अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اتَّقُوا اللَّهَ: अल्लाह से डरो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।
- وَذَرُوا: छोड़ दो, त्याग दो।
- مَا بَقِيَ مِنَ الرِّبَا: ब्याज (सूद) में से जो कुछ बाकी रह गया है (अर्थात जो रकम लोगों पर ब्याज के रूप में बाकी है)।
- إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ: यदि तुम सच्चे ईमान वाले हो।
विस्तृत तफसीर:
ऐ ईमान लाने वालों! तुम अल्लाह से डरो और उसकी नाफ़रमानी से बचो। अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को हर बुराई से रोकती है और हर भलाई की तरफ ले जाती है। जब तक इंसान के दिल में अल्लाह का खौफ़ होता है, वह कभी भी उस चीज़ की तरफ नहीं बढ़ता जो अल्लाह को नापसंद है।
अल्लाह तआला इस आयत में ईमान वालों को साफ़ हुक्म दे रहा है कि वे ब्याज (सूद) का जो हिस्सा लोगों पर बाकी है, उसे छोड़ दें। यानी जो रकम उन्होंने ब्याज के रूप में लोगों को उधार दी थी और उस पर ब्याज बढ़ता जा रहा है, उस ब्याज के हिस्से को माफ कर दें और सिर्फ अपनी असल रकम (मूलधन) ले सकते हैं। यह हुक्म उस वक्त आया जब ब्याज को हराम किया गया था, और जो लोग पहले से ब्याज के लेन-देन में लगे हुए थे, उन्हें आदेश दिया गया कि अब से ब्याज का कोई लेन-देन न करें और जो ब्याज बाकी है उसे भी छोड़ दें।
अल्लाह तआला फरमाता है: "अगर तुम सच्चे ईमान वाले हो" — यानी ईमान का दावा सिर्फ ज़ुबान से नहीं होता, बल्कि असली ईमान वह है जो दिल में हो और अमल से साबित हो। अगर तुम सच में अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखते हो, तो अल्लाह के हुक्म को बिना किसी हिचकिचाहट के मानो। ईमान की पहचान यही है कि इंसान अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका दे, चाहे उसे अपनी दुनियावी नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े।
यह आयत बताती है कि ब्याज एक ऐसा गुनाह है जो अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ा है। अल्लाह ने ब्याज को हराम किया और उससे बचने का हुक्म दिया। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह ब्याज के हर रूप से बचे — चाहे वह बैंक का ब्याज हो, या किसी और तरह का सूद। अल्लाह ने ब्याज के बदले हलाल कमाई और व्यापार को जायज़ किया है, जिसमें बरकत होती है।
प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखो, अल्लाह का हुक्म मानने में ही भलाई है। ब्याज छोड़ने से अल्लाह तुम्हें बरकत देगा और तुम्हारे रिज़्क़ में खैरियत पैदा करेगा। दुनिया में जो माल ब्याज से इकट्ठा होता है, उसमें कोई बरकत नहीं होती और आख़िरत में भी यह इंसान के लिए अज़ाब का सबब बनेगा। इसलिए अल्लाह के हुक्म पर अमल करो, ब्याज छोड़ो और हलाल कमाई को अपनाओ — यही तुम्हारे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई है।
📜 आयत 276-280 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 278
सूरा अल-बकरा आयत 278 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और जो सूद लोगों के…सूरा आयत 278/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 276–280. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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