अल-इन्फितार · 16/19
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इन्फितार
وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ ۝١٦
Wa maa hum `anhaa bighaaa `ibeen
📖 हिंदी अर्थ
और वह लोग उससे छुप न सकेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِغَائِبِينَ (ग़ाइबीन): ग़ायब होने वाले, दूर जाने वाले, छूटने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने अल्लाह के हुक़ूक़ (अधिकारों) और उसके बंदों के हुक़ूक़ में कमी की, यानी फ़ाजिर (दुष्कर्मी) लोग, वे क़ियामत के दिन जहन्नम की आग में डाले जाएंगे। उस दिन उन पर जहन्नम की लपटें पड़ेंगी और उन्हें उसके अज़ाब का मज़ा चखाया जाएगा। यह अज़ाब उनसे कभी दूर नहीं होगा, न वे उससे बाहर निकल सकेंगे और न ही उन्हें मौत आएगी ताकि वे इस अज़ाब से छुटकारा पा सकें। बल्कि वे हमेशा के लिए उसी में रहेंगे। यह आयत काफ़िरों और दुष्कर्मियों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह का अज़ाब ऐसा नहीं है जिससे कोई भाग सके या जिसे कोई टाल सके।

इस आयत से यह भी साबित होता है कि काफ़िरों का जहन्नम में हमेशा रहना है। कुछ मुफ़स्सिरीन ने यह भी कहा है कि "उससे" (عَنْهَا) से मुराद क़ियामत का दिन भी हो सकता है, यानी वे उस दिन से ग़ायब नहीं हो सकते, बल्कि उन्हें उस दिन ज़रूर आना है और उसके सामने हाज़िर होना है। यह मानी क़ियामत के दिन के सुबूत (प्रमाण) को और मज़बूत करता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और साथ ही उसकी रहमत की तरफ़ बुलाती है। अगर हम इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक़ूक़ को पूरा करें और लोगों के हुक़ूक़ का ख़याल रखें, तो हम उस अज़ाब से बच सकते हैं जो कभी ख़त्म नहीं होता। अल्लाह ने हमें मोहलत दी है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। आओ हम अपनी ज़िंदगी को सुधारें, नेक कामों में जल्दी करें और उस दिन से पहले तैयारी कर लें जब कोई भागकर नहीं बच सकेगा। याद रखिए, अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं बड़ी है, और वह अपने बंदों की तौबा से बहुत खुश होता है।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-इन्फितार

14وَإِنَّ الْفُجَّارَ لَفِي جَحِيمٍ
और बदकार लोग यक़ीनन जहन्नुम में जज़ा के दिन
15يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ
उसी में झोंके जाएँगे
16وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ
और वह लोग उससे छुप न सकेंगे
17وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ
और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है
18ثُمَّ مَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ
फिर तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या चीज़ है
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अनुवाद — अल-इन्फितार 16

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Thursday, October 1, 2026

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