अन-नहल · 118/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَعَلَى الَّذِينَ هَادُوا حَرَّمْنَا مَا قَصَصْنَا عَلَيْكَ مِن قَبْلُ ۖ وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ ۝١١٨
Wa `alal lazeena haadoo harramnaa ma qasasnaa `alaika min qablu wa maa zalamanaahum wa laakin kaanoo anfusahum wa laakin kaanoo anfusahum yazlimoon
📖 हिंदी अर्थ
और यहूदियों पर हमने वह चीज़े हराम कर दीं थी जो तुमसे पहले बयान कर चुके हैं और हमने तो (इस की वजह से) उन पर कुछ ज़ुल्म नहीं किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • हादू (هَادُوا): यहूदी बने, यहूदी धर्म अपनाया।
  • क़सस्ना (قَصَصْنَا): हमने बयान किया, सुनाया।
  • ज़ुल्म (ظُلْم): अत्याचार करना, किसी का हक़ मारना।

तफ़सीर (व्याख्या):

और यहूदियों पर हमने वह चीज़ें हराम (अवैध) कीं जिनका विवरण हमने आपसे पहले (सूरह अल-अनआम में) किया था—यानी हर नाख़ून वाला जानवर (जैसे ऊँट, शुतुरमुर्ग आदि), और गाय-बकरी की चर्बी, सिवाय उसके जो उनकी पीठ पर लगी हो या आंतों में हो या हड्डी से मिली हुई हो। यह पाबंदी उनके अत्याचार और सीमा उल्लंघन की सज़ा के रूप में लगाई गई थी। हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया—न हमने उन्हें सज़ा दी बिना किसी कारण के, और न ही हमने उन पर वह चीज़ हराम की जो उनके लिए पाक और हलाल थी। बल्कि वे स्वयं अपनी जानों पर ज़ुल्म करते थे, क्योंकि उन्होंने कुफ़्र, सरकशी और नबियों की नाफ़रमानी के ज़रिए उन कारणों को अख्तियार किया जिनकी वजह से यह सज़ा उन पर लागू हुई। इसलिए यह सज़ा उनके अपने कर्मों का नतीजा थी, न कि हमारी तरफ़ से ज़ुल्म।

फ़ायदे (लाभ):

  1. अल्लाह तआला बिल्कुल न्यायपूर्ण है; वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। जो सज़ा या पाबंदी भी आती है, वह बंदे के अपने कर्मों का परिणाम होती है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम पर कोई मुसीबत या पाबंदी आए, तो पहले अपने आचरण और कर्मों की जाँच करें, क्योंकि असली कारण हमारे अपने किए हुए काम होते हैं।
  3. अल्लाह की रहमत और आसानी की तारीफ़ करनी चाहिए कि उसने हमारे (मुस्लिम उम्मत) पर वे सख्त पाबंदियाँ नहीं लगाईं जो पहले की उम्मतों पर उनकी सरकशी की वजह से लगाई गई थीं। यह हमारे लिए अल्लाह का एहसान है।
  4. इस्लाम दीन-ए-फ़ितरत (प्राकृतिक धर्म) है, जो लोगों पर बोझ नहीं डालता, बल्कि उनकी भलाई और आसानी चाहता है। जबकि पिछली उम्मतों पर उनके अपने कुकर्मों की वजह से सख्तियाँ लगाई गईं।
  5. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह के फ़ैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए और उसकी हर बात में हिकमत (बुद्धिमत्ता) होती है, भले ही हमें वह हिकमत समझ में न आए।
🎧 सुनें

📜 आयत 116-120 — अन-नहल

116وَلَا تَقُولُوا لِمَا تَصِفُ أَلْسِنَتُكُمُ الْكَذِبَ هَٰذَا حَلَالٌ وَهَٰذَا حَرَامٌ لِّتَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ
और झूट मूट जो कुछ तुम्हारी ज़बान पर आए (बे समझे बूझे) न कह बैठा करों कि ये हलाल है और हराम है ताकि इसकी बदौलत ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाँधने लगो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
117مَتَاعٌ قَلِيلٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
(दुनिया में) फायदा तो ज़रा सा है और (आख़िरत में) दर्दनाक अज़ाब है
118وَعَلَى الَّذِينَ هَادُوا حَرَّمْنَا مَا قَصَصْنَا عَلَيْكَ مِن قَبْلُ ۖ وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
और यहूदियों पर हमने वह चीज़े हराम कर दीं थी जो तुमसे पहले बयान कर चुके हैं और हमने तो (इस की वजह से) उन पर कुछ ज़ुल्म नहीं किया
119ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ عَمِلُوا السُّوءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर वह लोग खुद अपने ऊपर सितम तोड़ रहे हैं फिर इसमे शक़ नहीं कि जो लोग नादानी से गुनाह कर बैठे उसके बाद सदक़ दिल से तौबा कर ली और अपने को दुरुस्त कर लिया तो (ऐ रसूल) इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इसके बाद बख्शने वाला मेहरबान है
120إِنَّ إِبْرَاهِيمَ كَانَ أُمَّةً قَانِتًا لِّلَّهِ حَنِيفًا وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
इसमें शक़ नहीं कि इबराहीम (लोगों के) पेशवा ख़ुदा के फरमाबरदार बन्दे और बातिल से कतरा कर चलने वाले थे और मुशरेकीन से हरगिज़ न थे
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Tuesday, August 18, 2026

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