अल-हिज्र · 34/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ ۝٣٤
Qaala fakhruj minhaa fa innaka rajeem
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने फरमाया (नहीं तू) तो बेहश्त से निकल जा (दूर हो) कि बेशक तू मरदूद है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاخْرُجْ: निकल जा, बाहर हो जा।
  • مِنْهَا: उस (जन्नत) से।
  • رَجِيمٌ: रज्म किया हुआ, अर्थात् मारा-मारा, धुत्कारा हुआ, हर भलाई से दूर किया हुआ, और शैतान को पत्थर मारने के अर्थ में भी प्रयोग होता है।

तफ़सीर:

जब इब्लीस ने अल्लाह के आदेश का उल्लंघन करते हुए आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करने से इनकार कर दिया और घमंड के साथ अपनी बुराई को जायज़ ठहराने की कोशिश की, तो अल्लाह तआला ने उसे फटकारते हुए फरमाया: "तू जन्नत से निकल जा।" यह निकलना केवल उस स्थान से निकलना नहीं था, बल्कि यह अल्लाह की रहमत, करम और हर भलाई से निकाले जाने का एलान था। अल्लाह ने उसे "रजीम" कहा, यानी वह अब ऐसा है जो हर तरह की रहमत से धुत्कारा गया, लानत किया गया और अपमानित किया गया। वह अल्लाह की रहमत से इतना दूर हो गया कि उस पर हमेशा के लिए लानत है, और यह लानत उस पर उस दिन तक रहेगी जब तक लोगों को हिसाब के लिए उठाया जाएगा। यह आदेश उसकी उस हालत की सज़ा थी जो उसने अपने घमंड और अल्लाह के हुक्म की अवहेलना से पैदा की थी। इसके बाद वह जन्नत से निकाल दिया गया और उसका ठिकाना जहन्नम ठहराया गया।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह का हुक्म मानना ही सच्ची इज़्ज़त है, और उसकी नाफ़रमानी इंसान को रुतबे से गिरा देती है। इब्लीस की सारी इबादतें उसके घमंड और नाफ़रमानी की वजह से बेकार हो गईं।
  2. अल्लाह की रहमत से निकाला जाना सबसे बड़ी सज़ा है, और उसकी रहमत पाने के लिए उसके आदेशों का पालन ज़रूरी है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि किसी भी मुसलमान को अपने अमल पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि घमंड इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर सकता है।
  4. अल्लाह की पनाह माँगनी चाहिए कि वह हमें शैतान के रास्ते से बचाए, और हमेशा उसकी तरफ़ रुजू करते रहना चाहिए, क्योंकि शैतान का अंजाम हमेशा के लिए बर्बादी है।


📜 आयत 32-36 — अल-हिज्र

32قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ
(इस पर ख़ुदा ने) फरमाया आओ शैतान आख़िर तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों के साथ शामिल न हुआ
33قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
वह (ढिठाई से) कहने लगा मैं ऐसा गया गुज़रा तो हूँ नहीं कि ऐसे आदमी को सजदा कर बैठूँ जिसे तूने सड़ी हुई खन खन बोलने वाली मिट्टी से पैदा किया है
34قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ
ख़ुदा ने फरमाया (नहीं तू) तो बेहश्त से निकल जा (दूर हो) कि बेशक तू मरदूद है
35وَإِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ الدِّينِ
और यक़ीनन तुझ पर रोज़े में जज़ा तक फिटकार बरसा करेगी
36قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِي إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
शैतान ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार ख़ैर तू मुझे उस दिन तक की मोहलत दे जबकि (लोग दोबारा ज़िन्दा करके) उठाए जाएँगें
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अनुवाद — अल-हिज्र 34

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Wednesday, August 19, 2026

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