मरियम · 26/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
فَكُلِي وَاشْرَبِي وَقَرِّي عَيْنًا ۖ فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ الْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِي إِنِّي نَذَرْتُ لِلرَّحْمَٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ الْيَوْمَ إِنسِيًّا ۝٢٦
Fakulee washrabee wa qarree `ainaa; fa immaa tarayinnna minal bashari ahadan faqooleee innee nazartu lir Rahmaani sawman falan ukallimal yawma insiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (चश्मे का पानी) पियो और (लड़के से) अपनी ऑंख ठन्डी करो फिर अगर तुम किसी आदमी को देखो (और वह तुमसे कुछ पूछे) तो तुम इशारे से कह देना कि मैंने खुदा के वास्ते रोजे क़ी नज़र की थी तो मैं आज हरगिज़ किसी से बात नहीं कर सकती

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَكُلِي – तो खाओ (खजूर से)
  • وَاشْرَبِي – और पीओ (नदी के पानी से)
  • وَقَرِّي عَيْنًا – और आँखें ठंडी करो, यानी खुश रहो और चिंता मत करो
  • فَإِمَّا تَرَيِنَّ – और अगर तुम देखो
  • نَذَرْتُ – मैंने नियत किया / व्रत लिया
  • صَوْمًا – यहाँ पर इसका अर्थ है खामोशी (बोलने का व्रत), जो उनके शरीयत में इबादत थी
  • إِنسِيًّا – किसी इंसान से

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) को इस कठिन घड़ी में तीन चीज़ों का हुक्म दिया: खाना, पीना और आँखों की ठंडक। यानी अल्लाह ने उन्हें फरमाया कि तुम खजूर खाओ, नदी का पानी पीओ और अपने बच्चे ईसा (अलैहिस्सलाम) की वजह से अपनी आँखों को ठंडा करो, यानी दिल खुश रखो और किसी भी बात का ग़म न करो। यह अल्लाह की तरफ से एक बड़ी राहत थी, क्योंकि मरियम (अलैहिस्सलाम) उस वक़्त अकेली थीं, एक नए बच्चे के साथ, और लोगों को उन पर शक था।

फिर अल्लाह ने उन्हें सिखाया कि अगर कोई इंसान तुम्हें देख ले और तुमसे सवाल करे, तो तुम इशारे से कह देना: "मैंने रहमान (अल्लाह) के लिए खामोशी का व्रत लिया है, आज मैं किसी इंसान से बात नहीं करूँगी।" यह उनके शरीयत में एक इबादत थी, और इसका मकसद यह था कि मरियम (अलैहिस्सलाम) को बहस और जवाब-तलबी से बचाया जाए, क्योंकि उनकी तरफ से बोलने की ज़िम्मेदारी खुद ईसा (अलैहिस्सलाम) लेंगे, जो पालने में ही अल्लाह की कुदरत से बोल उठेंगे। इस तरह अल्लाह ने उनकी पाकी और सच्चाई को सबके सामने साबित करना था।

यहाँ एक अहम बात यह है कि यह खामोशी का व्रत सिर्फ उनकी शरीयत में था, हमारी शरीयत (इस्लाम) में ऐसा कोई व्रत नहीं है। हमारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इससे मना किया है, क्योंकि इस्लाम में खामोशी से ज़्यादा अच्छी चीज़ अच्छी बात करना और लोगों से भलाई के साथ बातचीत करना है।

दावत (आमंत्रण) का पहलू:

इस आयत में हमारे लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि जब अल्लाह किसी बंदे को किसी मुश्किल में डालता है, तो वह उसके साथ राहत का रास्ता भी निकाल देता है। मरियम (अलैहिस्सलाम) अकेली थीं, लेकिन अल्लाह ने उन्हें खाना, पानी और दिल की खुशी दी। हमें भी जब ज़िंदगी में मुश्किलें आएँ, तो अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर मुश्किल के साथ आसानी रखता है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर यकीन रखो, उसकी रहमत से कभी निराश न हो, और हर हाल में उसका शुक्र अदा करते रहो। अल्लाह उन लोगों की मदद करता है जो उस पर भरोसा करते हैं और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं।



📜 आयत 24-28 — सूरा मरियम

24فَنَادَاهَا مِن تَحْتِهَا أَلَّا تَحْزَنِي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا
बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम कुढ़ों नहीं देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है
25وَهُزِّي إِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا
और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ
26فَكُلِي وَاشْرَبِي وَقَرِّي عَيْنًا ۖ فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ الْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِي إِنِّي نَذَرْتُ لِلرَّحْمَٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ الْيَوْمَ إِنسِيًّا
और (चश्मे का पानी) पियो और (लड़के से) अपनी ऑंख ठन्डी करो फिर अगर तुम किसी आदमी को देखो (और वह तुमसे कुछ पूछे) तो तुम इशारे से कह देना कि मैंने खुदा के वास्ते रोजे क़ी नज़र की थी तो मैं आज हरगिज़ किसी से बात नहीं कर सकती
27فَأَتَتْ بِهِ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُ ۖ قَالُوا يَا مَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْئًا فَرِيًّا
फिर मरियम उस लड़के को अपनी गोद में लिए हुए अपनी क़ौम के पास आयीं वह लोग देखकर कहने लगे ऐ मरियम तुमने तो यक़ीनन बहुत बुरा काम किया
28يَا أُخْتَ هَارُونَ مَا كَانَ أَبُوكِ امْرَأَ سَوْءٍ وَمَا كَانَتْ أُمُّكِ بَغِيًّا
ऐ हारून की बहन न तो तेरा बाप ही बुरा आदमी था और न तो तेरी माँ ही बदकार थी (ये तूने क्या किया)
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
26आयत

अनुवाद — मरियम 26

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Friday, October 2, 2026

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