अल-क़ारिया · 6/11
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ारिया
فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ ۝٦
Fa-amma man thaqulat mawa zeenuh
📖 हिंदी अर्थ
तो जिसके (नेक आमाल) के पल्ले भारी होंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَقُلَتْ – भारी हो गईं, प्रधान हो गईं
  • مَوَازِينُهُ – उसके (नेकी के) पलड़े, तराजू के पलड़े

तफ़सीर (व्याख्या):

जब उस महान दिन का हाल होगा, जिसे 'क़ारिआ' (खटखटाने वाली) कहा गया है, तो लोगों के आमाल (कर्म) तौले जाएंगे। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जिस शख्स के नेकियों के पलड़े भारी होंगे, यानी उसके अच्छे कर्म उसके बुरे कर्मों पर ग़ालिब आ जाएंगे और उसकी नेकियाँ उसकी बुराइयों से ज़्यादा होंगी, तो वह कामयाबी की मंज़िल को पहुँच जाएगा।

यह तराज़ू अल्लाह तआला की उस आदिल (न्यायपूर्ण) अदालत का हिस्सा है, जिसमें ज़र्रा-बराबर भी ज़ुल्म नहीं होगा। यहाँ नेकियों का वज़न सिर्फ़ अमल की कसरत से नहीं होगा, बल्कि अमल की ख़ुलूस (निष्ठा), सुन्नत की पैरवी और अल्लाह की रज़ा की तलब पर होगा। जिसके पलड़े भारी होंगे, वही असली कामयाब है, चाहे दुनिया में उसे कितना भी कमज़ोर या बेक़दर समझा जाता हो।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमारी असली क़ीमत दुनिया के माल-ओ-मंसब से नहीं, बल्कि हमारे आमाल से है। हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में नेकियों को जमा करते रहें, ताकि उस दिन हमारा पलड़ा भारी हो और हम उन ख़ुशनसीबों में शामिल हों, जिनका अंजाम जन्नत की राहत और ख़ुशी है। यह अल्लाह का फ़ज़ल है कि उसने हमें मौका दिया है कि हम अपने आमाल को सुधारें, तौबा करें और नेकियों की तरफ़ बढ़ें। काश! हम इस मौके़ को ग़नीमत जानें और अपने रब की रज़ा के लिए अमल करें।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-क़ारिया

4يَوْمَ يَكُونُ النَّاسُ كَالْفَرَاشِ الْمَبْثُوثِ
जिस दिन लोग (मैदाने हश्र में) टिड्डियों की तरह फैले होंगे
5وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ الْمَنفُوشِ
और पहाड़ धुनकी हुई रूई के से हो जाएँगे
6فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ
तो जिसके (नेक आमाल) के पल्ले भारी होंगे
7فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ
वह मन भाते ऐश में होंगे
8وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ
और जिनके आमाल के पल्ले हल्के होंगे
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6आयत

अनुवाद — अल-क़ारिया 6

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Tuesday, September 29, 2026

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