अल-बलद · 4/20
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बलद
لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي كَبَدٍ ۝٤
Laqad khalaqnal insaana fee kabad
📖 हिंदी अर्थ
हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कबद (كَبَد): कठिनाई, मेहनत, तकलीफ और संघर्ष। इसका अर्थ है जीवन की कठिनाइयों और मुसीबतों का सामना करना।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में इंसान की पैदाइश की हकीकत बयान की है कि हमने इंसान को कठिनाई और मेहनत में पैदा किया है। यानी इंसान की ज़िंदगी आराम और चैन की ज़िंदगी नहीं है, बल्कि वह हमेशा मुश्किलों, परेशानियों और संघर्षों से घिरी हुई है। चाहे वह दुनिया की मुसीबतें हों या आख़िरत की सख्तियाँ, इंसान को हर हाल में मेहनत और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यही इंसान की फितरत (प्राकृतिक संरचना) है कि वह इस दुनिया में आराम के लिए नहीं, बल्कि इम्तिहान (परीक्षा) के लिए भेजा गया है।

यह आयत हमें यह सिखाती है कि जीवन में कठिनाइयाँ आना कोई अजीब बात नहीं है, बल्कि यह तो इंसानी ज़िंदगी का हिस्सा है। जब हमें यह यकीन हो जाए कि मुश्किलें हमारे लिए अल्लाह की तरफ से एक इम्तिहान हैं, तो हमें धैर्य और सब्र के साथ उनका सामना करना चाहिए। अल्लाह ने इंसान को यह ताकत दी है कि वह हर मुश्किल का सामना कर सके, बशर्ते वह अल्लाह पर भरोसा रखे और उसकी राह पर चले।

इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि दुनिया की ज़िंदगी में आराम और सुख-चैन की तलाश में इंसान अक्सर भटक जाता है, लेकिन असल कामयाबी उसी इंसान की है जो मुश्किलों में भी अल्लाह की याद रखता है और उसकी राह पर साबित क़दम रहता है। अल्लाह ने इंसान को इसलिए पैदा किया है ताकि वह उसकी इबादत करे और उसके हुक्मों पर अमल करे। जो इंसान इस हकीकत को समझ लेता है, वह हर मुश्किल में सब्र और शुक्र का रास्ता अपनाता है और अल्लाह की रहमत का हक़दार बनता है।

याद रखिए, जो इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसकी मुश्किलें आसान कर देता है और उसे ऐसी ताकत देता है जो उसके काम आती है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-बलद

2وَأَنتَ حِلٌّ بِهَٰذَا الْبَلَدِ
और तुम इसी शहर में तो रहते हो
3وَوَالِدٍ وَمَا وَلَدَ
और (तुम्हारे) बाप (आदम) और उसकी औलाद की क़सम
4لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي كَبَدٍ
हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है
5أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌ
क्या वह ये समझता है कि उस पर कोई काबू न पा सकेगा
6يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا
वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया
अल-बलदकुरान सूची
20आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-बलद 4

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Wednesday, September 30, 2026

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