Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- कल्ला (كَلَّا): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है।
- बल (بَلْ): बल्कि, इसके विपरीत।
- तुकरिमून (تُكْرِمُونَ): तुम सम्मान करते हो, आदर-सत्कार करते हो।
- अल-यतीम (الْيَتِيمَ): अनाथ बच्चा जिसका पिता मर चुका हो और वह अभी बालिग़ न हुआ हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में इंसान की उस ग़लत फ़हमी का खंडन कर रहे हैं जो वह दौलत और ग़रीबी के बारे में रखता है। इंसान अक्सर यह समझता है कि जिसे अल्लाह ने माल-दौलत दी, वह उसका पसंदीदा बंदा है, और जो ग़रीब या मुसीबत में है, वह अल्लाह की नज़र में बेइज़्ज़त है। अल्लाह फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" — यह बिल्कुल ग़लत सोच है। असली इज़्ज़त और रुसवाई का पैमाना माल-दौलत नहीं, बल्कि अल्लाह की इताअत और नाफ़रमानी है।
फिर अल्लाह तआला उनके अमल की तरफ़ इशारा करते हुए फ़रमाता है: "बल्कि तुम लोग अनाथ की इज़्ज़त नहीं करते!" — यानी तुम्हारा अमल तुम्हारे क़ौल से भी बदतर है। तुम अनाथ बच्चों के साथ अच्छा सुलूक नहीं करते, उन्हें अपने माल में से हिस्सा नहीं देते, उनकी परवरिश और देखभाल का हक़ अदा नहीं करते। जबकि अनाथ वह मासूम होता है जिसका सहारा — उसका पिता — चला गया हो, और वह तुम्हारी रहमत और मदद का सबसे ज़्यादा मुहताज होता है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि असली नेकी और इज़्ज़त उस बंदे के लिए है जो अल्लाह के बंदों, ख़ासकर कमज़ोर और बेसहारा लोगों — जैसे अनाथ, मिस्कीन और मुहताज — के साथ अच्छा बर्ताव करे। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "मैं और अनाथ की कफ़ालत (परवरिश) करने वाला जन्नत में इस तरह साथ होंगे" — और आपने दो उंगलियों (शहादत और बीच वाली) का इशारा किया।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि हम अपने आस-पास के अनाथ बच्चों की देखभाल करें, उन्हें प्यार दें, उनकी ज़रूरतें पूरी करें और उनके साथ इंसाफ़ करें। यही अल्लाह की नज़र में सबसे बड़ी इज़्ज़त है। अगर हम यह करेंगे तो अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देगा। याद रखें, जो बंदा अल्लाह के बंदों पर रहम करता है, अल्लाह उस पर रहम फ़रमाता है।
📜 आयत 15-19 — सूरा अल-फज्र
अनुवाद — अल-फज्र 17
सूरा अल-फज्र आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हरगिज़ नहीं बल्कि तुम लोग न यतीम की ख़ातिरदारी करते…सूरा आयत 17/30 — सूरा अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फज्र सुनें, सूरा अल-फज्र अनुवाद, सूरा अल-फज्र mp3, सूरा अल-फज्र pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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