अन-नहल · 15/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَأَنْهَارًا وَسُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ ۝١٥
Wa alqaa fil ardi rawaasiya an tameeda bikum wa anhaaranw wa sublulal la `allakum tahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम लोग उसके फज़ल (नफा तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों को गाड़ दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَوَاسِيَ (रवासी): पहाड़, जो धरती को मज़बूती से जमाए रखते हैं।
  • أَن تَمِيدَ (अन तमीद): ताकि वह (धरती) डगमगाए नहीं, हिले-डुले नहीं।
  • أَنْهَارًا (अन्हारन): नदियाँ और जल-स्रोत।
  • سُبُلًا (सुबुलन): रास्ते, मार्ग।
  • تَهْتَدُونَ (तह्तदून): मार्गदर्शन पाना, सही रास्ता पाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी असीम क़ुदरत से इस धरती को इस तरह बनाया है कि यहाँ इंसानों का जीवन आसानी से गुज़र सके। उसने धरती पर भारी-भारी पहाड़ों को गाड़ दिया, ताकि यह धरती अपनी जगह से हिले-डुले नहीं और तुम्हारे साथ डगमगाकर तुम्हें तकलीफ़ में न डाले। ये पहाड़ खूँटों की तरह हैं जो धरती को जमाए हुए हैं।

इसके बाद अल्लाह ने धरती में नदियाँ जारी कीं, ताकि तुम उनसे पानी पी सको, अपने जानवरों को पिला सको और अपनी खेती-बाड़ी को सींच सको। ये नदियाँ तुम्हारे लिए रहमत और ज़िन्दगी का ज़रिया हैं।

फिर अल्लाह ने धरती में रास्ते बनाए — पहाड़ों की घाटियों में, मैदानों में, शहरों और गाँवों के बीच — ताकि तुम एक जगह से दूसरी जगह आ-जा सको, अपनी ज़रूरतें पूरी कर सको और भटको नहीं। ये रास्ते तुम्हें तुम्हारी मंज़िल तक पहुँचाते हैं।

यह सब कुछ अल्लाह ने इसलिए किया ताकि तुम उसकी नेमतों को पहचानो, उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करो और सीधे रास्ते पर चलो — न सिर्फ़ ज़मीनी रास्तों पर, बल्कि हिदायत के रास्ते पर भी, ताकि तुम अपने रब की इबादत करो और उसका शुक्र अदा करो।


फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ: यह आयत हमें बताती है कि धरती का स्थिर रहना, पहाड़ों का जमना, नदियों का बहना और रास्तों का बनना — ये सब अल्लाह के इंतज़ाम के नमूने हैं। जो इंसान इन पर ग़ौर करे, वह अपने रब की अज़मत को पहचानता है।
  2. शुक्रगुज़ारी का पैग़ाम: जब हम देखते हैं कि अल्लाह ने हमारे लिए ये सब सुविधाएँ जुटाई हैं, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करना चाहिए।
  3. हिदायत की ओर इशारा: जिस तरह अल्लाह ने ज़मीनी रास्ते बनाए ताकि इंसान भटके नहीं, उसी तरह उसने कुरआन और नबी ﷺ के ज़रिए हिदायत का रास्ता भी दिखाया है। यह आयत हमें तरग़ीब देती है कि हम अपनी ज़िन्दगी के सफ़र में अल्लाह की बताई हुई राह पर चलें।
  4. तवक्कुल और यक़ीन: जब हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह ने धरती को हमारे लिए आरामदेह बनाया है, तो हमारा दिल उस पर भरोसा करता है और हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर ज़रूरत का ख़याल रखने वाला है।
  5. इंसान की कमज़ोरी और अल्लाह की मेहरबानी: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान ख़ुद कुछ नहीं कर सकता, बल्कि अल्लाह की मेहरबानी से ही उसे हर सुविधा मिलती है। इसलिए हमें उसी के आगे सर झुकाना चाहिए।


📜 आयत 13-17 — अन-नहल

13وَمَا ذَرَأَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और जो तरह तरह के रंगों की चीज़े उसमें ज़मीन में तुम्हारे नफे के वास्ते पैदा की
14وَهُوَ الَّذِي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَأْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
कुछ शक़ नहीं कि इसमें भी इबरत व नसीहत हासिल करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानी है और वही (वह ख़ुदा है जिसने दरिया को (भी तुम्हारे) क़ब्ज़े में कर दिया ताकि तुम इसमें से (मछलियों का) ताज़ा ताज़ा गोश्त खाओ और इसमें से जेवर (की चीज़े मोती वगैरह) निकालो जिन को तुम पहना करते हो और तू कश्तियों को देखता है कि (आमद व रफत में) दरिया में (पानी को) चीरती फाड़ती आती है
15وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَأَنْهَارًا وَسُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम लोग उसके फज़ल (नफा तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों को गाड़ दिया
16وَعَلَامَاتٍ ۚ وَبِالنَّجْمِ هُمْ يَهْتَدُونَ
ताकि (ऐसा न हों) कि ज़मीन तुम्हें लेकर झुक जाए (और तुम्हारे क़दम न जमें) और (उसी ने) नदियाँ और रास्ते (बनाए)
17أَفَمَن يَخْلُقُ كَمَن لَّا يَخْلُقُ ۗ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
ताकि तुम (अपनी अपनी मंज़िले मक़सूद तक पहुँचों (उसके अलावा रास्तों में) और बहुत सी निशानियाँ (पैदा की हैं) और बहुत से लोग सितारे से भी राह मालूम करते हैं
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अनुवाद — अन-नहल 15

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Tuesday, August 18, 2026

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