अल-हिज्र · 96/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
الَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ۝٩٦
Allazeena yaj`aloona ma`al laahi ilaahan aakhar; fasawfa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा के साथ दूसरे परवरदिगार को (शरीक) ठहराते हैं हम तुम्हारी तरफ से उनके लिए काफी हैं तो अनक़रीब ही उन्हें मालूम हो जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَجْعَلُونَ: बनाते हैं, ठहराते हैं
  • إِلَٰهًا آخَرَ: कोई और पूज्य/उपास्य
  • فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ: तो वे शीघ्र ही जान लेंगे (अपने किए का परिणाम)

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह के साथ किसी और को पूज्य ठहराते हैं। ये वे लोग हैं जो मूर्तियों, पत्थरों या अन्य चीज़ों को अल्लाह का साझीदार बनाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जल्द ही जान लेंगे कि उनका यह काम कितना बुरा और विनाशकारी था। यह धमकी और चेतावनी है कि उन्हें अपने शिर्क का बुरा अंजाम देखना होगा — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। जब सज़ा आएगी, तब उन्हें पता चलेगा कि उन्होंने कितनी बड़ी ग़लती की थी, लेकिन तब पछतावा किसी काम न आएगा।

फ़ायदे और सबक:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना सबसे बड़ा पाप है, और अल्लाह इस पर कभी माफ़ी नहीं देता जब तक इंसान तौबा न करे।
  2. अल्लाह की सज़ा में देरी उसकी मेहरबानी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सज़ा नहीं आएगी — हर ग़लत काम का अंजाम ज़रूर सामने आएगा।
  3. एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने जीवन में तौहीद (अल्लाह की एकता) को मज़बूती से थामे रखे और हर उस चीज़ से बचे जो शिर्क की तरफ ले जाए — चाहे वह बड़ी हो या छोटी।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह अपने नबी (ﷺ) का साथ देता है और उनका मज़ाक उड़ाने वालों को कभी नहीं छोड़ता — यह हर उस इंसान के लिए तसल्ली है जो सच्चाई पर है और उसे ठेस पहुँचाई जाती है।
  5. हमें चाहिए कि हम अपने अंदर यह यक़ीन पैदा करें कि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब लेने वाला है, और यही यक़ीन हमें सीधे रास्ते पर चलने में मदद करता है।


📜 आयत 94-98 — सूरा अल-हिज्र

94فَاصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ
और मुशरेकीन की तरफ से मुँह फेर लो
95إِنَّا كَفَيْنَاكَ الْمُسْتَهْزِئِينَ
जो लोग तुम्हारी हँसी उड़ाते है
96الَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
और ख़ुदा के साथ दूसरे परवरदिगार को (शरीक) ठहराते हैं हम तुम्हारी तरफ से उनके लिए काफी हैं तो अनक़रीब ही उन्हें मालूम हो जाएगा
97وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ
कि तुम जो इन (कुफ्फारों मुनाफिक़ीन) की बातों से दिल तंग होते हो उसको हम ज़रुर जानते हैं
98فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ السَّاجِدِينَ
तो तुम अपने परवरदिगार की हम्दो सना से उसकी तस्बीह करो और (उसकी बारगाह में) सजदा करने वालों में हो जाओ
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
96आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 96

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Friday, October 2, 2026

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