मरियम · 67/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
أَوَلَا يَذْكُرُ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْئًا ۝٦٧
awalaa yazkurul insaanu annaa khalaqnaahu min qablu wa lam yaku shai`aa
📖 हिंदी अर्थ
क्या वह (आदमी) उसको नहीं याद करता कि उसको इससे पहले जब वह कुछ भी न था पैदा किया था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَذْكُرُ – याद करता है, सोच-विचार करता है
  • خَلَقْنَاهُ – हमने उसे पैदा किया
  • مِن قَبْلُ – पहले (अपनी इस वर्तमान अवस्था से पहले)
  • وَلَمْ يَكُ شَيْئًا – और वह कुछ भी नहीं था (अस्तित्व में नहीं था)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस इनसान की नादानी और भुलक्कड़पन पर अचरज का इज़हार करती है जो मरने के बाद दोबारा जीवित होकर उठने का इनकार करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या यह इनसान उस बात को याद नहीं करता कि हमने उसे पहले भी पैदा किया था, जब वह कुछ भी नहीं था? यानी उसका अस्तित्व ही नहीं था, न वह कोई चीज़ था, न उसका कोई नाम-ओ-निशान था। फिर अल्लाह ने उसे पैदा किया, उसे शक्ल दी, उसे ज़िंदगी दी, और उसे इस काबिल बनाया कि वह सोचे, समझे और अपने रब को पहचाने।

यह आयत उस इनकार करने वाले इनसान को उसकी अपनी पैदाइश की याद दिलाती है। जिस अल्लाह ने उसे पहली बार पैदा किया, जब वह कुछ भी नहीं था, क्या वह उसे दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता? बिल्कुल कर सकता है! दोबारा पैदा करना पहली बार पैदा करने से कहीं ज़्यादा आसान है। जिसने किसी चीज़ को शून्य से अस्तित्व में ला दिया, उसके लिए किसी चीज़ को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?

यहाँ अल्लाह तआला इनसान को उसकी फ़ितरत की तरफ लौटने की दावत दे रहा है। जब इनसान अपनी पैदाइश पर ग़ौर करता है कि वह एक क़तरे से बना, फिर ख़ून के लोथड़े से, फिर गोश्त के टुकड़े से, फिर हड्डियाँ बनीं, फिर उन पर गोश्त चढ़ा, फिर उसमें रूह डाली गई — तो उसे यक़ीन हो जाना चाहिए कि जिस रब ने यह सब किया, वह उसे दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी पैदाइश को भूलकर अपने रब की क़ुदरत से ग़ाफ़िल न हों। हर इनसान को चाहिए कि वह अपने अंदर झाँके, अपनी बनावट पर ग़ौर करे, और यक़ीन करे कि जिस अल्लाह ने हमें पहली बार बनाया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा और हमसे हमारे आमाल का हिसाब लेगा। यही ईमान इनसान को नेक राह पर चलाता है और उसे अल्लाह की इबादत का हक़ीक़ी जज़्बा देता है।

अल्लाह तआला हम सबको अपनी क़ुदरत पर ग़ौर करने और अपने दीन पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 65-69 — मरियम

65رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا
और तुम्हारा परवरदिगार कुछ भूलने वाला नहीं है सारे आसमान और ज़मीन का मालिक है और उन चीज़ों का भी जो दोनों के दरमियान में है तो तुम उसकी इबादत करो (और उसकी इबादत पर साबित) क़दम रहो भला तुम्हारे इल्म में उसका कोई हमनाम भी है
66وَيَقُولُ الْإِنسَانُ أَإِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا
और (बाज़) आदमी अबी बिन ख़लफ ताज्जुब से कहा करते हैं कि क्या जब मैं मर जाऊँगा तो जल्दी ही जीता जागता (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा
67أَوَلَا يَذْكُرُ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْئًا
क्या वह (आदमी) उसको नहीं याद करता कि उसको इससे पहले जब वह कुछ भी न था पैदा किया था
68فَوَرَبِّكَ لَنَحْشُرَنَّهُمْ وَالشَّيَاطِينَ ثُمَّ لَنُحْضِرَنَّهُمْ حَوْلَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا
तो वह (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार की (अपनी) क़िस्म हम उनको और शैतान को इकट्ठा करेगे फिर उन सब को जहन्नुम के गिर्दागिर्द घुटनों के बल हाज़िर करेंगे
69ثُمَّ لَنَنزِعَنَّ مِن كُلِّ شِيعَةٍ أَيُّهُمْ أَشَدُّ عَلَى الرَّحْمَٰنِ عِتِيًّا
फिर हर गिरोह में से ऐसे लोगों को अलग निकाल लेंगे (जो दुनिया में) खुदा से औरों की निस्बत अकड़े-अकड़े फिरते थे
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अनुवाद — मरियम 67

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Tuesday, August 18, 2026

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