Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नुत्फ़ा (नुत्फ़तिन): थोड़ा सा पानी, अर्थात् वीर्य की एक बूंद।
- ख़लक़हू: उसे पैदा किया।
- फ़क़द्दरहू: फिर उसे अच्छी तरह से अन्दाज़ा (नाप-तौल) करके बनाया, यानी उसकी रचना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में इंसान की पैदाइश के शुरुआती मरहले को बयान किया है, ताकि इंसान अपनी हैसियत समझे और अपने रब के सामने झुके। अल्लाह ने इंसान को एक बहुत ही कमज़ोर और छोटी चीज़ से पैदा किया — वीर्य की एक बूंद से, जिसे "नुत्फ़ा" कहा जाता है। यह कोई बड़ी या ताकतवर चीज़ नहीं थी, बल्कि एक मामूली सा पानी था।
फिर अल्लाह ने उसे "फ़क़द्दरहू" — यानी उसे अच्छी तरह से अन्दाज़ा करके बनाया। यानी उसकी रचना को एक नियम और तरतीब के साथ आगे बढ़ाया। वह नुत्फ़ा से अलक़ा (जोंक जैसा खून का टुकड़ा) बना, फिर मुज़्ग़ा (गोश्त का टुकड़ा) बनाया, फिर हड्डियाँ बनाईं, फिर उन्हें गोश्त पहनाया, और फिर उसमें रूह (आत्मा) फूँकी। इस तरह अल्लाह ने उसे अलग-अलग अवस्थाओं (चरणों) से गुज़ारते हुए एक मुकम्मल इंसान बना दिया।
यह बात इंसान को सोचने पर मजबूर करती है कि जिसने उसे इस तरह पैदा किया और उसकी रचना को इस खूबसूरती से तरतीब दी, क्या वह उसे दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता? बेशक कर सकता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपने रब की नेमतों को पहचाने, उसका शुक्र अदा करे और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारे।
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने अंदर ग़रूर और घमंड नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसकी शुरुआत एक बेहद कमज़ोर चीज़ से हुई थी। जब हम अपनी इस कमज़ोर शुरुआत को याद करते हैं, तो हमारे दिल में अल्लाह के लिए अदब, प्यार और उसकी कुदरत के सामने झुकाव पैदा होता है। अल्लाह ने हमें इतनी इज़्ज़त दी, हमें इंसान बनाया, हमें अक्ल दी, हमें सुनने और देखने की ताकत दी — यह सब उसकी रहमत और मेहरबानी से है।
तो आओ, हम अपने रब के इस एहसान को याद रखें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (खुशी) के मुताबिक ढालें। यही हमारी कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 17-21 — सूरा अबस
अनुवाद — अबस 19
सूरा अबस आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : नुत्फे से उसे पैदा किया फिर उसका अन्दाज़ा मुक़र्रर कियासूरा आयत 19/42 — सूरा अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अबस सुनें, सूरा अबस अनुवाद, सूरा अबस mp3, सूरा अबस pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अबस
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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