अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيُهْلِكَ: विनष्ट करने के लिए, हलाक करने के लिए।
- الْقُرَىٰ: बस्तियों को, बसाहटों को।
- بِظُلْمٍ: अत्याचार के साथ, ज़ुल्म करते हुए।
- مُصْلِحُونَ: सुधार करने वाले, अच्छे कर्म करने वाले, ईमानवाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आपका रब ऐसा नहीं है कि वह किसी बस्ती को उसके निवासियों पर अत्याचार करते हुए विनष्ट कर दे, जबकि उसके लोग सुधार करने वाले हों, अपने कर्मों को अच्छा बनाने वाले हों और ईमान की राह पर चल रहे हों। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता और न ही उसकी सज़ा किसी बेगुनाह को मिलती है। वह तो केवल उन्हीं बस्तियों को हलाक करता है जिनके निवासी कुफ्र, शिर्क, अत्याचार और बुराइयों में डूबे हुए हों, जो ज़मीन पर फ़साद फैलाते हों। जब लोग सुधार की राह पर होते हैं, तो अल्लाह की रहमत उन्हें घेर लेती है और वह उन्हें सज़ा से बचा लेता है। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि वह नेक और सुधार करने वाले लोगों को उनके पापियों की वजह से भी तब तक सज़ा नहीं देता जब तक वे स्वयं बुराई की ओर न मुड़ जाएँ।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अत्यंत दयालु और न्यायी है, वह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। उसकी सज़ा हमेशा इंसाफ़ पर आधारित होती है।
- समाज में सुधार और अच्छाई का बहुत महत्व है। जब लोग नेक काम करते हैं और आपस में भलाई फैलाते हैं, तो अल्लाह की रहमत उन पर नाज़िल होती है और वह उन्हें मुसीबतों से बचाता है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की पकड़ केवल उन्हीं पर आती है जो ज़ुल्म और फ़साद फैलाते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने समाज में सुधार लाने की कोशिश करें, न कि बिगाड़ पैदा करें।
- इससे हमें यह उम्मीद मिलती है कि अगर हम ईमान और नेक कर्मों पर स्थिर रहें, तो अल्लाह की सुरक्षा हमारे साथ है, चाहे हमारे आसपास कितनी भी बुराइयाँ क्यों न हों।
📜 आयत 115-119 — हूद
अनुवाद — हूद 117
सूरा हूद आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारा परवरदिगार ऐसा (बे इन्साफ) कभी न था कि…सूरा आयत 117/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 115–119. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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