मरियम · 68/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
فَوَرَبِّكَ لَنَحْشُرَنَّهُمْ وَالشَّيَاطِينَ ثُمَّ لَنُحْضِرَنَّهُمْ حَوْلَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا ۝٦٨
Fawa Rabbika lanahshu rannahum wash shayaateena summa lanuhdirannahum hawla jahannama jisiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
तो वह (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार की (अपनी) क़िस्म हम उनको और शैतान को इकट्ठा करेगे फिर उन सब को जहन्नुम के गिर्दागिर्द घुटनों के बल हाज़िर करेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जिथियन (جِثِيًّا): घुटनों के बल बैठे हुए, अपमानित और भयभीत अवस्था में। यह उस व्यक्ति की स्थिति होती है जो किसी भयानक दृश्य या सज़ा के सामने घुटनों के बल गिर जाता है, क्योंकि उसके पैरों में खड़े रहने की ताकत नहीं रहती।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ की क़सम खाकर उन लोगों को चेतावनी दी है जो आख़िरत के दिन और दोबारा उठाए जाने को झुठलाते हैं। अल्लाह फ़रमाता है: "तुम्हारे रब की क़सम! हम उन सबको ज़रूर इकट्ठा करेंगे, और उनके साथ उनके साथी शैतानों को भी।" यानी जिस तरह दुनिया में हर काफ़िर और मुनाफ़िक़ शैतान के पीछे चला और उसकी बातों को मानता रहा, उसी तरह क़यामत के दिन उसे उसी शैतान के साथ उठाया जाएगा। हर काफ़िर को उसके शैतान के साथ एक ज़ंजीर में जकड़ दिया जाएगा, ताकि यह साबित हो जाए कि दुनिया में जो रिश्ता उनका आपस में था, वही रिश्ता आख़िरत में भी उनकी रूसवाई और सज़ा का ज़रिया बनेगा।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "फिर हम उन सबको जहन्नम के चारों ओर घुटनों के बल लाकर खड़ा करेंगे।" यह वह मंज़र होगा जब वे जहन्नम में दाख़िल होने से पहले उसके किनारे खड़े होंगे, और उसकी भयानक आग और उसकी लपटों को देखकर उनके दिल काँप उठेंगे। वे इतने डरे हुए और बेबस होंगे कि खड़े भी नहीं हो पाएँगे, बल्कि घुटनों के बल गिर जाएँगे। यह उस क़ैदी की तरह होगा जिसे सज़ा से पहले उसकी जगह पर लाया जाए और वह डर के मारे बेहाल हो जाए।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला का वादा और उसकी चेतावनी दोनों सच हैं। जो लोग आज मौत के बाद की ज़िंदगी को भूलकर अपनी ख्वाहिशों में मगन हैं, वे उस दिन अपनी आँखों से देख लेंगे कि अल्लाह की हर बात सच थी। लेकिन उस दिन पछताने का कोई फायदा नहीं होगा। इसलिए आज ही हमें अपने रब की तरफ लौटना चाहिए, उसके हुक्मों को मानना चाहिए और उस रास्ते पर चलना चाहिए जो हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाए। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, उसने हमें दुनिया में मौका दिया है कि हम अपनी गलतियों को सुधार लें। उसकी रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा हमेशा खुला है, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और अपने अमल को सुधार लें।



📜 आयत 66-70 — मरियम

66وَيَقُولُ الْإِنسَانُ أَإِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا
और (बाज़) आदमी अबी बिन ख़लफ ताज्जुब से कहा करते हैं कि क्या जब मैं मर जाऊँगा तो जल्दी ही जीता जागता (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा
67أَوَلَا يَذْكُرُ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْئًا
क्या वह (आदमी) उसको नहीं याद करता कि उसको इससे पहले जब वह कुछ भी न था पैदा किया था
68فَوَرَبِّكَ لَنَحْشُرَنَّهُمْ وَالشَّيَاطِينَ ثُمَّ لَنُحْضِرَنَّهُمْ حَوْلَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا
तो वह (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार की (अपनी) क़िस्म हम उनको और शैतान को इकट्ठा करेगे फिर उन सब को जहन्नुम के गिर्दागिर्द घुटनों के बल हाज़िर करेंगे
69ثُمَّ لَنَنزِعَنَّ مِن كُلِّ شِيعَةٍ أَيُّهُمْ أَشَدُّ عَلَى الرَّحْمَٰنِ عِتِيًّا
फिर हर गिरोह में से ऐसे लोगों को अलग निकाल लेंगे (जो दुनिया में) खुदा से औरों की निस्बत अकड़े-अकड़े फिरते थे
70ثُمَّ لَنَحْنُ أَعْلَمُ بِالَّذِينَ هُمْ أَوْلَىٰ بِهَا صِلِيًّا
फिर जो लोग जहन्नुम में झोंके जाएँगे ज्यादा सज़ावार हैं हम उनसे खूब वाक़िफ हैं
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अनुवाद — मरियम 68

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Tuesday, August 18, 2026

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