Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَخَّرَ: वश में कर दिया, अधीन कर दिया।
- لَحْمًا طَرِيًّا: ताज़ा और नरम गोश्त (मछली)।
- حِلْيَةً: आभूषण, गहना (जैसे मोती और मूँगा)।
- الْفُلْكَ: जहाज़ (बड़ी नावें)।
- مَوَاخِرَ: पानी को चीरती हुई, समुद्र की लहरों को शिगाफ़्ता (चीरती) हुई चलने वाली।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जिसने समुद्र को तुम्हारे लिए वश में कर दिया है—चाहे वह मीठा हो या खारा—ताकि तुम उससे ताज़ी और नरम मछली का गोश्त खाओ, जो तुम्हारे लिए हलाल और लज़ीज़ भोजन है। और तुम समुद्र से आभूषण (मोती, मूँगा आदि) निकालते हो, जिन्हें तुम पहनते हो और अपनी पत्नियों को भी पहनाते हो। यह अल्लाह की बड़ी नेमत है कि उसने ये चीज़ें समुद्र की गहराई से निकालना तुम्हारे लिए आसान कर दिया।
तुम देखते हो कि बड़े-बड़े जहाज़ समुद्र की लहरों को चीरते हुए चलते हैं—इधर से उधर जाते हैं—और तुम उन पर सवार होकर व्यापार के लिए सफ़र करते हो, ताकि अल्लाह के फ़ज़्ल (रिज़्क़) की तलाश करो और व्यापार से लाभ कमाओ। यह सब कुछ इसलिए है कि तुम अल्लाह के एहसानों को याद करो और उसकी नेमतों के बदले उसका शुक्र अदा करो, और उसकी इबादत में किसी को शरीक न करो।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- अल्लाह की क़ुदरत और एहसान: समुद्र जैसी विशाल और भयानक चीज़ को अल्लाह ने इंसान के लिए वश में कर दिया, ताकि वह उससे फ़ायदा उठाए। यह अल्लाह की असीम शक्ति और इंसान पर उसकी विशेष मेहरबानी का सबूत है।
- रिज़्क़ के साधन: अल्लाह ने समुद्र को इंसान के लिए रिज़्क़ का ज़रिया बनाया है—खाने के लिए मछली, पहनने के लिए आभूषण, और व्यापार के लिए जहाज़। यह सिखाता है कि इंसान को मेहनत और तलाश करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ने साधन पैदा कर दिए हैं।
- शुक्र का पाठ: जब इंसान इन नेमतों पर ग़ौर करता है, तो उसका दिल अल्लाह के शुक्र से भर जाता है। शुक्र अदा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि अल्लाह की इबादत में एकनिष्ठ रहें और उसके सिवा किसी की पूजा न करें।
- दुनिया और आख़िरत का संतुलन: यह आयत दुनिया की जायज़ नेमतों (खाना, पहनना, व्यापार) के इस्तेमाल की इजाज़त देती है, लेकिन साथ ही अल्लाह की याद और शुक्र की तरफ़ बुलाती है। यानी दुनिया का इस्तेमाल करो, लेकिन अल्लाह को भूलकर नहीं।
- अल्लाह की नेमतों पर ध्यान: जो इंसान इन नेमतों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की महानता को पहचानता है। यह उसे अच्छे कामों की तरफ़ राग़िब करता है और बुराइयों से दूर रखता है।
📜 आयत 12-16 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 14
सूरा अन-नहल आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल…सूरा आयत 14/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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