Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَتَاعٌ: सांसारिक सुख-सामग्री, जीवन का अस्थायी उपभोग।
- قَلِيلٌ: बहुत थोड़ा, क्षणभंगुर, अत्यल्प।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक और बहुत पीड़ादायक यातना।
व्याख्या:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अपनी इच्छाओं और मनमानी का अनुसरण करते हैं, हलाल-हराम की परवाह नहीं करते, और केवल दुनिया के सुख-भोग में लिप्त रहते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन लोगों को जो कुछ दुनिया में मिलता है, वह केवल एक बहुत ही थोड़ा और क्षणभंगुर सामान है। यह मज़ा कुछ ही दिनों का है, जो जल्द ही खत्म हो जाने वाला है। यह कोई स्थायी नेमत नहीं है जिस पर उन्हें गर्व हो या जिसे वे अपनी सफलता समझें।
इसके बाद अल्लाह तआला स्पष्ट करते हैं कि इस अस्थायी और तुच्छ दुनियावी सुख के बाद उनके लिए आख़िरत में एक ऐसा दर्दनाक अज़ाब है जो कभी खत्म नहीं होगा। यानी उनकी इस दुनिया की कामयाबी और आनंद उन्हें उस स्थायी यातना से नहीं बचा सकता। यह अज़ाब उनके किए हुए कर्मों का परिणाम होगा, जो उन्होंने दुनिया में अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए किए।
शिक्षाएँ और लाभ:
- दुनिया की सारी सुख-सुविधाएँ, चाहे कितनी भी अधिक क्यों न हों, आख़िरत के मुकाबले में बहुत थोड़ी और क्षणभंगुर हैं। इसलिए बुद्धिमान वही है जो इस अस्थायी जीवन को आख़िरत की स्थायी सफलता के लिए इस्तेमाल करे।
- जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी और अपनी इच्छाओं की पैरवी में दुनिया भर के सुख जुटा लें, वे इस बात से धोखे में न रहें कि उन्हें सब कुछ मिल रहा है। यह धोखा है, क्योंकि इसके बाद उनका असली ठिकाना दर्दनाक अज़ाब है।
- यह आयत इंसान को संयम और संतोष की शिक्षा देती है कि वह दुनिया में अल्लाह की दी हुई चीज़ों पर क़नाअत करे और हराम कमाई से बचे, क्योंकि हराम की कमाई का अंजाम बहुत बुरा है।
- मोमिन के लिए यह आयत एक चेतावनी है कि वह अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाए, ताकि उसे उस दर्दनाक अज़ाब से बचाया जा सके और उसे जन्नत की स्थायी नेमतें मिल सकें।
📜 आयत 115-119 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 117
सूरा अन-नहल आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (दुनिया में) फायदा तो ज़रा सा है और (आख़िरत में)…सूरा आयत 117/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 115–119. हिंदी अर्थ: اردو.
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Saturday, October 3, 2026
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