अबस · 17/42
अनुवाद उच्चारण — अबस
قُتِلَ الْإِنسَانُ مَا أَكْفَرَهُ ۝١٧
Qutilal-insanu maa akfarah
📖 हिंदी अर्थ
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • قُتِلَ (क़ुतिला): यहाँ इसका अर्थ है 'अभिशप्त हो', 'धिक्कार हो' या 'लानत हो'। यह एक दुआ (प्रार्थना) के रूप में है, न कि वास्तविक हत्या के अर्थ में।
  • الْإِنسَانُ (अल-इंसानु): यहाँ से आशय काफ़िर (इन्कार करने वाला) इंसान है।
  • مَا أَكْفَرَهُ (मा अक़्फ़रहु): यह तअज्जुब (आश्चर्य) के लिए है, अर्थात 'कितना बड़ा कुफ्र है उसका!' या 'कितना अधिक इन्कार करने वाला है वह!'

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उस इंसान पर लानत भेजी है जो अपने रब की नेमतों से इन्कार करता है। अल्लाह ने उसे पैदा किया, उसे तरह-तरह की नेमतें दीं, फिर भी वह शुक्र करने के बजाय कुफ्र करता है। यह अत्यंत आश्चर्य की बात है कि इंसान अपने उस रब का इन्कार करे जिसने उसे नहीं होते हुए पैदा किया।

अल्लाह तआला ने इंसान को एक तुच्छ बूँद (नुत्फ़ा) से पैदा किया, फिर उसे क्रमशः अलग-अलग अवस्थाओं से गुज़ारा। उसने उसे सुनने, देखने, समझने की शक्तियाँ दीं, और उसे अच्छे और बुरे का रास्ता भी दिखाया। इसके बाद भी इंसान अपने रब का शुक्र अदा नहीं करता, बल्कि उसकी नेमतों से मुँह मोड़ लेता है।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने रब के कितने एहसानों के नीचे दबे हुए हैं। हर साँस, हर धड़कन, हर नेमत उसी की देन है। फिर भी हम उसकी इबादत में कितनी कमी रखते हैं। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि कहीं हम भी उन लोगों में न हों जिन पर अल्लाह की लानत है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने रब का शुक्रगुज़ार बनना चाहिए, उसकी नेमतों को पहचानना चाहिए, और उसके हुक्मों पर अमल करना चाहिए। जो इंसान अपने रब से मुँह मोड़ता है, वह अपना ही नुक़सान करता है। अल्लाह तआला अपने बन्दों से बेनियाज़ है, लेकिन बन्दा उसकी रहमत और मेहरबानी का मोहताज है।

आओ हम सब अपने रब के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी इबादत में अपनी ज़िन्दगी गुज़ारें, और उस दिन से डरें जब हमें अपने आमाल का हिसाब देना होगा। अल्लाह तआला हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 15-19 — अबस

15بِأَيْدِي سَفَرَةٍ
(ऐसे) लिखने वालों के हाथों में है
16كِرَامٍ بَرَرَةٍ
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं
17قُتِلَ الْإِنسَانُ مَا أَكْفَرَهُ
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है
18مِنْ أَيِّ شَيْءٍ خَلَقَهُ
(ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया
19مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُ فَقَدَّرَهُ
नुत्फे से उसे पैदा किया फिर उसका अन्दाज़ा मुक़र्रर किया
अबसकुरान सूची
42आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अबस 17

सूरा अबस आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है

सूरा आयत 17/42 — अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अबस सुनें, अबस अनुवाद, अबस mp3, अबस pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए