यूनुस · 66/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ ۗ وَمَا يَتَّبِعُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ شُرَكَاءَ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ ۝٦٦
Alaaa inna lillaahi man fis samaawaati wa man fil ard; wa maa yattabi`ul lazeena yad`oona min doonil laahi shurakaaa`; iny yattabi`oona illaz zannna wa in hum illaa yakhrusoon
📖 हिंदी अर्थ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फर्ज़ी) शरीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख्याली बातें किया करते हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَخْرُصُونَ: झूठ बोलते हैं, अटकलें लगाते हैं, झूठी बातें गढ़ते हैं।
  • شُرَكَاءَ: साझीदार, जिन्हें वे अल्लाह के साथ पूजा में शामिल करते हैं।
  • الظَّنَّ: अटकल, शक, बिना प्रमाण के धारणा।

तफसीर (व्याख्या):

सुनो! निस्संदेह आकाशों और धरती में जो कुछ भी है—चाहे वे फ़रिश्ते हों, इंसान हों, जिन्न हों या अन्य प्राणी—सब अल्लाह ही के हैं। उसी की मलिकियत (स्वामित्व) और हुकूमत सब पर है। वह जो चाहता है, करता है और जैसा चाहता है, फ़ैसला करता है।

फिर अल्लाह तआला उन लोगों की स्थिति बयान करता है जो उसे छोड़कर दूसरों को पूजते हैं। वे जिन्हें अल्लाह के सिवा पुकारते हैं और उन्हें अल्लाह का साझीदार ठहराते हैं, वास्तव में वे किसी सच्ची चीज़ का अनुसरण नहीं कर रहे। उनके ये तथाकथित साझीदार न तो कोई सृष्टि कर सकते हैं, न किसी का भला-बुरा कर सकते हैं, न ही उनके पास कोई शक्ति है। ये सब उनके वहम और गुमान की उपज हैं।

सच्चाई यह है कि वे केवल अपने अटकलों और धारणाओं का अनुसरण कर रहे हैं—उन्हें यह गुमान है कि ये मूर्तियाँ या देवता उन्हें अल्लाह के करीब कर देंगी या उनकी सिफ़ारिश करेंगी। और वे केवल झूठ बोल रहे हैं, क्योंकि अल्लाह की रबूबियत में किसी को साझीदार ठहराना सरासर झूठ और बदतरीन बोहतान है। अल्लाह इससे पाक और बुलंद है कि उसका कोई साझीदार हो।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि पूरी कायनात अल्लाह की मिल्कियत में है, इसलिए हमें उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
  2. अल्लाह के सिवा किसी और की पूजा या उसे अल्लाह का साझीदार बनाना सिर्फ़ अटकलों और झूठ पर आधारित है, जिसकी कोई सच्चाई नहीं।
  3. यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है—केवल अल्लाह पर भरोसा करना, उसी से डरना और उसी से उम्मीद रखना। जब सब कुछ उसी का है, तो उसके सिवा किसी से डरना या उम्मीद रखना बेकार है।
  4. यह हमें सिखाती है कि इंसान को अपने दीन और अक़ीदे में सिर्फ़ प्रमाण और सच्चाई की पैरवी करनी चाहिए, न कि अटकलों और बेबुनियाद धारणाओं की।
  5. अल्लाह की पाकी बयान करना और उसे हर उस चीज़ से मुबर्रा (पवित्र) जानना जो उसके शान के खिलाफ़ है, हमारे ईमान का हिस्सा है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह हर कमी और हर साझीदार से पाक है।


📜 आयत 64-68 — यूनुस

64لَهُمُ الْبُشْرَىٰ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۚ لَا تَبْدِيلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की ज़िन्दगी में भी और आख़िरत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है
65وَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا ۚ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और (ऐ रसूल) उन (कुफ्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक़ नहीं कि सारी इज्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है
66أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ ۗ وَمَا يَتَّبِعُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ شُرَكَاءَ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फर्ज़ी) शरीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख्याली बातें किया करते हैं
67هُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौशनी में देखो भालो उसमें शक़ नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)
68قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا ۗ سُبْحَانَهُ ۖ هُوَ الْغَنِيُّ ۖ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ إِنْ عِندَكُم مِّن سُلْطَانٍ بِهَٰذَا ۚ أَتَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यू ही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीRevelation
66आयत

अनुवाद — यूनुस 66

सूरा यूनुस आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग आसमानों में…

सूरा आयत 66/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए