अल-इसरा · 21/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
انظُرْ كَيْفَ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ وَلَلْآخِرَةُ أَكْبَرُ دَرَجَاتٍ وَأَكْبَرُ تَفْضِيلًا ۝٢١
Unzur kaifa faddalnaa ba`dahum `alaa ba`d; wa lal Aakhiratu akbaru darajaatinw wa akbaru tafdeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि हमने बाज़ लोगों को बाज़ पर कैसी फज़ीलत दी है और आख़िरत के दर्जे तो यक़ीनन (यहाँ से) कहीं बढ़के है और वहाँ की फज़ीलत भी तो कैसी बढ़ कर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انْظُرْ: ध्यान से देखो, विचार करो।
  • فَضَّلْنَا: हमने श्रेष्ठता दी, बढ़त दी।
  • وَلَلْآخِرَةُ: और निश्चित रूप से आख़िरत (परलोक)।
  • أَكْبَرُ دَرَجَاتٍ: बहुत बड़े दर्जों वाली।
  • أَكْبَرُ تَفْضِيلًا: बहुत बड़ी श्रेष्ठता और बढ़त वाली।

व्याख्या:

ऐ नबी! आप ध्यान से देखिए कि हमने लोगों को आपस में किस तरह अलग-अलग दर्जे दिए हैं। दुनिया में हमने किसी को अधिक धन दिया, किसी को कम; किसी को ऊँचा पद दिया, किसी को नीचा; किसी को स्वास्थ्य और ताकत दी, किसी को कमज़ोरी। यह सब हमारी इच्छा और हिकमत से है। यहाँ कुछ लोग दुनिया की जल्दबाज़ी वाली चीज़ें चाहते हैं और कुछ आख़िरत की भलाई चाहते हैं, और हमने हर एक को उसकी नीयत और कर्म के अनुसार दुनिया में भी दिया है।

लेकिन याद रखो — आख़िरत का फ़र्क़ और दर्जों का अंतर इस दुनिया के फ़र्क़ से कहीं बड़ा और गहरा है। दुनिया की ऊँच-नीच तो कुछ दिनों की है, मगर आख़िरत में मोमिनों के लिए जो दर्जे हैं — जन्नत की ऊँचाइयाँ और उसके स्तर — वे इतने ऊँचे हैं कि उनका कोई मुक़ाबला नहीं। वहाँ की श्रेष्ठता और बढ़त दुनिया की किसी भी बढ़त से कहीं अधिक बड़ी है। जिसने दुनिया में केवल दुनिया के लिए काम किया, उसे उसकी मज़दूरी दुनिया में मिल गई; और जिसने आख़िरत के लिए काम किया, उसके लिए आख़िरत में ऐसे दर्जे हैं जिनकी कोई अंतिम सीमा नहीं।


फ़ायदे (सीख):

  1. दुनिया में लोगों के बीच अंतर होना अल्लाह की हिकमत है — यह उसकी रचना का हिस्सा है। इससे न तो किसी को घमंड करना चाहिए और न ही किसी को निराश होना चाहिए।
  2. असली कामयाबी और असली बड़ाई आख़िरत में है। दुनिया की चमक-दमक और ऊँचाईयाँ कुछ दिनों की हैं, लेकिन आख़िरत के दर्जे हमेशा के लिए हैं।
  3. यह आयत मोमिन को यह सिखाती है कि वह अपनी नज़रें ऊँची रखे — आख़िरत की तरफ़ देखे, क्योंकि वहीं असली इज़्ज़त और कामयाबी है। दुनिया की छोटी-छोटी बातों में उलझकर अपनी आख़िरत को ख़राब न करे।
  4. अल्लाह ने हर इंसान को अलग-अलग काबिलियतें दी हैं — इसका मतलब यह है कि हर कोई अपनी जगह पर अल्लाह की इबादत और भलाई के काम करे, और अपने हिस्से की भलाई दूसरों तक पहुँचाए।


📜 आयत 19-23 — सूरा अल-इसरा

19وَمَنْ أَرَادَ الْآخِرَةَ وَسَعَىٰ لَهَا سَعْيَهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ كَانَ سَعْيُهُم مَّشْكُورًا
और जो शख़्श आख़िर का मुतमइनी हो और उसके लिए खूब जैसी चाहिए कोशिश भी की और वह ईमानदार भी है तो यही वह लोग हैं जिनकी कोशिश मक़बूल होगी
20كُلًّا نُّمِدُّ هَٰؤُلَاءِ وَهَٰؤُلَاءِ مِنْ عَطَاءِ رَبِّكَ ۚ وَمَا كَانَ عَطَاءُ رَبِّكَ مَحْظُورًا
(ऐ रसूल) उनको (ग़रज़ सबको) हम ही तुम्हारे परवरदिगार की (अपनी) बख़्शिस से मदद देते हैं और तुम्हारे परवरदिगार की बख़्शिस तो (आम है) किसी पर बन्द नहीं
21انظُرْ كَيْفَ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ وَلَلْآخِرَةُ أَكْبَرُ دَرَجَاتٍ وَأَكْبَرُ تَفْضِيلًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि हमने बाज़ लोगों को बाज़ पर कैसी फज़ीलत दी है और आख़िरत के दर्जे तो यक़ीनन (यहाँ से) कहीं बढ़के है और वहाँ की फज़ीलत भी तो कैसी बढ़ कर है
22لَّا تَجْعَلْ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ فَتَقْعُدَ مَذْمُومًا مَّخْذُولًا
और देखो कहीं ख़ुदा के साथ दूसरे को (उसका) शरीक न बनाना वरना तुम बुरे हाल में ज़लील रुसवा बैठै के बैठें रह जाओगे
23۞ وَقَضَىٰ رَبُّكَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا ۚ إِمَّا يَبْلُغَنَّ عِندَكَ الْكِبَرَ أَحَدُهُمَا أَوْ كِلَاهُمَا فَلَا تَقُل لَّهُمَا أُفٍّ وَلَا تَنْهَرْهُمَا وَقُل لَّهُمَا قَوْلًا كَرِيمًا
और तुम्हारे परवरदिगार ने तो हुक्म ही दिया है कि उसके सिवा किसी दूसरे की इबादत न करना और माँ बाप से नेकी करना अगर उनमें से एक या दोनों तेरे सामने बुढ़ापे को पहुँचे (और किसी बात पर खफा हों) तो (ख़बरदार उनके जवाब में उफ तक) न कहना और न उनको झिड़कना और जो कुछ कहना सुनना हो तो बहुत अदब से कहा करो
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अनुवाद — अल-इसरा 21

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Saturday, October 3, 2026

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