अन-नबा · 20/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नबा
وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا ۝٢٠
Wa suyyi raatil jibaalu fa kaanat saraaba
📖 हिंदी अर्थ
तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से) चलाए जाएँगे तो रेत होकर रह जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सुय्यिरतिल जिबालु: पहाड़ों को चलाया जाएगा, यानी उन्हें उनकी जगह से उखाड़ कर हटा दिया जाएगा।
  • सराब: रेगिस्तान की वह चमकती हुई रेत जो दूर से पानी की तरह दिखाई देती है, लेकिन वास्तव में वह कुछ नहीं होती। यानी एक ऐसा दृश्य जो देखने में तो कुछ लगे, पर हो कुछ नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस दिन क़यामत आएगी, उस दिन ये ऊँचे-ऊँचे पहाड़, जो आज अपनी जगह पर अटल और मज़बूत खड़े हैं, उन्हें उनकी जगह से उखाड़ दिया जाएगा। अल्लाह तआला के हुक्म से वे चलने लगेंगे और फिर ऐसे बिखर जाएँगे कि वे धूल के समान उड़ते हुए कण बन जाएँगे। फिर उनका वह दृश्य ऐसा होगा जैसे रेगिस्तान में चमकती हुई सराब (मृगतृष्णा) हो — जो दूर से देखने में पानी लगती है, लेकिन पास जाने पर कुछ नहीं होती। यानी पहाड़ों की सख्त चट्टानें भी उस दिन ऐसी बेहिस और बेजान हो जाएँगी कि उनका कोई निशान नहीं बचेगा।

यह दृश्य अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है। जिस अल्लाह ने इन पहाड़ों को पैदा किया और उन्हें ज़मीन पर जमा कर रखा, वही अल्लाह उन्हें उस दिन ऐसे उड़ा देगा जैसे वे कभी थे ही नहीं। यह उस दिन की हैबत (दहशत) को बयान करता है कि जब अल्लाह का हुक्म होगा, तो सबसे मज़बूत चीज़ भी बेबस हो जाएगी।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि यह दुनिया की ज़िंदगी और इसकी चमक-दमक भी उसी सराब की तरह है — देखने में खूबसूरत और भरोसेमंद लगती है, लेकिन आख़िरकार यह फ़ना होने वाली है। इसलिए हमें अपनी आख़िरत की तैयारी करनी चाहिए और अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए। जो लोग अल्लाह के हुक्म को मानेंगे और उसकी राह पर चलेंगे, उनके लिए उस दिन राहत और खुशी होगी, और जो ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं होगा। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 18-22 — सूरा अन-नबा

18يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे
19وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا
और आसमान खोल दिए जाएँगे
20وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से) चलाए जाएँगे तो रेत होकर रह जाएँगे
21إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا
बेशक जहन्नुम घात में है
22لِّلطَّاغِينَ مَآبًا
सरकशों का (वही) ठिकाना है
अन-नबाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अन-नबा 20

सूरा अन-नबा आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से)…

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Saturday, October 3, 2026

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