Wa laa tashtaroo bi `ahdil laahi samanan qaleelaa; innamaa `indal laahi huwa khairul lakum in kuntum ta`lamoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा के एहदो पैमान के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी नफा) न लो अगर तुम जानते (बूझते) हो तो (समझ लो कि) जो कुछ ख़ुदा के पास है वह उससे कहीं बेहतर है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور خدا سے جو تم نے عہد کیا ہے (اس کو مت بیچو اور) اس کے بدلے تھوڑی سی قیمت نہ لو۔ (کیونکہ ایفائے عہد کا) جو صلہ خدا کے ہاں مقرر ہے وہ اگر سمجھو تو تمہارے لیے بہتر ہے
ثمنًا قليلًا: थोड़ा सा मूल्य, यानी दुनिया का थोड़ा सा फायदा।
عند الله: अल्लाह के पास जो (बदला) है।
خير لكم: तुम्हारे लिए बेहतर है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि वे उसके वचन (अहद) को तोड़कर दुनिया का थोड़ा सा माल हासिल न करें। यानी जो लोग अल्लाह से किया हुआ वादा (जैसे ईमान, इबादत, या आपसी अहद) तोड़कर दुनिया का कोई मामूली फायदा पाना चाहते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि यह बहुत बुरा सौदा है। अल्लाह के पास जो बदला और इनाम है—चाहे वह दुनिया में मदद और कामयाबी हो या आख़िरत में जन्नत की नेमतें—वह इस थोड़े से दुनियावी फायदे से कहीं बेहतर और बड़ा है। अगर लोगों को सच्चा ज्ञान होता, तो वे इन दोनों चीज़ों के बीच फर्क को समझते और उस चीज़ को चुनते जो उनके लिए हमेशा रहने वाली भलाई है। यह आयत उन लोगों के बारे में भी है जो अपने वादों को तोड़कर दुनिया का मामूली सामान हासिल करते हैं, और उन्हें याद दिलाती है कि अल्लाह के पास जो कुछ है वही सच्चा और बेहतर है।
फ़ायदे (निष्कर्ष):
वादे की पवित्रता: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह से किया गया वादा (चाहे वह ईमान का हो या आपसी अहद का) बहुत पवित्र है। उसे तोड़ना बड़ा गुनाह है और दुनिया का कोई फायदा इसके बदले में नहीं लेना चाहिए।
दुनिया की क़ीमत: दुनिया का माल और फायदा बहुत थोड़ा और फ़ानी है। इसे हासिल करने के लिए अपने ईमान या वादे को बेचना बुद्धिमानी नहीं है।
आख़िरत की बेहतरी: अल्लाह के पास जो इनाम है—चाहे दुनिया में कामयाबी हो या आख़िरत में जन्नत—वह हर दुनियावी चीज़ से बेहतर है। मोमिन को हमेशा आख़िरत की भलाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ज्ञान की अहमियत: जो लोग सच्चा ज्ञान रखते हैं, वे दुनिया और आख़िरत के फर्क को समझते हैं और सही चुनाव करते हैं। ज्ञान इंसान को सही रास्ते पर चलाता है।
अल्लाह पर भरोसा: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें। जो चीज़ अल्लाह के पास है वह कभी खत्म नहीं होती, जबकि दुनिया की चीज़ें कुछ दिनों के लिए हैं।
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको एक ही (किस्म के) गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसकी चाहता है हिदायत करता है और जो कुछ तुम लोग दुनिया में किया करते थे उसकी बाज़ पुर्स (पुछ गछ) तुमसे ज़रुर की जाएगी
और तुम अपनी क़समों को आपस में के फसाद का सबब न बनाओ ताकि (लोगों के) क़दम जमने के बाद (इस्लाम से) उखड़ जाएँ और फिर आख़िरकार क़यामत में तुम्हें लोगों को ख़ुदा की राह से रोकने की पादाश (रोकने के बदले) में अज़ाब का मज़ा चखना पड़े और तुम्हारे वास्ते बड़ा सख्त अज़ाब हो
(क्योंकि माल दुनिया से) जो कुछ तुम्हारे पास है एक न एक दिन ख़त्म हो जाएगा और (अज्र) ख़ुदा के पास है वह हमेशा बाक़ी रहेगा और जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया था उनको (क़यामत में) उनके कामों का हम अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता करेंगें
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
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