अल-मुतफ्फिफीन · 13/36
अनुवाद उच्चारण — अल-मुतफ्फिफीन
إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ آيَاتُنَا قَالَ أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ ۝١٣
Izaa tutlaa`alaihi aayaatunaa qaala asaateerul awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो कहता है कि ये तो अगलों के अफसाने हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتُنَا: हमारी आयतें, अर्थात अल्लाह की प्रकट की हुई आयतें (क़ुरआन की आयतें)।
  • أَسَاطِيرُ: यह "أُسْطُورَة" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है पुरानी कहानियाँ, किस्से-किस्से, या वे बातें जो पहले के लोगों ने लिखी या गढ़ी हों।

तफ़सीर:

जब उस अत्याचारी और पापी व्यक्ति के सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं—जो सत्य, मार्गदर्शन और रहमत से भरी होती हैं—तो वह उन्हें सुनकर अपने घमंड और हठधर्मी की वजह से कहता है: "ये तो बस पहले के लोगों की कहानियाँ हैं, जो किताबों में लिख दी गई हैं।" वह इन आयतों को अल्लाह का कलाम मानने से इनकार कर देता है और इन्हें महज़ पुरानी रिवायतें करार देता है।

हालाँकि, यह उसकी बड़ी भूल है। ये आयतें अल्लाह की वही हैं जो उसने अपने नबी ﷺ पर उतारी हैं। इनमें कोई झूठ, कोई मिलावट या कोई कमी नहीं है। लेकिन उसका दिल गुनाहों के अंधेरे से ढका हुआ है, इसलिए वह सत्य को देख और समझ नहीं पाता। उसके पापों ने उसके दिल पर जंग लगा दिया है, जिससे सत्य की रोशनी उसके दिल तक नहीं पहुँच पाती।

यह वही लोग हैं जिन्होंने आख़िरत के दिन को झुठलाया। उनका अंजाम बहुत भयानक होगा—वे क़ियामत के दिन अपने रब के दीदार से महरूम रहेंगे, जबकि मोमिनीन अपने रब को देखेंगे और उसकी रहमत से नवाज़े जाएँगे। फिर ये काफ़िर जहन्नम की आग में झोंके जाएँगे, जहाँ उन्हें उस आग की तपिश और अज़ाब का मज़ा चखना होगा। उनसे कहा जाएगा: "यही वह चीज़ है जिसे तुम झुठलाया करते थे।"

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम क़ुरआन को किस नज़र से देखते हैं। क्या हम इसे अल्लाह की किताब मानकर उस पर अमल करते हैं, या इसे सिर्फ़ पढ़कर दरकिनार कर देते हैं? क़ुरआन कोई आम किताब नहीं, बल्कि यह ज़िंदगी का पूरा नक्शा है। जो इसे सच्चे दिल से पढ़ता और समझता है, वह सीधे रास्ते पर चलता है और दुनिया व आख़िरत दोनों में कामयाब होता है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसकी बरकतों से लाभ उठाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 11-15 — अल-मुतफ्फिफीन

11الَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ
जो लोग रोजे ज़ज़ा को झुठलाते हैं
12وَمَا يُكَذِّبُ بِهِ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ
हालॉकि उसको हद से निकल जाने वाले गुनाहगार के सिवा कोई नहीं झुठलाता
13إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ آيَاتُنَا قَالَ أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो कहता है कि ये तो अगलों के अफसाने हैं
14كَلَّا ۖ بَلْ ۜ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
नहीं नहीं बात ये है कि ये लोग जो आमाल (बद) करते हैं उनका उनके दिलों पर जंग बैठ गया है
15كَلَّا إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّمَحْجُوبُونَ
बेशक ये लोग उस दिन अपने परवरदिगार (की रहमत से) रोक दिए जाएँगे
अल-मुतफ्फिफीनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 13

सूरा अल-मुतफ्फिफीन आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो कहता…

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Tuesday, August 18, 2026

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