अल-क़ियामा · 20/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ ۝٢٠
Kallaa bal tuhibboonal `aajilah
📖 हिंदी अर्थ
मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَلَّا: हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है जैसा तुम कहते हो।
  • بَلْ: बल्कि, अपितु।
  • تُحِبُّونَ: तुम प्रेम करते हो।
  • الْعَاجِلَةَ: जल्दी मिलने वाली (यानी दुनिया)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मुशरिकों! हरगिज़ ऐसा नहीं है जैसा तुमने गुमान कर रखा है कि मरने के बाद दोबारा जीवित होना और क़ियामत का आना असंभव है। यह तुम्हारी नादानी और जहालत है। असल में तुम्हारे इस इनकार की जड़ तुम्हारा दुनिया से अत्यधिक प्रेम है। तुमने अपने दिलों में दुनिया की मुहब्बत को इस कदर बैठा लिया है कि उसकी खातिर आख़िरत को भुला दिया। तुम जानते हो कि जिस शक्तिशाली ईश्वर ने तुम्हें पहली बार पैदा किया, वह तुम्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है, लेकिन तुम्हारी दुनिया की चाहत और उसके सुख-साधनों की लालसा ने तुम्हारी आँखों पर पर्दा डाल दिया है।

यह दुनिया जो तुम्हें इतनी प्यारी है, वह तो बहुत जल्दी ख़त्म होने वाली और फ़ानी है। इसकी ख़ुशियाँ कुछ दिनों की हैं, लेकिन तुमने इसी को सब कुछ समझ लिया और उस आख़िरत को भुला दिया जो हमेशा रहने वाली है। तुम्हारी यही दुनिया-दोस्ती तुम्हें सच्चाई से दूर रख रही है और तुम्हें रसूल की लाई हुई शिक्षाओं को झुठलाने पर मजबूर कर रही है।

ऐ इंसान! ज़रा सोच — यह दुनिया जिसके पीछे तुम इतने भाग रहे हो, क्या यह उस हमेशा रहने वाली ज़िंदगी के मुक़ाबले में कुछ भी है? यह तो बस एक छोटा सा सफ़र है, जबकि आख़िरत ही असली घर है। अगर तुम दुनिया की इस चंद रोज़ा ज़िंदगी को आख़िरत की हमेशा वाली ज़िंदगी पर तरजीह दोगे, तो यह तुम्हारी सबसे बड़ी नुक़सान की सौदा होगी। अल्लाह तआला ने तुम्हें अक़्ल दी है, उसे इस्तेमाल करो। दुनिया की मुहब्बत को अपने दिल से निकालो और उस रब की तरफ़ रुजू करो जिसने तुम्हें पैदा किया। उसकी इबादत करो और उस दिन की तैयारी करो जब कोई माल और औलाद काम न आएगा, बल्कि सिर्फ़ साफ़ दिल वाला इंसान ही कामयाब होगा। यही तुम्हारी भलाई है और यही तुम्हारी सच्ची कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — अल-क़ियामा

18فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ
तो जब हम उसको (जिबरील की ज़बानी) पढ़ें तो तुम भी (पूरा) सुनने के बाद इसी तरह पढ़ा करो
19ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ
फिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)
20كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ
मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो
21وَتَذَرُونَ الْآخِرَةَ
और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो
22وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاضِرَةٌ
उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे
अल-क़ियामाकुरान सूची
40आयत
मक्कीRevelation
20आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 20

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Tuesday, August 18, 2026

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