अन-नहल · 117/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
مَتَاعٌ قَلِيلٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝١١٧
Mata`un qaleelunw wa lahum `azaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
(दुनिया में) फायदा तो ज़रा सा है और (आख़िरत में) दर्दनाक अज़ाब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَتَاعٌ: सांसारिक सुख-सामग्री, जीवन का अस्थायी उपभोग।
  • قَلِيلٌ: बहुत थोड़ा, क्षणभंगुर, अत्यल्प।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक और बहुत पीड़ादायक यातना।

व्याख्या:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अपनी इच्छाओं और मनमानी का अनुसरण करते हैं, हलाल-हराम की परवाह नहीं करते, और केवल दुनिया के सुख-भोग में लिप्त रहते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन लोगों को जो कुछ दुनिया में मिलता है, वह केवल एक बहुत ही थोड़ा और क्षणभंगुर सामान है। यह मज़ा कुछ ही दिनों का है, जो जल्द ही खत्म हो जाने वाला है। यह कोई स्थायी नेमत नहीं है जिस पर उन्हें गर्व हो या जिसे वे अपनी सफलता समझें।

इसके बाद अल्लाह तआला स्पष्ट करते हैं कि इस अस्थायी और तुच्छ दुनियावी सुख के बाद उनके लिए आख़िरत में एक ऐसा दर्दनाक अज़ाब है जो कभी खत्म नहीं होगा। यानी उनकी इस दुनिया की कामयाबी और आनंद उन्हें उस स्थायी यातना से नहीं बचा सकता। यह अज़ाब उनके किए हुए कर्मों का परिणाम होगा, जो उन्होंने दुनिया में अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए किए।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. दुनिया की सारी सुख-सुविधाएँ, चाहे कितनी भी अधिक क्यों न हों, आख़िरत के मुकाबले में बहुत थोड़ी और क्षणभंगुर हैं। इसलिए बुद्धिमान वही है जो इस अस्थायी जीवन को आख़िरत की स्थायी सफलता के लिए इस्तेमाल करे।
  2. जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी और अपनी इच्छाओं की पैरवी में दुनिया भर के सुख जुटा लें, वे इस बात से धोखे में न रहें कि उन्हें सब कुछ मिल रहा है। यह धोखा है, क्योंकि इसके बाद उनका असली ठिकाना दर्दनाक अज़ाब है।
  3. यह आयत इंसान को संयम और संतोष की शिक्षा देती है कि वह दुनिया में अल्लाह की दी हुई चीज़ों पर क़नाअत करे और हराम कमाई से बचे, क्योंकि हराम की कमाई का अंजाम बहुत बुरा है।
  4. मोमिन के लिए यह आयत एक चेतावनी है कि वह अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाए, ताकि उसे उस दर्दनाक अज़ाब से बचाया जा सके और उसे जन्नत की स्थायी नेमतें मिल सकें।


📜 आयत 115-119 — अन-नहल

115إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ ۖ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसकी नेअमत का शुक्र अदा किया करो तुम पर उसने मुरदार और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर (ज़बाह के वक्त) ख़ुदा के सिवा (किसी) और का नाम लिया जाए हराम किया है फिर जो शख़्श (मारे भूक के) मजबूर हो ख़ुदा से सरतापी (नाफरमानी) करने वाला हो और न (हद ज़रुरत से) बढ़ने वाला हो और (हराम खाए) तो बेशक ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है
116وَلَا تَقُولُوا لِمَا تَصِفُ أَلْسِنَتُكُمُ الْكَذِبَ هَٰذَا حَلَالٌ وَهَٰذَا حَرَامٌ لِّتَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ
और झूट मूट जो कुछ तुम्हारी ज़बान पर आए (बे समझे बूझे) न कह बैठा करों कि ये हलाल है और हराम है ताकि इसकी बदौलत ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाँधने लगो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
117مَتَاعٌ قَلِيلٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
(दुनिया में) फायदा तो ज़रा सा है और (आख़िरत में) दर्दनाक अज़ाब है
118وَعَلَى الَّذِينَ هَادُوا حَرَّمْنَا مَا قَصَصْنَا عَلَيْكَ مِن قَبْلُ ۖ وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
और यहूदियों पर हमने वह चीज़े हराम कर दीं थी जो तुमसे पहले बयान कर चुके हैं और हमने तो (इस की वजह से) उन पर कुछ ज़ुल्म नहीं किया
119ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ عَمِلُوا السُّوءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर वह लोग खुद अपने ऊपर सितम तोड़ रहे हैं फिर इसमे शक़ नहीं कि जो लोग नादानी से गुनाह कर बैठे उसके बाद सदक़ दिल से तौबा कर ली और अपने को दुरुस्त कर लिया तो (ऐ रसूल) इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इसके बाद बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अन-नहल 117

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Tuesday, August 18, 2026

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