अल-बकरा · 27/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
الَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ اللَّهِ مِن بَعْدِ مِيثَاقِهِ وَيَقْطَعُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ ۝٢٧
Allazeena yanqudoona `ahdal laahi mim ba`di meesaaqihee wa yaqt`oona maaa amaral laahu biheee ai yoosala wa yufsidoona fil ard; ulaaa`ika hum khaasirron
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग खुदा के एहदो पैमान को मज़बूत हो जाने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (ताल्लुक़ात) का खुदा ने हुक्म दिया है उनको क़ताआ कर देते हैं और मुल्क में फसाद करते फिरते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَنقُضُونَ: तोड़ना, भंग करना।
  • عَهْدَ اللَّهِ: अल्लाह का वचन और आदेश।
  • مِيثَاقِهِ: उसकी पक्की प्रतिज्ञा (जो अल्लाह ने ली थी)।
  • يَقْطَعُونَ: काटना, तोड़ना।
  • أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ: जिसे जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है (जैसे रिश्ते-नाते, ईमान, रसूलों पर ईमान)।
  • يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ: धरती में बिगाड़ पैदा करना, अवज्ञा और पाप फैलाना।
  • الْخَاسِرُونَ: घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों का वर्णन करती है जो अल्लाह की ली गई प्रतिज्ञा को तोड़ते हैं। अल्लाह ने इंसानों से यह वचन लिया था कि वे उसकी एकता (तौहीद) को मानेंगे, उसकी आज्ञा का पालन करेंगे और उसके भेजे हुए रसूलों पर ईमान लाएँगे। यह वचन अत्यंत पक्का था, जिसे अल्लाह ने रसूलों के भेजने और किताबों के उतारने से और भी मज़बूत कर दिया। इसके बावजूद ये लोग इस वचन को भंग कर देते हैं।

इसके अलावा, वे उन चीज़ों को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है अल्लाह और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाना, सभी नबियों को मानना, और रिश्तेदारों (अर्हाम) के साथ अच्छा व्यवहार करना और उनसे नाता जोड़ना शामिल है। ये लोग इन सबको तोड़ते हैं।

फिर वे धरती में फ़साद फैलाते हैं, यानी पाप और अवज्ञा करते हैं, लोगों को सत्य मार्ग से रोकते हैं, और अल्लाह के दीन में रुकावटें डालते हैं। ऐसे लोगों के बारे में अल्लाह फ़रमाता है कि यही सच्चे घाटे में हैं—दुनिया में भी, क्योंकि वे सत्य और भलाई से वंचित रहते हैं, और आख़िरत में भी, क्योंकि उनका ठिकाना जहन्नम है। उनका यह नुकसान पूर्ण और स्पष्ट है, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की रहमत और सफलता के बदले ग़ुस्सा और असफलता खरीद ली।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. वचन की पवित्रता: अल्लाह से किया गया वचन अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह से किए गए वादे (ईमान, इबादत, आज्ञाकारिता) को पूरा करे और उसे तोड़ने से बचे।
  2. रिश्तों की अहमियत: इस्लाम रिश्तेदारों से जुड़ने और उनके साथ भलाई करने पर बहुत ज़ोर देता है। रिश्ते तोड़ना कबीरा गुनाह है और अल्लाह की नाराज़गी का कारण बनता है।
  3. फ़साद से बचाव: धरती में फ़साद फैलाना (चाहे वह सामाजिक, आर्थिक या नैतिक हो) इस्लाम में सख्त मना है। मुसलमान को चाहिए कि वह सुधार और भलाई का ज़रिया बने, न कि बिगाड़ का।
  4. सच्चा नुकसान: यह आयत हमें सिखाती है कि असली नुकसान वह नहीं जो दुनिया के माल-दौलत में हो, बल्कि असली नुकसान अल्लाह से दूरी और उसकी नाराज़गी है। जो इंसान अल्लाह की राह से भटक जाए, वही सबसे बड़ा घाटे में है।
  5. ईमान की पक्की नींव: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह ने हमसे जो वचन लिया है—उसकी इबादत और रसूलों की पैरवी—उसे मज़बूती से थामे रहना चाहिए, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — अल-बकरा

25وَبَشِّرِ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ كُلَّمَا رُزِقُوا مِنْهَا مِن ثَمَرَةٍ رِّزْقًا ۙ قَالُوا هَٰذَا الَّذِي رُزِقْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَأُتُوا بِهِ مُتَشَابِهًا ۖ وَلَهُمْ فِيهَا أَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ ۖ وَهُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर) खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे
26۞ إِنَّ اللَّهَ لَا يَسْتَحْيِي أَن يَضْرِبَ مَثَلًا مَّا بَعُوضَةً فَمَا فَوْقَهَا ۚ فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا فَيَعْلَمُونَ أَنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۖ وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَيَقُولُونَ مَاذَا أَرَادَ اللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۘ يُضِلُّ بِهِ كَثِيرًا وَيَهْدِي بِهِ كَثِيرًا ۚ وَمَا يُضِلُّ بِهِ إِلَّا الْفَاسِقِينَ
बेशक खुदा मच्छर या उससे भी बढ़कर (हक़ीर चीज़) की कोई मिसाल बयान करने में नहीं झेंपता पस जो लोग ईमान ला चुके हैं वह तो ये यक़ीन जानते हैं कि ये (मिसाल) बिल्कुल ठीक है और ये परवरदिगार की तरफ़ से है (अब रहे) वह लोग जो काफ़िर है पस वह बोल उठते हैं कि खुदा का उस मिसाल से क्या मतलब है, ऐसी मिसाल से ख़ुदा बहुतेरों की हिदायत करता है मगर गुमराही में छोड़ता भी है तो ऐसे बदकारों को
27الَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ اللَّهِ مِن بَعْدِ مِيثَاقِهِ وَيَقْطَعُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
जो लोग खुदा के एहदो पैमान को मज़बूत हो जाने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (ताल्लुक़ात) का खुदा ने हुक्म दिया है उनको क़ताआ कर देते हैं और मुल्क में फसाद करते फिरते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
28كَيْفَ تَكْفُرُونَ بِاللَّهِ وَكُنتُمْ أَمْوَاتًا فَأَحْيَاكُمْ ۖ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(हाँए) क्यों कर तुम खुदा का इन्कार कर सकते हो हालाँकि तुम (माओं के पेट में) बेजान थे तो उसी ने तुमको ज़िन्दा किया फिर वही तुमको मार डालेगा, फिर वही तुमको (दोबारा क़यामत में) ज़िन्दा करेगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाओगे
29هُوَ الَّذِي خَلَقَ لَكُم مَّا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ فَسَوَّاهُنَّ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ ۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
वही तो वह (खुदा) है जिसने तुम्हारे (नफ़े) के ज़मीन की कुल चीज़ों को पैदा किया फिर आसमान (के बनाने) की तरफ़ मुतावज्जेह हुआ तो सात आसमान हमवार (व मुसतहकम) बना दिए और वह (खुदा) हर चीज़ से (खूब) वाक़िफ है
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अनुवाद — अल-बकरा 27

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Tuesday, August 18, 2026

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