अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ذَرْهُمْ: उन्हें छोड़ दो, उनसे किनारा कर लो।
- يَأْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا: वे खाएँ और सांसारिक सुख-भोग उठाएँ।
- يُلْهِهِمُ الْأَمَلُ: लंबी आशाएँ (लालसाएँ) उन्हें गाफिल रखें।
- فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ: तो वे शीघ्र ही (अपना अंजाम) जान लेंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! इन झुठलाने वालों को छोड़ दो कि वे जानवरों की तरह खाएँ-पीएँ और दुनिया के फ़ानी (नाशवान) सुखों में मग्न रहें। उनकी लंबी आशाएँ और दुनिया में बने रहने की तमन्नाएँ उन्हें ईमान और नेक कामों से ग़ाफिल रखें, और उन्हें आख़िरत की फ़िक्र से बेख़बर कर दें। उन्हें अपनी उम्र लंबी होने की उम्मीद है, और यही उम्मीद उन्हें अल्लाह की इबादत और अच्छे आमाल से रोकती है। लेकिन जब वे क़यामत के दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे और अपने किए का बदला देखेंगे, तो उन्हें अपनी सख़्त घाटे का यक़ीन हो जाएगा। उस वक़्त उन्हें मालूम होगा कि उन्होंने कितनी बड़ी भूल की थी, और यह जानना उनके किसी काम न आएगा।
फ़ायदे (सबक़):
- इस आयत से मालूम होता है कि दुनिया की मोहब्बत और लंबी आरज़ूएँ इंसान को आख़िरत से ग़ाफिल कर देती हैं। जो लोग सिर्फ़ खाने-पीने और सुख-भोग में लगे रहते हैं, वे असल कामयाबी से महरूम रहते हैं।
- अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली देता है कि हिदायत का काम तुम्हारा है, ज़बरदस्ती किसी को ईमान नहीं ला सकते। जो लोग हक़ को ठुकरा दें, उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि मौत और आख़िरत की याद दिल में रखनी चाहिए। दुनिया की चमक-दमक और लंबी उम्र की उम्मीदें हमें नेक कामों से दूर न करें।
- अल्लाह की पकड़ धीमी ज़रूर है, लेकिन बहुत सख़्त है। जो लोग मौज-मस्ती में मग्न हैं, वे एक दिन अपने किए की सज़ा ज़रूर भुगतेंगे। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और नेकियों में गुज़ारे।
📜 आयत 1-5 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 3
सूरा अल-हिज्र आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : काश (हम भी) मुसलमान होते (ऐ रसूल) उन्हें उनकी हालत…सूरा आयत 3/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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