अल-इसरा · 98/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُم بِأَنَّهُمْ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا وَقَالُوا أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَدِيدًا ۝٩٨
Zaalika jazaa`uhum biannahum kafaroo bi aayaatinaa wa qaalooo `a izaa kunnaa `izaamanw wa rufaatan`a innaa lamaboosoona khalqan jadeedaa
📖 हिंदी अर्थ
ये सज़ा उनकी इस वज़ह से है कि उन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगे कि जब हम (मरने के बाद सड़ गल) कर हड्डियाँ और रेज़ा रेज़ा हो जाएँगीं तो क्या फिर हम नये सिरे से पैदा करके उठाए जाएँगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عِظَامًا (हड्डियाँ): यानी जब हम मरकर हड्डियाँ बन जाएँगे।
  • رُفَاتًا (चूर-चूर / राख): यानी टुकड़े-टुकड़े होकर मिट्टी में मिल जाएँगे।
  • لَمَبْعُوثُونَ (दोबारा उठाए जाने वाले): यानी क़ब्रों से जीवित करके उठाए जाएँगे।
  • خَلْقًا جَدِيدًا (नई सृष्टि): यानी बिल्कुल नए सिरे से पैदा किए जाएँगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) के बारे में है जो आख़िरत (परलोक) और क़ियामत के दिन को नहीं मानते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह जो अज़ाब (यातना) और सज़ा है, यह उनका बदला है, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की आयतों और उसकी निशानियों को झुठलाया। उन्होंने अल्लाह के रसूलों की दावत को कबूल नहीं किया और उन आयतों को नकार दिया जो उनके पास अल्लाह की तरफ से आईं।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब हम मर जाएँगे और हमारी हड्डियाँ सड़-गलकर चूर-चूर हो जाएँगी और मिट्टी में मिल जाएँगी, तो क्या हमें दोबारा नई सृष्टि के रूप में जीवित करके उठाया जाएगा? वे इस बात को असंभव और अक्ल से दूर समझते थे, और इसलिए वे मज़ाक़ उड़ाते हुए यह सवाल पूछते थे।

अल्लाह तआला ने उनके इस इनकार का जवाब दिया कि जिस अल्लाह ने पहली बार उन्हें पैदा किया, वह उन्हें दोबारा पैदा करने पर पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है। मौत के बाद दोबारा जीवित करना अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है। यह उसकी क़ुदरत का एक सामान्य काम है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यह सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। जिस अल्लाह ने हमें पहली बार पैदा किया, वह हमें दोबारा ज़रूर उठाएगा। यह हमारे लिए कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी है कि मौत के बाद भी एक बेहतर ज़िंदगी हमारा इंतज़ार कर रही है। अगर हम अल्लाह पर ईमान लाएँ और उसके बताए रास्ते पर चलें, तो जन्नत की नेमतें हमारे लिए हैं। यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की यह ज़िंदगी आख़िरी नहीं है, बल्कि यह एक इम्तिहान की जगह है। हमें अपने अमल (कर्मों) को सुधारना चाहिए और अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत की तरफ दौड़ना चाहिए। अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा रखें और उसके वादे पर यक़ीन करें — क्योंकि उसका वादा सच्चा है और वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता।

🎧 सुनें

📜 आयत 96-100 — अल-इसरा

96قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ بِعِبَادِهِ خَبِيرًا بَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हमारे तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते बस ख़ुदा काफी है इसमें शक़ नहीं कि वह अपने बन्दों के हाल से खूब वाक़िफ और देखता रहता है
97وَمَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِ ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُمْ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِهِ ۖ وَنَحْشُرُهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ عُمْيًا وَبُكْمًا وَصُمًّا ۖ مَّأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ كُلَّمَا خَبَتْ زِدْنَاهُمْ سَعِيرًا
और ख़ुदा जिसकी हिदायत करे वही हिदायत याफता है और जिसको गुमराही में छोड़ दे तो (याद रखो कि) फिर उसके सिवा किसी को उसका सरपरस्त न पाआगे और क़यामत के दिन हम उन लोगों का मुँह के बल औंधे और गूँगें और बहरे क़ब्रों से उठाएँगें उनका ठिकाना जहन्नुम है कि जब कभी बुझने को होगी तो हम उन लोगों पर (उसे) और भड़का देंगे
98ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُم بِأَنَّهُمْ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا وَقَالُوا أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَدِيدًا
ये सज़ा उनकी इस वज़ह से है कि उन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगे कि जब हम (मरने के बाद सड़ गल) कर हड्डियाँ और रेज़ा रेज़ा हो जाएँगीं तो क्या फिर हम नये सिरे से पैदा करके उठाए जाएँगें
99۞ أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ قَادِرٌ عَلَىٰ أَن يَخْلُقَ مِثْلَهُمْ وَجَعَلَ لَهُمْ أَجَلًا لَّا رَيْبَ فِيهِ فَأَبَى الظَّالِمُونَ إِلَّا كُفُورًا
क्या उन लोगों ने इस पर भी नहीं ग़ौर किया कि वह ख़ुदा जिसने सारे आसमान और ज़मीन बनाए इस पर भी (ज़रुर) क़ादिर है कि उनके ऐसे आदमी दोबारा पैदा करे और उसने उन (की मौत) की एक मियाद मुक़र्रर कर दी है जिसमें ज़रा भी शक़ नहीं उस पर भी ये ज़ालिम इन्कार किए बग़ैर न रहे
100قُل لَّوْ أَنتُمْ تَمْلِكُونَ خَزَائِنَ رَحْمَةِ رَبِّي إِذًا لَّأَمْسَكْتُمْ خَشْيَةَ الْإِنفَاقِ ۚ وَكَانَ الْإِنسَانُ قَتُورًا
(ऐ रसूल) इनसे कहो कि अगर मेरे परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने भी तुम्हारे एख़तियार में होते तो भी तुम खर्च हो जाने के डर से (उनको) बन्द रखते और आदमी बड़ा ही तंग दिल है
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अनुवाद — अल-इसरा 98

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Tuesday, August 18, 2026

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