Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِتَسْكُنُوا فِيهِ: ताकि तुम उसमें सुकून (आराम) हासिल करो, अर्थात् दिन भर की थकान और मेहनत के बाद चैन पाओ।
- مُبْصِرًا: रोशन और उजाला करने वाला, जिसमें चीज़ें साफ़ दिखाई दें।
- لَآيَاتٍ: निशानियाँ और सबूत (अल्लाह की क़ुदरत और एकता पर)।
- يَسْمَعُونَ: सुनने वाले, यानी जो कान लगाकर सुनें और उस पर ग़ौर करें।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह (एकमात्र) है जिसने तुम्हारे लिए रात को बनाया ताकि तुम उसमें सुकून हासिल करो — यानी दिन भर की दौड़-धूप, काम-काज और रोज़ी की तलाश की थकान के बाद तुम रात में आराम करो, चैन पाओ और अपनी ताकत वापस पाओ। और उसी ने दिन को रोशन बनाया ताकि तुम उसमें देख सको, अपने काम-काज कर सको, रोज़ी की तलाश में निकल सको और अपनी ज़िंदगी के मामलात (व्यवहार) को अंजाम दे सको। यानी रात और दिन का यह बदलता रहना — एक अंधेरा और सुकून वाला, दूसरा रोशन और काम वाला — तुम्हारे लिए अल्लाह की क़ुदरत और उसकी रहमत की बहुत बड़ी निशानियाँ हैं। ये निशानियाँ उन लोगों के लिए सबूत हैं जो सुनते हैं — सुनकर सोचते हैं, ग़ौर करते हैं और सबक़ लेते हैं। जो सिर्फ़ कान से नहीं, बल्कि दिल से सुनते हैं और इन निशानियों से अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी इबादत के हक़दार होने का सबूत पाते हैं।
फ़ायदे (सबक़):
- रात और दिन का बदलना अल्लाह की सबसे बड़ी निशानियों में से है — यह उसकी क़ुदरत और हिकमत (बुद्धिमत्ता) को दिखाता है, और इससे इंसान को यह समझना चाहिए कि इस कायनात का मालिक सिर्फ़ अल्लाह है।
- रात में सुकून और दिन में काम — यह अल्लाह की रहमत है। इंसान को चाहिए कि रात को आराम करे और दिन को काम करे, और इस तरह अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के बताए हुए निज़ाम (व्यवस्था) के मुताबिक़ चलाए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना और उनसे सबक़ लेना ईमान की निशानी है। जो लोग सोचते-समझते हैं, वही अल्लाह की क़ुदरत को पहचानते हैं और उसकी इबादत करते हैं।
- इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि ज़िंदगी में संतुलन (balance) ज़रूरी है — न तो पूरी रात जागकर दिन को बर्बाद करना चाहिए, न ही दिन को सोकर रात को जागना चाहिए। अल्लाह ने जिस तरह रात और दिन को बनाया है, उसी के मुताबिक़ चलना बेहतर है।
- यह आयत अल्लाह की मुहब्बत और एहसान को याद दिलाती है — कि उसने हमारी ज़रूरतों का ख़याल रखते हुए रात और दिन दोनों बनाए, ताकि हमारी ज़िंदगी आसान हो। यह हमें अल्लाह का शुक्र अदा करने और उसकी इबादत में लगे रहने की तरग़ीब (प्रेरणा) देता है।
📜 आयत 65-69 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 67
सूरा यूनुस आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के…सूरा आयत 67/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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