अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صَلْصَالٍ: सूखी हुई मिट्टी जो बजने की आवाज़ करे।
- حَمَإٍ: काली कीचड़।
- مَسْنُونٍ: बदबूदार या सड़ी हुई (जिसका रंग और गंध बदल गया हो)।
व्याख्या:
इबलीस ने अल्लाह के आदेश का पालन करने से इनकार करते हुए, घमंड और ईर्ष्या के कारण कहा: "मैं ऐसा नहीं हो सकता कि मैं एक इंसान को सजदा करूँ, जिसे तूने सूखी खनखनाती मिट्टी से बनाया है, जो पहले काली, सड़ी हुई और बदबूदार कीचड़ थी।" उसका कहने का तात्पर्य यह था कि वह स्वयं को इस इंसान से बेहतर और श्रेष्ठ समझता था, क्योंकि वह आग से बनाया गया था, जबकि मनुष्य मिट्टी से बनाया गया है। यह उसका अहंकार और अवज्ञा का स्पष्ट प्रमाण था, जिसके कारण उसे शापित और दुर्भाग्यशाली बना दिया गया।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अहंकार (घमंड) सबसे बड़ी बुराई है, जो इंसान को अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करने पर मजबूर कर देता है। इबलीस का पतन उसके घमंड के कारण हुआ, इसलिए हमें अपने दिलों को अहंकार से बचाना चाहिए।
- अल्लाह की आज्ञा का पालन करना हर हाल में ज़रूरी है, चाहे उसका कारण हमारी समझ में न आए। इबलीस ने अल्लाह के आदेश को अपनी बुद्धि से तौलने की कोशिश की, जो उसकी भूल बनी।
- इंसान की इज़्ज़त और श्रेष्ठता उसके अमल (कर्म) और ईमान पर निर्भर है, न कि उसकी रचना की सामग्री पर। अल्लाह ने इंसान को मिट्टी से बनाकर उसे सम्मान दिया, और फ़रिश्तों को उसे सजदा करने का आदेश दिया।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के फैसलों पर भरोसा करें और अपनी राय को उसके आदेशों से ऊपर न रखें। इबलीस की तरह तर्क-वितर्क करना शैतानी तरीका है, जबकि मोमिन का तरीका समर्पण और आज्ञाकारिता है।
- क़ुरआन हमें बताता है कि शैतान हमारा खुला दुश्मन है, इसलिए हमें उसके बहकावे से सावधान रहना चाहिए और अल्लाह की राह पर चलकर उसके धोखे से बचना चाहिए।
📜 आयत 31-35 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 33
सूरा अल-हिज्र आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह (ढिठाई से) कहने लगा मैं ऐसा गया गुज़रा तो…सूरा आयत 33/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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