अज़-ज़लज़ला · 6/8
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़लज़ला
يَوْمَئِذٍ يَصْدُرُ النَّاسُ أَشْتَاتًا لِّيُرَوْا أَعْمَالَهُمْ ۝٦
Yawma iziy yas durun naasu ash tatal liyuraw a`maalahum
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन लोग गिरोह गिरोह (अपनी कब्रों से) निकलेंगे ताकि अपने आमाल को देखे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصْدُرُ: लौटना, पलटना, वापस जाना (यहाँ मतलब है हिसाब के मैदान से लौटना)
  • أَشْتَاتًا: अलग-अलग समूह, बिखरे हुए, विभिन्न दल
  • لِيُرَوْا: ताकि वे देख लें, उन्हें दिखाया जाए

तफ़सीर (व्याख्या):

उस महान दिन में, जब धरती अपने भयानक कंपन से हिल उठेगी और लोग क़ब्रों से उठ खड़े होंगे, वे सब हिसाब के मैदान में एकत्र होंगे। फिर जब हिसाब पूरा हो जाएगा, तो लोग उस मैदान से अलग-अलग समूहों में निकलेंगे—कोई दाएँ ओर जाएगा, कोई बाएँ ओर। मोमिन (ईमानवाले) चेहरों पर नूर और खुशी के साथ जन्नत की ओर बढ़ेंगे, जबकि काफ़िर और गुनहगार चेहरों पर उदासी और डर के साथ जहन्नम की ओर।

यह सब इसलिए होगा ताकि अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का फल दिखा दे—हर छोटा-बड़ा अच्छा या बुरा काम, जो उन्होंने दुनिया में किया था, उनके सामने पेश कर दिया जाएगा। उस दिन कोई भी कर्म छिपा नहीं रहेगा, और हर व्यक्ति अपने किए का पूरा बदला पाएगा।

दावती पहलू (आमंत्रण का दृष्टिकोण):

यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया कोई खेल नहीं है—यह एक परीक्षा की जगह है। जिस दिन का हमसे वादा किया गया है, वह निश्चित रूप से आएगा। उस दिन हर इंसान को अपने कर्मों का सामना करना होगा। यह हमारे लिए एक जागृति का संदेश है कि आज जो हम कर रहे हैं, उसका परिणाम हमें कल देखना होगा।

अगर हम आज अच्छे कर्म करें—नमाज़ पढ़ें, दूसरों की मदद करें, सच बोलें, ईमानदारी से जिएँ—तो उस दिन हमारा चेहरा चमकेगा और हम जन्नत की ओर बढ़ेंगे। लेकिन अगर हम बुरे कर्म करें—झूठ, धोखा, ज़ुल्म, गुनाह—तो उस दिन हमें पछतावा होगा, लेकिन पछतावा उस समय काम नहीं आएगा।

तो आइए, हम अपने जीवन को संवारें, अपने कर्मों को सुधारें, और उस दिन की तैयारी करें जब हमें अपने हर काम का हिसाब देना होगा। यही सच्ची सफलता है—उस दिन जन्नत की ओर जाने वालों में शामिल होना। अल्लाह हम सबको यह तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 4-8 — सूरा अज़-ज़लज़ला

4يَوْمَئِذٍ تُحَدِّثُ أَخْبَارَهَا
उस रोज़ वह अपने सब हालात बयान कर देगी
5بِأَنَّ رَبَّكَ أَوْحَىٰ لَهَا
क्योंकि तुम्हारे परवरदिगार ने उसको हुक्म दिया होगा
6يَوْمَئِذٍ يَصْدُرُ النَّاسُ أَشْتَاتًا لِّيُرَوْا أَعْمَالَهُمْ
उस दिन लोग गिरोह गिरोह (अपनी कब्रों से) निकलेंगे ताकि अपने आमाल को देखे
7فَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ خَيْرًا يَرَهُ
तो जिस शख्स ने ज़र्रा बराबर नेकी की वह उसे देख लेगा
8وَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ شَرًّا يَرَهُ
और जिस शख्स ने ज़र्रा बराबर बदी की है तो उसे देख लेगा
अज़-ज़लज़लाकुरान सूची
8आयत
मदनीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अज़-ज़लज़ला 6

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Thursday, October 1, 2026

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