अल-बकरा · 107/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ ۝١٠٧
Alam ta`lam annallaaha lahoo mulkus samaawaati wal ard; wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम नहीं जानते कि आसमान की सलतनत बेशुबहा ख़ास खुदा ही के लिए है और खुदा के सिवा तुम्हारा न कोई सरपरस्त है न मददगार

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُلْكُ: स्वामित्व, राज्य, अधिकार।
  • وَلِيٌّ: सहायक, मित्र, संरक्षक।
  • نَصِيرٌ: मददगार, रक्षक।

व्याख्या:

हे नबी! क्या आपको यह ज्ञात नहीं कि अल्लाह ही आकाशों और धरती का स्वामी है? उसी का सारा राज्य है, वही इसका शासक और प्रबंधक है। वह जो चाहता है, आदेश देता है, जो चाहता है, रोकता है, और जो चाहता है, कानून बनाता या बदलता है। उसकी आज्ञा का पालन करना सभी पर अनिवार्य है, और उसके फैसले के आगे सिर झुकाना हर प्राणी का कर्तव्य है।

फिर अल्लाह तआला काफिरों और अवज्ञाकारियों को चेतावनी देते हुए कहता है: जब अल्लाह का अज़ाब (दंड) आ जाएगा, तो अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई वली (संरक्षक) नहीं होगा जो तुम्हारे काम संभाल सके, और न ही कोई नसीर (सहायक) होगा जो तुम्हें उस दंड से बचा सके। अल्लाह ही अकेला है जो अपने बंदों का कार्य संभालता है, उनकी मदद करता है, और उन्हें हर बुराई से बचाता है। उसके सिवा कोई और इन कामों पर सक्षम नहीं है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ही सारे जहान का मालिक है, इसलिए हमें केवल उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
  2. जब हमें यह विश्वास हो जाए कि अल्लाह के सिवा कोई सहायक और रक्षक नहीं है, तो हमारा दिल उसी पर भरोसा करता है, और हम किसी इंसान, धन या सत्ता से नहीं डरते।
  3. यह आयत मुसलमानों को धैर्य और साहस देती है कि वे अल्लाह के आदेशों पर अमल करें, चाहे दुनिया में उनका कोई समर्थक न हो, क्योंकि असली मदद अल्लाह की तरफ से आती है।
  4. यह चेतावनी भी है कि जो लोग अल्लाह की अवज्ञा करते हैं, उन्हें अंततः अपने कर्मों का फल भुगतना होगा, और उस दिन कोई उन्हें बचाने वाला नहीं होगा। इसलिए हमें अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के अनुसार ढालना चाहिए।


📜 आयत 105-109 — अल-बकरा

105مَّا يَوَدُّ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَلَا الْمُشْرِكِينَ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْكُم مِّنْ خَيْرٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۗ وَاللَّهُ يَخْتَصُّ بِرَحْمَتِهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
ऐ रसूल अहले किताब में से जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया वह और मुशरेकीन ये नहीं चाहते हैं कि तुम पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से भलाई (वही) नाज़िल की जाए और (उनका तो इसमें कुछ इजारा नहीं) खुदा जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए ख़ास कर लेता है और खुदा बड़ा फज़ल (करने) वाला है
106۞ مَا نَنسَخْ مِنْ آيَةٍ أَوْ نُنسِهَا نَأْتِ بِخَيْرٍ مِّنْهَا أَوْ مِثْلِهَا ۗ أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल) हम जब कोई आयत मन्सूख़ करते हैं या तुम्हारे ज़ेहन से मिटा देते हैं तो उससे बेहतर या वैसी ही (और) नाज़िल भी कर देते हैं क्या तुम नहीं जानते कि बेशुबहा खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
107أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
क्या तुम नहीं जानते कि आसमान की सलतनत बेशुबहा ख़ास खुदा ही के लिए है और खुदा के सिवा तुम्हारा न कोई सरपरस्त है न मददगार
108أَمْ تُرِيدُونَ أَن تَسْأَلُوا رَسُولَكُمْ كَمَا سُئِلَ مُوسَىٰ مِن قَبْلُ ۗ وَمَن يَتَبَدَّلِ الْكُفْرَ بِالْإِيمَانِ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاءَ السَّبِيلِ
(मुसलमानों) क्या तुम चाहते हो कि तुम भी अपने रसूल से वैसै ही (बेढ़ंगे) सवालात करो जिस तरह साबिक़ (पहले) ज़माने में मूसा से (बेतुके) सवालात किए गए थे और जिस शख्स ने ईमान के बदले कुफ्र एख़तेयार किया वह तो यक़ीनी सीधे रास्ते से भटक गया
109وَدَّ كَثِيرٌ مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَوْ يَرُدُّونَكُم مِّن بَعْدِ إِيمَانِكُمْ كُفَّارًا حَسَدًا مِّنْ عِندِ أَنفُسِهِم مِّن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْحَقُّ ۖ فَاعْفُوا وَاصْفَحُوا حَتَّىٰ يَأْتِيَ اللَّهُ بِأَمْرِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(मुसलमानों) अहले किताब में से अक्सर लोग अपने दिली हसद की वजह से ये ख्वाहिश रखते हैं कि तुमको ईमान लाने के बाद फिर काफ़िर बना दें (और लुत्फ तो ये है कि) उन पर हक़ ज़ाहिर हो चुका है उसके बाद भी (ये तमन्ना बाक़ी है) पस तुम माफ करो और दरगुज़र करो यहाँ तक कि खुदा अपना (कोई और) हुक्म भेजे बेशक खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — अल-बकरा 107

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Tuesday, August 18, 2026

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