अल-बकरा · 147/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ ۝١٤٧
Alhaqqu mir Rabbika falaa takoonana minal mumtareen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल तबदीले क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है पस तुम कहीं शक करने वालों में से न हो जाना
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْحَقُّ: सत्य, वास्तविकता, जो किसी भी संदेह से परे हो।
  • مِن رَّبِّكَ: तुम्हारे पालनहार की ओर से।
  • الْمُمْتَرِينَ: संदेह करने वाले, शक करने वाले लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह सत्य — जो कुछ भी तुम्हें दिया गया है, चाहे वह क़ुरआन हो या वह ज्ञान और मार्गदर्शन जो तुम्हें प्राप्त हुआ है — तुम्हारे पालनहार की ओर से है। यह कोई मानवीय रचना नहीं, कोई कल्पना नहीं, और न ही कोई मिथ्या बात है। यह परम सत्य है जो स्वयं अल्लाह की ओर से उतरा है। इसलिए ऐ नबी! तुम उन लोगों में से मत बनो जो इस सत्य में संदेह करते हैं। यद्यपि यह आदेश सीधे तौर पर पैगंबर ﷺ को संबोधित है, लेकिन इसका उद्देश्य उनकी उम्मत को भी शिक्षा देना है — कि वे भी इस सत्य पर दृढ़ रहें और किसी भी प्रकार के संदेह या भ्रम में न पड़ें। यहाँ संदेह से तात्पर्य उस शक से है जो हृदय में पैदा होता है और आस्तिकता को कमज़ोर कर देता है। यह आयत एक पुख्ता घोषणा है कि जो कुछ अल्लाह की ओर से आया है, वही सत्य है, और उसके अलावा जो कुछ भी है, वह असत्य और भ्रम है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य का स्रोत केवल अल्लाह है। जो भी अल्लाह की ओर से आया है, वही सच्चा और स्थायी है, चाहे दुनिया की राय कुछ भी हो।
  2. यह आयत मुसलमान को दृढ़ विश्वास और यक़ीन की शिक्षा देती है — कि वह किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म और क़ुरआन के प्रति संदेह न पाले, क्योंकि संदेह ईमान को कमज़ोर कर देता है।
  3. यहाँ अल्लाह ने अपने नबी को भी संबोधित करते हुए यह सिखाया कि सत्य पर अडिग रहना कितना महत्वपूर्ण है। यह हमें बताता है कि सबसे बड़ा नेक काम यह है कि इंसान सत्य को पहचाने और उस पर स्थिर रहे, चाहे उसे अकेलेपन या विरोध का सामना ही क्यों न करना पड़े।
  4. यह आयत मुसलमान को यह भी सिखाती है कि वह अपने ज्ञान और समझ को अल्लाह की वही (प्रकाशना) पर आधारित करे, न कि केवल अपनी बुद्धि या दूसरों की राय पर, क्योंकि सच्चा मार्गदर्शन तो अल्लाह की ओर से ही है।
  5. अंत में, यह आयत हमें आश्वस्त करती है कि इस्लाम का हर सिद्धांत, हर आदेश और हर शिक्षा सत्य पर आधारित है — इसलिए इसे अपनाने में कोई झिझक या शक नहीं होना चाहिए। यही वह रास्ता है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी की ओर ले जाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 145-149 — अल-बकरा

145وَلَئِنْ أَتَيْتَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ بِكُلِّ آيَةٍ مَّا تَبِعُوا قِبْلَتَكَ ۚ وَمَا أَنتَ بِتَابِعٍ قِبْلَتَهُمْ ۚ وَمَا بَعْضُهُم بِتَابِعٍ قِبْلَةَ بَعْضٍ ۚ وَلَئِنِ اتَّبَعْتَ أَهْوَاءَهُم مِّن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ ۙ إِنَّكَ إِذًا لَّمِنَ الظَّالِمِينَ
और अगर अहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे क़िबले को न मानेंगें और न तुम ही उनके क़िबले को मानने वाले हो और ख़ुद अहले किताब भी एक दूसरे के क़िबले को नहीं मानते और जो इल्म क़ुरान तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे
146الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْرِفُونَهُ كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَاءَهُمْ ۖ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنْهُمْ لَيَكْتُمُونَ الْحَقَّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
जिन लोगों को हमने किताब (तौरैत वग़ैरह) दी है वह जिस तरह अपने बेटों को पहचानते है उसी तरह तरह वह उस पैग़म्बर को भी पहचानते हैं और उन में कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो दीदए व दानिस्ता (जान बुझकर) हक़ बात को छिपाते हैं
147الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
ऐ रसूल तबदीले क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है पस तुम कहीं शक करने वालों में से न हो जाना
148وَلِكُلٍّ وِجْهَةٌ هُوَ مُوَلِّيهَا ۖ فَاسْتَبِقُوا الْخَيْرَاتِ ۚ أَيْنَ مَا تَكُونُوا يَأْتِ بِكُمُ اللَّهُ جَمِيعًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है पस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
149وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ وَإِنَّهُ لَلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्ज़िदे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेशक ये नया क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है
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अनुवाद — अल-बकरा 147

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Tuesday, August 18, 2026

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