अल-इसरा · 99/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
۞ أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ قَادِرٌ عَلَىٰ أَن يَخْلُقَ مِثْلَهُمْ وَجَعَلَ لَهُمْ أَجَلًا لَّا رَيْبَ فِيهِ فَأَبَى الظَّالِمُونَ إِلَّا كُفُورًا ۝٩٩
Awalam yaraw annal laahal lazee khalaqas samaawaati wal arda qaadirun `alaaa any yakhluqa mislahum wa ja`ala lahum ajalal laa raiba fee; fa abaz zaalimoona illaa kufooraa
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने इस पर भी नहीं ग़ौर किया कि वह ख़ुदा जिसने सारे आसमान और ज़मीन बनाए इस पर भी (ज़रुर) क़ादिर है कि उनके ऐसे आदमी दोबारा पैदा करे और उसने उन (की मौत) की एक मियाद मुक़र्रर कर दी है जिसमें ज़रा भी शक़ नहीं उस पर भी ये ज़ालिम इन्कार किए बग़ैर न रहे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوَلَمْ يَرَوْا: क्या उन्होंने देखा नहीं / क्या उन्हें ज्ञान नहीं?
  • قَادِرٌ: सामर्थ्य रखने वाला
  • مِثْلَهُمْ: उनके जैसा (दोबारा पैदा करना)
  • أَجَلًا: एक निश्चित समय / अवधि
  • لَا رَيْبَ فِيهِ: जिसमें कोई संदेह नहीं
  • فَأَبَى: इनकार किया / मना कर दिया
  • كُفُورًا: अत्यधिक इनकार और कृतघ्नता

तफसीर (व्याख्या):

क्या इन मुशरिकों ने देखा और समझा नहीं कि जिस अल्लाह ने इन विशाल आकाशों और धरती को बिना किसी पूर्व नमूने के पैदा किया है, वह निश्चित रूप से उन्हें दोबारा पैदा करने की पूरी शक्ति रखता है? जिसने इतनी महान और विशाल रचनाएँ बनाईं, क्या वह इन कमज़ोर इंसानों को दोबारा जीवित करने से असमर्थ होगा? यह सोचना ही अज्ञानता और मूर्खता है।

अल्लाह ने इन लोगों के लिए एक निश्चित समय निर्धारित कर दिया है — उनकी मृत्यु का समय और क़यामत का दिन — जिसके आने में कोई संदेह नहीं। यह वादा सत्य है और अवश्य पूरा होगा। इसके बावजूद, ये ज़ालिम लोग अपनी ज़िद और हठधर्मी पर अड़े हुए हैं, और स्पष्ट प्रमाणों के सामने आने के बाद भी केवल इनकार और कृतघ्नता ही दिखाते हैं।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) पर गहराई से विचार करने की शिक्षा देती है। जिस रब ने इस विशाल ब्रह्मांड को बनाया, उसके लिए हमें दोबारा जीवित करना क्या मुश्किल है? यह उसके लिए उतना ही आसान है जितना किसी चीज़ का पहली बार पैदा करना।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह ने हर चीज़ के लिए एक समय निर्धारित किया है। हमारी ज़िंदगी की मोहलत भी समाप्त होने वाली है। इसलिए हमें चाहिए कि इस जीवन को ग़लत रास्ते पर बर्बाद न करें, बल्कि अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हुए उस दिन के लिए तैयारी करें जब हम उसके सामने खड़े होंगे।

अल्लाह की रहमत और दया असीम है — उसने हमें जीवन दिया, हमें सुनने, देखने और समझने की शक्तियाँ दीं, और हमें सही रास्ता दिखाने के लिए किताबें और रसूल भेजे। क्या हमें इन अनगिनत नेमतों के बाद भी उसका इनकार करना चाहिए? नहीं! हमें चाहिए कि हम अपने रब की नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी ओर पूरे दिल से झुकें। यही हमारी सफलता और कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 97-101 — अल-इसरा

97وَمَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِ ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُمْ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِهِ ۖ وَنَحْشُرُهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ عُمْيًا وَبُكْمًا وَصُمًّا ۖ مَّأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ كُلَّمَا خَبَتْ زِدْنَاهُمْ سَعِيرًا
और ख़ुदा जिसकी हिदायत करे वही हिदायत याफता है और जिसको गुमराही में छोड़ दे तो (याद रखो कि) फिर उसके सिवा किसी को उसका सरपरस्त न पाआगे और क़यामत के दिन हम उन लोगों का मुँह के बल औंधे और गूँगें और बहरे क़ब्रों से उठाएँगें उनका ठिकाना जहन्नुम है कि जब कभी बुझने को होगी तो हम उन लोगों पर (उसे) और भड़का देंगे
98ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُم بِأَنَّهُمْ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا وَقَالُوا أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَدِيدًا
ये सज़ा उनकी इस वज़ह से है कि उन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगे कि जब हम (मरने के बाद सड़ गल) कर हड्डियाँ और रेज़ा रेज़ा हो जाएँगीं तो क्या फिर हम नये सिरे से पैदा करके उठाए जाएँगें
99۞ أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ قَادِرٌ عَلَىٰ أَن يَخْلُقَ مِثْلَهُمْ وَجَعَلَ لَهُمْ أَجَلًا لَّا رَيْبَ فِيهِ فَأَبَى الظَّالِمُونَ إِلَّا كُفُورًا
क्या उन लोगों ने इस पर भी नहीं ग़ौर किया कि वह ख़ुदा जिसने सारे आसमान और ज़मीन बनाए इस पर भी (ज़रुर) क़ादिर है कि उनके ऐसे आदमी दोबारा पैदा करे और उसने उन (की मौत) की एक मियाद मुक़र्रर कर दी है जिसमें ज़रा भी शक़ नहीं उस पर भी ये ज़ालिम इन्कार किए बग़ैर न रहे
100قُل لَّوْ أَنتُمْ تَمْلِكُونَ خَزَائِنَ رَحْمَةِ رَبِّي إِذًا لَّأَمْسَكْتُمْ خَشْيَةَ الْإِنفَاقِ ۚ وَكَانَ الْإِنسَانُ قَتُورًا
(ऐ रसूल) इनसे कहो कि अगर मेरे परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने भी तुम्हारे एख़तियार में होते तो भी तुम खर्च हो जाने के डर से (उनको) बन्द रखते और आदमी बड़ा ही तंग दिल है
101وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَىٰ تِسْعَ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۖ فَاسْأَلْ بَنِي إِسْرَائِيلَ إِذْ جَاءَهُمْ فَقَالَ لَهُ فِرْعَوْنُ إِنِّي لَأَظُنُّكَ يَا مُوسَىٰ مَسْحُورًا
और हमने यक़ीनन मूसा को खुले हुए नौ मौजिज़े अता किए तो (ऐ रसूल) बनी इसराईल से (यही) पूछ देखो कि जब मूसा उनके पास आए तो फिरऔन ने उनसे कहा कि ऐ मूसा मै तो समझता हूँ कि किसी ने तुम पर जादू करके दीवाना बना दिया है
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अनुवाद — अल-इसरा 99

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Tuesday, August 18, 2026

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