीं रखते, ज़कात नहीं देते, और न ही अल्लाह के हुक्मों की परवाह करते हैं। उनका पूरा ध्यान सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों और लज़्ज़तों पर होता है, और वे भूल जाते हैं कि एक दिन उन्हें मरना है और अपने किए का हिसाब देना है।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है जो आख़िरत को भूलकर सिर्फ़ दुनिया के पीछे भागते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि यह बड़ी नादानी है कि इंसान उस चीज़ को छोड़ दे जो हमेशा रहने वाली है (आख़िरत) और उस चीज़ को पकड़ ले जो फ़ानी (नाशवान) है (दुनिया)।

दावती पहलू (नसीहत):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस चीज़ को अहमियत दे रहे हैं। क्या हम उस दुनिया के पीछे भाग रहे हैं जो एक दिन ख़त्म हो जाएगी, या हम उस आख़िरत की तैयारी कर रहे हैं जो हमेशा रहेगी? अल्लाह तआला ने हमें दोनों दुनिया की भलाई सिखाई है, लेकिन आख़िरत को प्राथमिकता देना ही असली कामयाबी है। जो इंसान आख़िरत के लिए अमल करता है, अल्लाह उसे दुनिया में भी बरकत देता है और आख़िरत में जन्नत अता करता है। याद रखिए, दुनिया एक खेल और मज़ाक है, और आख़िरत ही असली ज़िंदगी है। अगर हम आज आख़िरत के लिए काम करेंगे, तो कल क़यामत के दिन हमें शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। अल्लाह हमें दुनिया की मोहब्बत से बचाए और आख़िरत की तैयारी की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 19-23 — सूरा अल-क़ियामा

19ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ
फिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)
20كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ
मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो
21وَتَذَرُونَ الْآخِرَةَ
और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो
22وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاضِرَةٌ
उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे
23إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌ
(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे
अल-क़ियामाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 21

सूरा अल-क़ियामा आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो

सूरा आयत 21/40 — सूरा अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़ियामा सुनें, सूरा अल-क़ियामा अनुवाद, सूरा अल-क़ियामा mp3, सूरा अल-क़ियामा pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए