Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مِنْ أَيِّ شَيْءٍ: किस चीज़ से
- خَلَقَهُ: उसको पैदा किया
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में इंसान को उसकी हैसियत याद दिला रहा है। जब इंसान अपने रब के सामने अकड़ता है और उसकी नेमतों से मुँह मोड़ता है, तो अल्लाह उससे पूछता है कि आख़िर उसे किस चीज़ से पैदा किया गया है? यह सवाल उसकी तरफ़ ध्यान दिलाने के लिए है, ताकि वह अपनी असल हक़ीक़त को समझे।
इंसान की पैदाइश की शुरुआत एक बहुत ही कमज़ोर और हक़ीर चीज़ से हुई — नुत्फ़ा (वीर्य) की एक बूंद से। यह बूंद अपने आप में कोई अहमियत नहीं रखती, लेकिन अल्लाह की कुदरत ने उसे इंसान की शक्ल दी, उसे अंग-प्रत्यंग दिए, उसे ज़िंदगी दी, और उसे तमाम नेमतों से नवाज़ा।
फिर अल्लाह ने उसे मरने के बाद क़ब्र में दफ़न किया जाने वाला बनाया, और जब वह चाहेगा, उसे दोबारा ज़िंदा करके उठा खड़ा करेगा। यह सब कुछ उसी अल्लाह की कुदरत से हुआ, जिसने उसे पहली बार पैदा किया।
तो क्या ऐसे इंसान को अपने रब के सामने अकड़ना और उसकी नाफ़रमानी करना शोभा देता है? जिसकी पैदाइश इतनी कमज़ोर चीज़ से हुई, उसे अपने ख़ालिक़ के सामने झुकना चाहिए, उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए।
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी हैसियत कभी नहीं भूलनी चाहिए। जब हम याद रखेंगे कि हम किस चीज़ से पैदा हुए हैं, तो हमारे दिल में अल्लाह के लिए अदब, मुहब्बत और शुक्र का जज़्बा पैदा होगा। हमें अपने रब की रहमत और उसकी बेपनाह मेहरबानी पर ग़ौर करना चाहिए, जिसने हमें यह सब कुछ अता किया।
अल्लाह तआला ने इंसान को सिर्फ पैदा करके नहीं छोड़ दिया, बल्कि उसे राह भी दिखाई — भलाई की राह और बुराई की राह। फिर उसे मौत दी और क़ब्र में दफ़न किया, और जब वह चाहेगा, उसे दोबारा ज़िंदा करके उसके आमाल का हिसाब लेगा। यही ईमान का असल मक़सद है — कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हम उसके सामने पेश होंगे।
तो आओ, हम अपनी कमज़ोर पैदाइश को याद रखें, अपने रब के सामने झुकें, और उसकी रहमत और मग़फिरत के तलबगार बनें। यही हमारी कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 16-20 — सूरा अबस
अनुवाद — अबस 18
सूरा अबस आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा कियासूरा आयत 18/42 — सूरा अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अबस सुनें, सूरा अबस अनुवाद, सूरा अबस mp3, सूरा अबस pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अबस
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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