Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- रसूल: संदेशवाहक, भेजा हुआ।
- ग़ुलाम: लड़का, बेटा।
- ज़किय्यन: पवित्र, पापों से पाक, अच्छे आचरण वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मरियम (अलैहिस्सलाम) ने जिब्रील (अलैहिस्सलाम) को एक सुंदर इंसान की शक्ल में देखा, तो वह घबरा गईं और उनसे बचने की कोशिश की। उन्होंने अल्लाह की पनाह मांगी। तब जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा: "मैं कोई इंसान नहीं हूँ, बल्कि मैं तुम्हारे रब का भेजा हुआ संदेशवाहक हूँ। मैं इसलिए आया हूँ ताकि तुम्हें एक पवित्र लड़का प्रदान करूँ।"
यह संदेश सुनकर मरियम (अलैहिस्सलाम) को और अधिक आश्चर्य हुआ, क्योंकि उन्होंने कभी किसी पुरुष को हाथ नहीं लगाया था और न ही वह किसी बुरे काम में लिप्त थीं। लेकिन जिब्रील (अलैहिस्सलाम) का यह कहना था कि यह अल्लाह का फरमान है, और अल्लाह जब कुछ करने का इरादा करता है, तो उसके लिए बस कहता है "हो जा" और वह हो जाता है।
इस आयत में हमें कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं:
- अल्लाह की कुदरत: अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। बिना पिता के बच्चे का पैदा होना उसकी कुदरत का एक नमूना है, जैसे आदम (अलैहिस्सलाम) को बिना माँ-बाप के पैदा किया गया।
- पवित्रता की अहमियत: इस आयत में "ज़किय्यन" (पवित्र) शब्द का इस्तेमाल हुआ है, जो बताता है कि अल्लाह के करीबी बंदे पवित्र और पाक होते हैं। हमें भी अपने जीवन को पवित्र रखने की कोशिश करनी चाहिए।
- भरोसे का पैगाम: जब अल्लाह किसी बंदे को कोई ज़िम्मेदारी देता है, तो वह उसे पूरा करने की ताकत भी देता है। मरियम (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह पर भरोसा किया और यह भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
- फ़रिश्तों की इज़्ज़त: यह आयत हमें सिखाती है कि फ़रिश्ते अल्लाह के आदेशों को पूरा करने वाले सम्मानित प्राणी हैं। वे कभी अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते।
इस किस्से से हमें यह भी सीख मिलती है कि जब हमारे सामने कोई मुश्किल या अजीब स्थिति आए, तो हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह हर मुश्किल से निकलने का रास्ता निकालता है। मरियम (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी अपने ईमान को मजबूत रखना चाहिए और अल्लाह के फैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह अपने बंदों को जब कोई बड़ा काम सौंपता है, तो वह उन्हें पहले से तैयार करता है। मरियम (अलैहिस्सलाम) की पवित्रता और इबादत ही उन्हें ईसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी की माँ बनाने का कारण बनी। हमें भी अपने जीवन को अच्छे कामों से सजाना चाहिए, ताकि हम अल्लाह की रहमत के हकदार बन सकें।
📜 आयत 17-21 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 19
सूरा मरियम आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मेरे पास से हट जा) जिबरील ने कहा मैं तो…सूरा आयत 19/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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