अल-इसरा · 108/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَيَقُولُونَ سُبْحَانَ رَبِّنَا إِن كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولًا ۝١٠٨
Wa yaqooloona Subhaana Rabbinaaa in kaana wa`du Rabbinaa lamaf`oolaa
📖 हिंदी अर्थ
और कहते हैं कि हमारा परवरदिगार (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक हमारे परवरदिगार का वायदा पूरा होना ज़रुरी था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سُبْحَانَ رَبِّنَا: हमारे रब की पाकी बयान करते हैं, उसे हर कमी और दोष से मुक्त कहते हैं।
  • إِن كَانَ: निश्चय ही (यहाँ "كان" का प्रयोग ताकीद के लिए हुआ है)।
  • لَمَفْعُولًا: अवश्य होने वाला, पूरा होकर रहने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब ये सच्चे ज्ञान वाले लोग क़ुरआन की आयात सुनते हैं, तो वे सजदे में गिर जाते हैं और अपने रब की पाकी बयान करते हुए कहते हैं: "हमारा रब हर उस चीज़ से पाक है जो मुशरिकीन उसके बारे में कहते हैं। वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता।" वे यह भी गवाही देते हैं कि अल्लाह का वादा—चाहे वह सज़ा का हो या इनाम का, चाहे क़यामत का हो या नबी के आने का—अवश्य पूरा होकर रहेगा। इसमें कोई शक नहीं कि अल्लाह का हर वादा सच्चा है और उसका पूरा होना लाज़िमी है।

ये लोग अपने रब की तारीफ़ करते हुए उसकी बड़ाई बयान करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी आँखों से देख लिया कि अल्लाह का वादा सच्चा है। वे जानते हैं कि जिस रब ने यह क़ुरआन उतारा है, वह अपने बंदों से कभी झूठा वादा नहीं करता। इसलिए वे सजदे में जाकर उसकी तारीफ़ करते हैं और उसकी पाकी बयान करते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं और उसकी आयात सुनते हैं, तो हमारा दिल नरम होना चाहिए और हमें सजदे में झुक जाना चाहिए। अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता—चाहे वह जन्नत का वादा हो या जहन्नम की चेतावनी। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह के वादे पर यक़ीन करे और उसके आगे सर झुकाए। जो लोग अल्लाह के वादे पर भरोसा करते हैं, वे कभी निराश नहीं होते और उनकी ज़िंदगी में सुकून और इत्मिनान होता है। आइए, हम भी इन नेक बंदों की तरह अल्लाह की पाकी बयान करें और उसके वादों पर पूरा भरोसा रखें।

🎧 सुनें

📜 आयत 106-110 — अल-इसरा

106وَقُرْآنًا فَرَقْنَاهُ لِتَقْرَأَهُ عَلَى النَّاسِ عَلَىٰ مُكْثٍ وَنَزَّلْنَاهُ تَنزِيلًا
और क़ुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके इसलिए नाज़िल किया कि तुम लोगों के सामने (ज़रुरत पड़ने पर) मोहलत दे देकर उसको पढ़ दिया करो
107قُلْ آمِنُوا بِهِ أَوْ لَا تُؤْمِنُوا ۚ إِنَّ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهِ إِذَا يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ يَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ سُجَّدًا
और (इसी वजह से) हमने उसको रफ्ता रफ्ता नाज़िल किया तुम कह दो कि ख्वाह तुम इस पर ईमान लाओ या न लाओ इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों को उसके क़ब्ल ही (आसमानी किताबों का इल्म अता किया गया है उनके सामने जब ये पढ़ा जाता है तो ठुडडियों से (मुँह के बल) सजदे में गिर पड़तें हैं
108وَيَقُولُونَ سُبْحَانَ رَبِّنَا إِن كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولًا
और कहते हैं कि हमारा परवरदिगार (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक हमारे परवरदिगार का वायदा पूरा होना ज़रुरी था
109وَيَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ يَبْكُونَ وَيَزِيدُهُمْ خُشُوعًا ۩
और ये लोग (सजदे के लिए) मुँह के बल गिर पड़तें हैं और रोते चले जाते हैं और ये क़ुरान उन की ख़ाकसारी के बढ़ाता जाता है (109) (सजदा)
110قُلِ ادْعُوا اللَّهَ أَوِ ادْعُوا الرَّحْمَٰنَ ۖ أَيًّا مَّا تَدْعُوا فَلَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ ۚ وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتْ بِهَا وَابْتَغِ بَيْنَ ذَٰلِكَ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (तुम को एख़तियार है) ख्वाह उसे अल्लाह (कहकर) पुकारो या रहमान कह कर पुकारो (ग़रज़) जिस नाम को भी पुकारो उसके तो सब नाम अच्छे (से अच्छे) हैं और (ऐ रसूल) न तो अपनी नमाज़ बहुत चिल्ला कर पढ़ो न और न बिल्कुल चुपके से बल्कि उसके दरमियान एक औसत तरीका एख्तेयार कर लो
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
108आयत

अनुवाद — अल-इसरा 108

सूरा अल-इसरा आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहते हैं कि हमारा परवरदिगार (हर ऐब से) पाक…

सूरा आयत 108/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए