अल-इन्फितार · 17/19
अनुवाद उच्चारण — अल-इन्फितार
وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ ۝١٧
Wa maaa adraaka maa Yawmud Deen
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا أَدْرَاكَ — आपको क्या बताए कि... (यानी आप इसकी गहराई और अहमियत का अंदाज़ा नहीं लगा सकते)
  • يَوْمُ الدِّينِ — प्रतिशोध और हिसाब का दिन, जब सभी कर्मों का बदला दिया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में क़यामत के दिन की अज़ीम शान और उसकी हैबत को बयान करते हुए फ़रमाते हैं: "और तुम्हें क्या पता कि जज़ा (बदला) का दिन क्या है?" यह एक ऐसा सवाल है जो उस दिन की अहमियत और उसके हौलनाक (भयानक) होने को बयान करता है। यानी ऐ नबी! आपको उस दिन की पूरी हक़ीक़त का इल्म नहीं, क्योंकि उस दिन की अज़मत (महानता) और सख़्ती का अंदाज़ा इंसानी समझ से बाहर है।

वह दिन ऐसा है जब कोई किसी के काम न आएगा, न कोई रिश्तेदारी काम देगी, न दोस्ती, न सिफ़ारिश। उस दिन सारा इख्तियार सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में होगा। वहाँ कोई बड़ा छोटा नहीं होगा, न कोई अमीर ग़रीब। हर शख्स अपने किए हुए अमल का हिसाब देगा। यह वह दिन है जब अल्लाह तआला अपनी अदालत (न्याय) का पूरा नज़ारा दिखाएगा।

इस आयत में अल्लाह तआला ने उस दिन की अज़मत को इस तरह पेश किया है कि जैसे कोई किसी चीज़ की तारीफ़ करते हुए कहे कि "तुम्हें क्या पता वह क्या है!" — यानी उसकी हैसियत इतनी बड़ी है कि उसे बयान करना मुश्किल है। यह बात हमारे दिलों में ख़ौफ़ (भय) पैदा करती है और हमें अमल की तरफ़ राग़िब (प्रेरित) करती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम उस दिन के लिए क्या तैयारी कर रहे हैं। जिस दिन का अंदाज़ा ख़ुद नबी ﷺ को नहीं दिया गया, उस दिन की हक़ीक़त कितनी भयानक होगी! लेकिन अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें आगाह कर दिया और रास्ता दिखा दिया। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारें कि उस दिन हमारा पल्ला भारी हो। नेक अमल करें, गुनाहों से बचें, और अल्लाह की रहमत के तलबगार रहें। यह दिन हमारे लिए डर और उम्मीद दोनों का ज़रिया है — डर इसलिए कि हम अपने अमल की सज़ा से बचें, और उम्मीद इसलिए कि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं। आओ, हम सब इस दिन की तैयारी करें और अपने रब की इबादत और इताअत में अपनी ज़िंदगी बिताएँ।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-इन्फितार

15يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ
उसी में झोंके जाएँगे
16وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ
और वह लोग उससे छुप न सकेंगे
17وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ
और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है
18ثُمَّ مَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ
फिर तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या चीज़ है
19يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِّنَفْسٍ شَيْئًا ۖ وَالْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ
उस दिन कोई शख़्श किसी शख़्श की भलाई न कर सकेगा और उस दिन हुक्म सिर्फ ख़ुदा ही का होगा
अल-इन्फितारकुरान सूची
19आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अल-इन्फितार 17

सूरा अल-इन्फितार आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है

सूरा आयत 17/19 — अल-इन्फितार الإنفطار (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इन्फितार सुनें, अल-इन्फितार अनुवाद, अल-इन्फितार mp3, अल-इन्फितार pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए