अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَسْتَ مُرْسَلًا — तुम अल्लाह के भेजे हुए (रसूल) नहीं हो।
- كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا — अल्लाह गवाह के रूप में काफी है।
- مَنْ عِندَهُ عِلْمُ الْكِتَابِ — वह व्यक्ति जिसके पास किताब (आसमानी किताबों) का ज्ञान है।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफिरों की उस जिद्द और हठधर्मिता को बयान करती है जो हर युग में सच्चाई को झुठलाने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते रहे हैं। वे कहते हैं कि "ऐ मुहम्मद! तुम अल्लाह के भेजे हुए रसूल नहीं हो, तुम तो सिर्फ अपनी तरफ से दावा कर रहे हो।" यह वही पुरानी चाल है जो हर नबी के साथ उनकी कौम ने अपनाई — सच्चाई को सुनकर भी उसे नकार देना और नबी पर झूठा आरोप लगाना।
अल्लाह तआला अपने नबी को सिखाता है कि ऐ रसूल! इन जिद्दी लोगों से कहो: "मेरे और तुम्हारे बीच अल्लाह ही गवाह काफी है।" यानी अल्लाह तआला खुद जानता है कि मैं सच्चा हूँ और उसी की तरफ से भेजा गया हूँ। उसकी गवाही सबसे बड़ी गवाही है — वह मेरे दावे की सच्चाई पर गवाह है और तुम्हारे झुठलाने पर भी गवाह है। जिसे अल्लाह की गवाही मिल जाए, उसे दुनिया के किसी इंसान के झुठलाने की परवाह नहीं होनी चाहिए।
फिर अल्लाह तआला कहता है: "और वह भी गवाह है जिसके पास किताब का ज्ञान है।" इससे मुराद वे सच्चे विद्वान हैं जिन्होंने आसमानी किताबों (तौरात और इंजील) में पढ़ा था कि अंतिम नबी का आना होगा। जब उन्होंने मुहम्मद ﷺ को देखा तो उन्होंने उनकी नबुव्वत की गवाही दी — जैसे अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ियल्लाहु अन्हु और नजाशी जैसे लोग जिन्होंने सच्चाई को पहचानकर ईमान लाया। यह गवाही इस बात का सबूत है कि आप ﷺ सच्चे रसूल हैं, क्योंकि जिन लोगों के पास पहले की किताबों का ज्ञान था, उन्होंने आपकी निशानियों को पहचान लिया था।
दावत और नसीहत:
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई पर चलने वाले को दुनिया के झुठलाने से घबराना नहीं चाहिए। अल्लाह की गवाही और सच्चे लोगों की गवाही ही काफी है। जब कोई इंसान सच्चाई पर हो और उसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो, तो उसे किसी की परवाह नहीं होती। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ज्ञान रखने वाले लोग सच्चाई को पहचानते हैं और उसकी गवाही देते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम इल्म हासिल करें, कुरान और सुन्नत को समझें, और सच्चाई पर डटे रहें — चाहे दुनिया कितनी भी मुखालिफत क्यों न करे। अल्लाह तआला अपने नबी के साथ था, और जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उनके साथ होता है। यही सबसे बड़ी ताकत है।
📜 आयत 41-43 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 43
सूरा अर-राद आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) काफिर लोग कहते हैं कि तुम पैग़म्बर…सूरा आयत 43/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 41–43. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








