हूद · 110/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ فِيهِ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ ۝١١٠
Wa laqad aatainaa Moosal Kitaaba fakhtulifa feeh; wa law laa Kalimatun sabaqat mir Rabbika laqudiya bainahum; wa innahum lafee shakkim minhu mureeb
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मूसा को किताब तौरैत अता की तो उसमें (भी) झगड़े डाले गए और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हुक्म कोइ पहले ही न हो चुका होता तो उनके दरमियान (कब का) फैसला यक़ीनन हो गया होता और ये लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) भी इस (क़ुरान) की तरफ से बहुत गहरे शक़ में पड़े हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْكِتَابَ: तौरात।
  • فَاخْتُلِفَ فِيهِ: कुछ ने उसे माना और कुछ ने उसे झुठलाया।
  • كَلِمَةٌ سَبَقَتْ: अल्लाह का वह फैसला जो पहले से तय हो चुका है (अज़ाब में देरी का वादा)।
  • لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ: उनके बीच फैसला कर दिया जाता (यानी झुठलाने वालों को सज़ा दे दी जाती)।
  • مُرِيبٍ: वह शक जो दिल को बेचैन कर दे और संदेह में डाल दे।

तफसीर:

हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को तौरात जैसी महान किताब प्रदान की, लेकिन उनकी क़ौम ने उसमें मतभेद किया — कुछ ने उसे माना और कुछ ने उसे झुठलाया। यही हाल आपकी क़ौम (कुरैश) का भी है, जो आपके द्वारा लाए गए कुरआन के साथ कर रही है। अगर अल्लाह का वह फैसला पहले से तय न होता कि वह अपने बंदों को अज़ाब देने में जल्दी नहीं करता, बल्कि एक निश्चित समय तक उन्हें मोहलत देता है, तो उनके बीच तुरंत फैसला कर दिया जाता — यानी झुठलाने वालों को दुनिया में ही हलाक कर दिया जाता और ईमान लाने वालों को नजात दे दी जाती। लेकिन अल्लाह की हिकमत यह है कि वह अज़ाब को क़ियामत के दिन तक के लिए टाल देता है। और यक़ीनन ये काफ़िर — चाहे वे यहूदी हों या मुशरिक — इस कुरआन के बारे में ऐसे संदेह में हैं जो उनके दिलों को बेचैन कर देता है और उन्हें सच्चाई की तरफ बढ़ने से रोकता है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह रही है कि वह अपने नबियों की किताबों के साथ भेजे जाने के बावजूद लोगों को आज़माइश में डालता है, ताकि सच्चे ईमान वाले झूठे दावे करने वालों से अलग हो जाएं।
  2. अल्लाह का अज़ाब न देने में देरी उसकी रहमत और हिकमत का नतीजा है, न कि उसकी कमज़ोरी। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फैसलों पर भरोसा रखना चाहिए और जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।
  3. संदेह और बेचैनी (रीब) इंसान को हक़ (सच्चाई) से दूर रखती है। इसलिए हमें अपने दिलों को शक से पाक रखना चाहिए और कुरआन को खुले दिल से पढ़ना चाहिए, क्योंकि यही हिदायत का ज़रिया है।
  4. यह आयत हमें तसल्ली देती है कि जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उनकी किताब में इख्तिलाफ़ किया, उसी तरह आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की क़ौम ने कुरआन के साथ किया — यह कोई नई बात नहीं, बल्कि नबियों की आज़माइश का हिस्सा है। इसलिए सब्र रखें और अल्लाह पर भरोसा करें।


📜 आयत 108-112 — सूरा हूद

108۞ وَأَمَّا الَّذِينَ سُعِدُوا فَفِي الْجَنَّةِ خَالِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ إِلَّا مَا شَاءَ رَبُّكَ ۖ عَطَاءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ
और जो लोग नेक बख्त हैं वह तो बेहश्त में होगें (और) जब तक आसमान व ज़मीन (बाक़ी) है वह हमेशा उसी में रहेगें मगर जब तेरा परवरदिगार चाहे (सज़ा देकर आख़िर में जन्नत में ले जाए
109فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّمَّا يَعْبُدُ هَٰؤُلَاءِ ۚ مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ آبَاؤُهُم مِّن قَبْلُ ۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍ
ये वह बख़्शिस है जो कभी मनक़तआ (खत्म) न होगी तो ये लोग (ख़ुदा के अलावा) जिसकी परसतिश करते हैं तुम उससे शक़ में न पड़ना ये लोग तो बस वैसी इबादत करते हैं जैसी उनसे पहले उनके बाप दादा करते थे और हम ज़रुर (क़यामत के दिन) उनको (अज़ाब का) पूरा पूरा हिस्सा बग़ैर कम किए देगें
110وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ فِيهِ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ
और हमने मूसा को किताब तौरैत अता की तो उसमें (भी) झगड़े डाले गए और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हुक्म कोइ पहले ही न हो चुका होता तो उनके दरमियान (कब का) फैसला यक़ीनन हो गया होता और ये लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) भी इस (क़ुरान) की तरफ से बहुत गहरे शक़ में पड़े हैं
111وَإِنَّ كُلًّا لَّمَّا لَيُوَفِّيَنَّهُمْ رَبُّكَ أَعْمَالَهُمْ ۚ إِنَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
और इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उनकी कारस्तानियों का बदला भरपूर देगा (क्योंकि) जो उनकी करतूतें हैं उससे वह खूब वाक़िफ है
112فَاسْتَقِمْ كَمَا أُمِرْتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْا ۚ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
तो (ऐ रसूल) जैसा तुम्हें हुक्म दिया है तुम और वह लोग भी जिन्होंने तुम्हारे साथ (कुफ्र से) तौबा की है ठीक साबित क़दम रहो और सरकशी न करो (क्योंकि) तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह यक़ीनन देख रहा है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
110आयत

अनुवाद — हूद 110

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Friday, October 2, 2026

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