अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَوَاسِيَ (रवासी): पहाड़, जो धरती को मज़बूती से जमाए रखते हैं।
- أَن تَمِيدَ (अन तमीद): ताकि वह (धरती) डगमगाए नहीं, हिले-डुले नहीं।
- أَنْهَارًا (अन्हारन): नदियाँ और जल-स्रोत।
- سُبُلًا (सुबुलन): रास्ते, मार्ग।
- تَهْتَدُونَ (तह्तदून): मार्गदर्शन पाना, सही रास्ता पाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी असीम क़ुदरत से इस धरती को इस तरह बनाया है कि यहाँ इंसानों का जीवन आसानी से गुज़र सके। उसने धरती पर भारी-भारी पहाड़ों को गाड़ दिया, ताकि यह धरती अपनी जगह से हिले-डुले नहीं और तुम्हारे साथ डगमगाकर तुम्हें तकलीफ़ में न डाले। ये पहाड़ खूँटों की तरह हैं जो धरती को जमाए हुए हैं।
इसके बाद अल्लाह ने धरती में नदियाँ जारी कीं, ताकि तुम उनसे पानी पी सको, अपने जानवरों को पिला सको और अपनी खेती-बाड़ी को सींच सको। ये नदियाँ तुम्हारे लिए रहमत और ज़िन्दगी का ज़रिया हैं।
फिर अल्लाह ने धरती में रास्ते बनाए — पहाड़ों की घाटियों में, मैदानों में, शहरों और गाँवों के बीच — ताकि तुम एक जगह से दूसरी जगह आ-जा सको, अपनी ज़रूरतें पूरी कर सको और भटको नहीं। ये रास्ते तुम्हें तुम्हारी मंज़िल तक पहुँचाते हैं।
यह सब कुछ अल्लाह ने इसलिए किया ताकि तुम उसकी नेमतों को पहचानो, उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करो और सीधे रास्ते पर चलो — न सिर्फ़ ज़मीनी रास्तों पर, बल्कि हिदायत के रास्ते पर भी, ताकि तुम अपने रब की इबादत करो और उसका शुक्र अदा करो।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ: यह आयत हमें बताती है कि धरती का स्थिर रहना, पहाड़ों का जमना, नदियों का बहना और रास्तों का बनना — ये सब अल्लाह के इंतज़ाम के नमूने हैं। जो इंसान इन पर ग़ौर करे, वह अपने रब की अज़मत को पहचानता है।
- शुक्रगुज़ारी का पैग़ाम: जब हम देखते हैं कि अल्लाह ने हमारे लिए ये सब सुविधाएँ जुटाई हैं, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करना चाहिए।
- हिदायत की ओर इशारा: जिस तरह अल्लाह ने ज़मीनी रास्ते बनाए ताकि इंसान भटके नहीं, उसी तरह उसने कुरआन और नबी ﷺ के ज़रिए हिदायत का रास्ता भी दिखाया है। यह आयत हमें तरग़ीब देती है कि हम अपनी ज़िन्दगी के सफ़र में अल्लाह की बताई हुई राह पर चलें।
- तवक्कुल और यक़ीन: जब हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह ने धरती को हमारे लिए आरामदेह बनाया है, तो हमारा दिल उस पर भरोसा करता है और हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर ज़रूरत का ख़याल रखने वाला है।
- इंसान की कमज़ोरी और अल्लाह की मेहरबानी: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान ख़ुद कुछ नहीं कर सकता, बल्कि अल्लाह की मेहरबानी से ही उसे हर सुविधा मिलती है। इसलिए हमें उसी के आगे सर झुकाना चाहिए।
📜 आयत 13-17 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 15
सूरा अन-नहल आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम…सूरा आयत 15/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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