अन-नहल · 14/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَهُوَ الَّذِي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَأْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝١٤
Wa Huwal lazee sakhkharal bahra litaakuloo minhu lahman tariyyanw wa tastakhrijoo minhu hilyatan talbasoonahaa wa taral fulka mawaakhira feehi wa litabtaghoo min fadlihee wa la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानी है और वही (वह ख़ुदा है जिसने दरिया को (भी तुम्हारे) क़ब्ज़े में कर दिया ताकि तुम इसमें से (मछलियों का) ताज़ा ताज़ा गोश्त खाओ और इसमें से जेवर (की चीज़े मोती वगैरह) निकालो जिन को तुम पहना करते हो और तू कश्तियों को देखता है कि (आमद व रफत में) दरिया में (पानी को) चीरती फाड़ती आती है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَخَّرَ: वश में कर दिया, अधीन कर दिया।
  • لَحْمًا طَرِيًّا: ताज़ा और नरम गोश्त (मछली)।
  • حِلْيَةً: आभूषण, गहना (जैसे मोती और मूँगा)।
  • الْفُلْكَ: जहाज़ (बड़ी नावें)।
  • مَوَاخِرَ: पानी को चीरती हुई, समुद्र की लहरों को शिगाफ़्ता (चीरती) हुई चलने वाली।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जिसने समुद्र को तुम्हारे लिए वश में कर दिया है—चाहे वह मीठा हो या खारा—ताकि तुम उससे ताज़ी और नरम मछली का गोश्त खाओ, जो तुम्हारे लिए हलाल और लज़ीज़ भोजन है। और तुम समुद्र से आभूषण (मोती, मूँगा आदि) निकालते हो, जिन्हें तुम पहनते हो और अपनी पत्नियों को भी पहनाते हो। यह अल्लाह की बड़ी नेमत है कि उसने ये चीज़ें समुद्र की गहराई से निकालना तुम्हारे लिए आसान कर दिया।

तुम देखते हो कि बड़े-बड़े जहाज़ समुद्र की लहरों को चीरते हुए चलते हैं—इधर से उधर जाते हैं—और तुम उन पर सवार होकर व्यापार के लिए सफ़र करते हो, ताकि अल्लाह के फ़ज़्ल (रिज़्क़) की तलाश करो और व्यापार से लाभ कमाओ। यह सब कुछ इसलिए है कि तुम अल्लाह के एहसानों को याद करो और उसकी नेमतों के बदले उसका शुक्र अदा करो, और उसकी इबादत में किसी को शरीक न करो।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह की क़ुदरत और एहसान: समुद्र जैसी विशाल और भयानक चीज़ को अल्लाह ने इंसान के लिए वश में कर दिया, ताकि वह उससे फ़ायदा उठाए। यह अल्लाह की असीम शक्ति और इंसान पर उसकी विशेष मेहरबानी का सबूत है।
  2. रिज़्क़ के साधन: अल्लाह ने समुद्र को इंसान के लिए रिज़्क़ का ज़रिया बनाया है—खाने के लिए मछली, पहनने के लिए आभूषण, और व्यापार के लिए जहाज़। यह सिखाता है कि इंसान को मेहनत और तलाश करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ने साधन पैदा कर दिए हैं।
  3. शुक्र का पाठ: जब इंसान इन नेमतों पर ग़ौर करता है, तो उसका दिल अल्लाह के शुक्र से भर जाता है। शुक्र अदा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि अल्लाह की इबादत में एकनिष्ठ रहें और उसके सिवा किसी की पूजा न करें।
  4. दुनिया और आख़िरत का संतुलन: यह आयत दुनिया की जायज़ नेमतों (खाना, पहनना, व्यापार) के इस्तेमाल की इजाज़त देती है, लेकिन साथ ही अल्लाह की याद और शुक्र की तरफ़ बुलाती है। यानी दुनिया का इस्तेमाल करो, लेकिन अल्लाह को भूलकर नहीं।
  5. अल्लाह की नेमतों पर ध्यान: जो इंसान इन नेमतों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की महानता को पहचानता है। यह उसे अच्छे कामों की तरफ़ राग़िब करता है और बुराइयों से दूर रखता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अन-नहल

12وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِأَمْرِهِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
उसी ने तुम्हारे वास्ते रात को और दिन को और सूरज और चाँद को तुम्हारा ताबेए बना दिया है और सितारे भी उसी के हुक्म से (तुम्हारे) फरमाबरदार हैं कुछ शक़ ही नहीं कि (इसमें) समझदार लोगों के वास्ते यक़ीनन (कुदरत खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
13وَمَا ذَرَأَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और जो तरह तरह के रंगों की चीज़े उसमें ज़मीन में तुम्हारे नफे के वास्ते पैदा की
14وَهُوَ الَّذِي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَأْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानी है और वही (वह ख़ुदा है जिसने दरिया को (भी तुम्हारे) क़ब्ज़े में कर दिया ताकि तुम इसमें से (मछलियों का) ताज़ा ताज़ा गोश्त खाओ और इसमें से जेवर (की चीज़े मोती वगैरह) निकालो जिन को तुम पहना करते हो और तू कश्तियों को देखता है कि (आमद व रफत में) दरिया में (पानी को) चीरती फाड़ती आती है
15وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَأَنْهَارًا وَسُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम लोग उसके फज़ल (नफा तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों को गाड़ दिया
16وَعَلَامَاتٍ ۚ وَبِالنَّجْمِ هُمْ يَهْتَدُونَ
ताकि (ऐसा न हों) कि ज़मीन तुम्हें लेकर झुक जाए (और तुम्हारे क़दम न जमें) और (उसी ने) नदियाँ और रास्ते (बनाए)
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अनुवाद — अन-नहल 14

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Tuesday, August 18, 2026

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