अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نُّمِدُّ: हम बढ़ाते हैं, लगातार देते हैं।
- مِنْ عَطَاءِ رَبِّكَ: अपने रब की ओर से दी गई देन (रोज़ी)।
- مَحْظُورًا: रोका हुआ, वर्जित, बंद किया हुआ।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की उस व्यापक कृपा और दया को बयान करती है जो वह अपने सभी बंदों पर करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम दोनों प्रकार के लोगों को—चाहे वे दुनिया के लिए काम करने वाले हों या आख़िरत के लिए—अपनी ओर से लगातार रोज़ी और सहारा देते रहते हैं। यह देन और रोज़ी अल्लाह की ओर से है, जो वह अपने रसूल ﷺ के रब की ओर से सभी को प्रदान करता है। यह देन किसी के लिए रोकी नहीं गई है, न किसी ईमान वाले के लिए और न किसी काफ़िर के लिए। अल्लाह तआला अपनी दया और उदारता से सभी को दुनिया में रोज़ी देता है, चाहे वह नेक हो या बदकार। यह अल्लाह की ओर से एक एहसान है जो वह सभी इंसानों पर करता है, बिना किसी भेदभाव के। दुनिया में अल्लाह की रोज़ी और उसकी देन सभी के लिए खुली है, लेकिन आख़िरत की सफलता और अल्लाह की विशेष रहमत केवल उन्हीं के लिए है जो ईमान लाए और नेक कर्म करें।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अत्यंत दयालु और उदार है। वह अपने बंदों को रोज़ी देने में कोई कंजूसी नहीं करता, चाहे वे उसके आज्ञाकारी हों या नाफ़रमान।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की रोज़ी और साधनों का मिलना अल्लाह की निकटता या उसकी ख़ुशी का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की सामान्य दया है जो सभी को मिलती है। असली कामयाबी आख़िरत की सफलता है।
- इस आयत से मुसलमानों को यह सबक मिलता है कि उन्हें अपने रब की देन पर संतोष करना चाहिए और यह नहीं सोचना चाहिए कि अल्लाह ने किसी को ज़्यादा दिया और किसी को कम। अल्लाह की देन में हिकमत है, और वह हर चीज़ से बाख़बर है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने दिलों से ईर्ष्या और जलन को निकालना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की रोज़ी उसकी ओर से है और वह जिसे चाहता है उसे देता है। हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए, न कि दूसरों के पास मौजूद चीज़ों पर।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह तआला की रहमत और दया इतनी विशाल है कि वह अपने दुश्मनों को भी दुनिया में रोज़ी देता है। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने दुश्मनों के साथ नेकी और भलाई का व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह तो सभी के साथ भलाई करता है।
📜 आयत 18-22 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 20
सूरा अल-इसरा आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) उनको (ग़रज़ सबको) हम ही तुम्हारे परवरदिगार की…सूरा आयत 20/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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